कारोबार

Income Tax Return की 31 जुलाई की डेडलाइन चूकने के बाद भी क्या आप पा सकते हैं टैक्स रिफंड? जानिए क्या है उपाय

Belated ITR Filing: 31 जुलाई की ITR डेडलाइन चूकने के बाद भी 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न दाखिल कर टैक्स रिफंड प्राप्त किया जा सकता है। हालांकि, लेट फीस, ब्याज और कुछ अतिरिक्त नियमों का पालन करना जरूरी होता है।
2 min read
Aug 06, 2026
Belated ITR Filing Guide And Rules
डेडलाइन के बाद ITR भरने पर भी टैक्स रिफंड मिलेगा। (PC: Freepik)

TDS Refund: ITR-1 और ITR-2 फॉर्म के जरिए रिटर्न भरने वाले जिन लोगों ने 31 जुलाई की डेडलाइन से पहले ITR दाखिल नहीं किया, वे अब भी अपना टैक्स रिफंड प्राप्त कर सकते हैं। इनकम टैक्स कानून के तहत निर्धारित समय के भीतर बिलेटेड रिटर्न दाखिल करने की सुविधा उपलब्ध होती है। यदि किसी टैक्सपेयर से टीडीएस, एडवांस टैक्स या सेल्फ असेसमेंट टैक्स के रूप में जरूरत से अधिक टैक्स जमा हो गया है, तो वैध ITR दाखिल करने पर उसका रिफंड मिल सकता है। हालांकि, समय सीमा के बाद रिटर्न दाखिल करने पर लेट फीस और अन्य शुल्क लागू होंगे, जिनका पालन करना जरूरी है।

बिलेटेड रिटर्न से भी मिलेगा रिफंड

इनकम टैक्स नियमों के अनुसार, जो टैक्सपेयर्स 31 जुलाई की मूल समय सीमा तक ITR दाखिल नहीं कर सके, वे 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। यदि इस रिटर्न में यह साबित होता है कि टैक्सपेयर ने जरूरत से ज्यादा टैक्स जमा किया है, तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (ITD) सत्यापन के बाद रिफंड जारी कर सकता है। रिफंड का दावा केवल वैध ITR दाखिल करने पर ही स्वीकार किया जाता है। इसलिए सही बैंक खाता, पैन, आधार और टैक्स से जुड़ी सभी जानकारी सही दर्ज करना जरूरी है।

देर से रिटर्न भरने पर क्या असर होगा?

समय पर ITR दाखिल करने वाले टैक्सपेयर्स का रिफंड सामान्य रूप से जल्दी प्रोसेस होता है, जबकि बिलेटेड रिटर्न में रिफंड मिलने में अधिक समय लग सकता है। डिपार्टमेंट रिटर्न का ई-वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद ही रिफंड प्रोसेस शुरू करता है। सामान्य परिस्थितियों में रिफंड राशि चार से पांच सप्ताह के भीतर बैंक खाते में भेजी जा सकती है। यदि किसी टैक्सपेयर का पिछले वर्षों का कोई बकाया टैक्स है, तो विभाग रिफंड की राशि को उस बकाया के समायोजन में इस्तेमाल कर सकता है। ऐसे में मिलने वाला रिफंड आंशिक या पूरी तरह समायोजित हो सकता है।

बिलेटेड रिटर्न मिस होने के बाद ITR-U का विकल्प

Tax2Win के CEO एवं सह-संस्थापक अभिषेक सोनी के अनुसार, लेट फीस आपकी कुल आय पर निर्भर करती है। बिलेटेड रिटर्न दाखिल करने पर कुल आय पांच लाख रुपये से अधिक होने पर अधिकतम 5,000 रुपये और पांच लाख रुपये तक आय होने पर अधिकतम 1,000 रुपये तक लेट फीस देनी पड़ती है। यदि टैक्सपेयर पर टैक्स बकाया है, तो आयकर अधिनियम की धारा 234A के तहत प्रति माह या 1फीसदी की दर से साधारण ब्याज भी देना होगा। यदि 31 दिसंबर 2026 की बिलेटेड रिटर्न की समय सीमा भी चूक जाती है, तो अधिकांश मामलों में केवल अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) का विकल्प बचता है। हालांकि ITR-U का उपयोग नया या टैक्स रिफंड पाने के लिए नहीं किया जा सकता।

Updated on:
06 Aug 2026 11:22 am
Published on:
06 Aug 2026 11:17 am