
RBI ने Repo Rate में बदलाव नहीं किया। (फोटो:AI)
FD Interest Rate: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आज रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। लेकिन पिछले साल रेपो रेट में कुल 125 बेसिस पॉइंट यानी 1.25 फीसदी की कटौती की थी। हालांकि, यह कटौती अभी पूरी तरह ग्राहकों को ट्रांसफर नहीं हुई है। RBI के नए ब्याज दर ट्रांसमिशन (Rate Transmission) के आंकड़े बताते हैं कि लोन की ब्याज दरों में तो अच्छी गिरावट आई है, लेकिन फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरों में कमी अपेक्षाकृत धीमी रही है।
मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा (Sanjay Malhotra) ने कहा कि मई-जून के दौरान क्रेडिट बाजार में ब्याज दरों का ट्रांसमिशन कुछ धीमा पड़ा है। उनके अनुसार, इस अवधि में डिपॉजिट और लेंडिंग रेट्स में कुछ सख्ती (Hardening) देखने को मिली, जिससे ट्रांसमिशन की गति पहले की तुलना में कम रही। RBI ने लगातार चौथी MPC बैठक में रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर स्थिर रखा है, लेकिन पिछले साल की कटौतियों का असर अभी भी धीरे-धीरे बैंकिंग सिस्टम में दिखाई दे रहा है।
RBI के अनुसार, फरवरी 2025 से जून 2026 के बीच शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों (Scheduled Commercial Banks) की नई रुपये आधारित लोन (Fresh Rupee Loans) की औसत ब्याज दर (WALR) में 80 बेसिस पॉइंट की कमी आई है। वहीं, पुराने (Outstanding) लोन की औसत ब्याज दर 91 बेसिस पॉइंट घटी है। इसका मतलब है कि 125 बेसिस पॉइंट की रेपो रेट कटौती में से लगभग 64 फीसदी राहत नए लोन और करीब 72.8 फीसदी राहत पुराने फ्लोटिंग रेट लोन तक पहुंची है। यानी जिन ग्राहकों की EMI फ्लोटिंग ब्याज दर से जुड़ी है, उन्हें अपेक्षाकृत अधिक फायदा मिला है।
डिपॉजिट की बात करें तो ट्रांसमिशन काफी धीमा रहा। नए टर्म डिपॉजिट (Fresh Deposits) की औसत ब्याज दर में केवल 63 बेसिस पॉइंट और पुराने डिपॉजिट की दर में 51 बेसिस पॉइंट की कमी आई है। इसका अर्थ है कि रेपो रेट कटौती का असर नई FD पर लगभग 50.4 फीसदी और पहले से चल रही FD पर केवल 40.8 फीसदी ही दिखाई दिया। यानी लोन की तुलना में FD की ब्याज दरों में बदलाव काफी सीमित रहा।
रिपोर्ट के अनुसार, लोन की ब्याज दरें डिपॉजिट की तुलना में तेजी से कम होने के कारण बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर दबाव आया है। 2026 की पहली तिमाही में देश के चार बड़े निजी बैंकों में से तीन के NIM में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, मजबूत क्रेडिट ग्रोथ ने इस दबाव को कुछ हद तक संतुलित करने में मदद की।
Deutsche Bank के चीफ इकोनॉमिस्ट कौशिक दास का कहना है कि मौजूदा रेपो रेट अपने उस स्तर से करीब 100 बेसिस पॉइंट नीचे है, जिस पर उसे होना चाहिए। उनके मुताबिक, यदि महंगाई अपेक्षा से अधिक बढ़ती है तो अक्टूबर या दिसंबर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
Updated on:
05 Aug 2026 03:35 pm
Published on:
05 Aug 2026 03:35 pm
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