
FD को कई हिस्सों में बांटना ज्यादा फायदेमंद है। (PC: AI)
FD आज भी बहुत से लोगों का पसंदीदा निवेश विकल्प है। यदि आपके पास मोटा पैसा है और आप यह सोच रहे हैं कि इसे एक बड़ी एफडी में जमा किया जाए या इसे छोटी-छोटी रकम में बांटकर निवेश किया जाए, तो यह आर्टिकल आपके लिए है। आपको यह समझना जरूरी है कि अगर ब्याज दर और अवधि समान हो, तो चाहे 10 लाख रुपये एक FD में लगाएं या 10 अलग-अलग FD में 1-1 लाख रुपये, मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम लगभग बराबर ही रहती है। लेकिन फिर भी दोनों के अपने-अपने फायदे और नुकसान हैं। आइए जानते हैं किसके लिए कौनसा निवेश बेहतर है।
पूरी रकम एक ही FD में लगाना उन लोगों के लिए अच्छा है, जो ज्यादा कागजी कार्यवाही नहीं करना चाहते। इसमें फायदा यह होता है कि सिर्फ एक मैच्योरिटी तारीख याद रखनी होती है और कागजी काम भी कम करना पड़ता है। लेकिन इसमें सबसे बड़ा नुकसान तब होता है जब कभी मैच्योरिटी पूरी होने से पहले बीच में ही पैसों की जरुरत पड़ जाए और आपको एफडी तोड़नी पड़े। ऐसे में आपको पूरी रकम पर पेनल्टी देनी पड़ती है।
कई बार ऐसा होता है कि कोई बैंक RBI के नियमों की पालना नहीं करता और उसका लाइसेंस रद्द कर दिया जाता है या उसे दिवालिया घोषित कर दिया जाता है। ऐसे में आपकी जमा रकम पर खतरा आ सकता है। ऐसे में DICGC योजना के तहत हर बैंक में हर जमाकर्ता की जमा राशि सिर्फ 5 लाख रुपये तक ही बीमित होती है, जिसमें मूलधन और ब्याज दोनों शामिल हैं। यानी अगर पूरे 10 लाख रुपये एक ही बैंक में जमा किए, तो आधी रकम बीमा कवर से बाहर रह जाती है और आपका मूलधन भी खतरे में पड़ जाता है।
रकम को कई छोटी-छोटी FD में बांटकर निवेश करने से जरूरत पड़ने पर सिर्फ एक FD तोड़नी होती है, बाकी पर ब्याज मिलता रहता है। साथ ही अलग-अलग बैंकों में पैसा रखकर पूरे 10 लाख रुपये पर बीमा कवर का फायदा भी उठाया जा सकता है। इसके अलावा जब ब्याज दरें बढ़ रही हों, तो मैच्योर हुई छोटी FD को नई ऊंची दर पर दोबारा जमा किया जा सकता है। हालांकि, इसमें कई तारीखें और रिकॉर्ड याद रखने की मेहनत जरूर बढ़ जाती है।
Published on:
26 Jul 2026 10:00 am
