
Dabur vs FSSAI: देश की बड़ी एफएमसीजी कंपनी डाबर इंडिया (Dabur India) ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) पर गंभीर आरोप लगाया है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी का कहना है कि नियामक ने प्रतिस्पर्धी कंपनियों के फायदे के लिए उसके '100 फीसदी' दावों वाले प्रोडक्ट्स की बिक्री पर रोक लगाई है, जिससे करीब 150 करोड़ रुपये का माल खतरे में पड़ गया है। इसके लिए डाबर ने दिल्ली हाई कोर्ट में 6 अगस्त को एक याचिका दायर की है।
दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका में कंपनी ने आरोप लगाया कि FSSAI ने कंपनी को अपना पक्ष रखने का मौका दिए बिना ही प्रतिबंध का आदेश दे दिया था। डाबर ने यह सवाल भी उठाया कि रेगुलेटर यह कैसे कह सकता है कि '100 फीसदी प्योर' जैसे दावे दूसरी कंपनियों को नुकसान पहुंचाते हैं, जबकि ऐसे दावे किसी दूसरे प्रोडक्ट का जिक्र किए बिना दिए गए थे। इसके साथ ही कंपनी ने कहा कि '100 फीसदी' शब्द का इस्तेमाल पूरी इंडस्ट्री में होता है।
डाबर ने कोर्ट को बताया कि रेगुलेटर के आदेश का असर सीधे उसकी रिटेल सप्लाई चेन पर पड़ा। इससे 150 करोड़ रुपये का माल बर्बाद होने के खतरे में आ गया। कंपनी ने यह बताया कि FSSAI ने यह आदेश सोशल मीडिया पर सार्वजनिक कर दिया, जिसके बाद चैनल पार्टनर्स को '100 फीसदी' दावे वाले प्रोडक्ट न बेचने की सलाह दी गई। डाबर ने यह भी बताया कि वह पहले से ही अपने प्रोडक्ट्स के लेबल और विज्ञापनों से '100 फीसदी' शब्द हटाने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी थी। कंपनी ने कहा कि वह अपने प्रोडक्ट्स की शुद्धता और गुणवत्ता पर कायम है और उसने कभी भ्रामक दावे नहीं किए।
दिल्ली हाईकोर्ट ने FSSAI के इस आदेश पर 24 अगस्त तक रोक लगा दी है। जस्टिस अमित महाजन ने कहा कि नियामक को डाबर का पक्ष सुने बिना यह प्रतिबंध आदेश पारित नहीं करना चाहिए था। FSSAI की ओर से पेश वकील आशीष दीक्षित ने कोर्ट को बताया कि डाबर के '100 फीसदी' दावों से जुड़ा मामला पहले से ही दिल्ली हाईकोर्ट में रियल फ्रूट जूस प्रोडक्ट्स से संबंधित एक अलग याचिका में लंबित है, जिसमें डाबर को अंतरिम राहत मिल चुकी है।