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Income Tax Return भरने से आज चूके तो लगेगी 5 हजार रुपये तक लेट फीस, जानिए क्या कहता है टैक्स कानून

ITR Date Extension: आयकर विभाग द्वारा ITR-1 और ITR-2 फॉर्म के लिए डेडलाइन को नहीं बढ़ाया गया है। ऐसे में समय पर आईटीआर नहीं भरने पर विभाग 5,000 रुपये तक की लेट फीस के साथ जमा किए जाने वाले टैक्स पर ब्याज भी लगा सकता है।
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ITR Filing Deadline

ITR भरने की लास्ट डेट आज है। (फोटो: AI)

Income Tax Return Due Date: ITR-1 और ITR-2 फॉर्म के जरिए अपना रिटर्न भरने वाले टैक्सपेयर्स के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने फिलहाल डेडलाइन को नहीं बढ़ाया है। ऐसे में उनके पास अभी भी कुछ घंटे बचे है। लेकिन यदि आप अभी भी डेट एक्सटेंड होने का इंतजार कर रहे है, तो यह आपको महंगा साबित हो सकता है। इनकम टैक्स नियमों के मुताबिक लेट ITR भरने पर 5,000 रुपये तक की लेट फीस के साथ अन्य चार्जेज भी चुकाने पड़ते हैं। इसके साथ ही विभाग टैक्सपेयर्स को यह छूट देता है कि जो लोग आज ITR फाइल कर देंगे, उन्हें उसी दिन ई-वेरिफिकेशन करना जरूरी नहीं है। वे अगले 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन कर सकते हैं और ऐसा करने पर उनकी फाइलिंग डेट 31 जुलाई ही मानी जाएगी।

समय पर ITR नहीं भरी तो क्या होगा?

31 जुलाई के बाद भी टैक्सपेयर्स के पास रिटर्न दाखिल करने का मौका रहेगा, लेकिन इसे विलंबित रिटर्न (बिलेटेड ITR) माना जाएगा। इसके साथ ही इनकम टैक्स एक्ट 2025 की धारा 428 के तहत लेट फीस ली जाएगी। अगर आपकी कुल इनकम 5 लाख रुपये तक है तो आपको 1 हजार रुपये और 5 लाख रुपये से अधिक आय होने पर 5,000 रुपये की लेट फीस लगेगी। यदि कोई टैक्स बकाया है तो उस पर ब्याज भी देना पड़ सकता है। असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए बिलेटेड रिटर्न 31 दिसंबर 2026 तक दाखिल किया जा सकता है।

एक्सपर्ट की सलाह

Tax2Win के CEO एवं सह-संस्थापक अभिषेक सोनी के अनुसार, लेट फीस ITR के प्रकार पर नहीं बल्कि कुल आय पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि देर से रिटर्न भरने पर रिफंड मिलने में देरी हो सकती है और कुछ तरह के नुकसान (Loss) पर कैरी फॉरवर्ड का लाभ भी नहीं मिलेगा। वहीं, Nangia & Co LLP की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर संजोली माहेश्वरी का कहना है कि समय पर ITR दाखिल करने से लेट फीस और ब्याज से जुड़ी परेशानियों से बचा जा सकता है।

ई-वेरिफिकेशन के बिना रिटर्न मान्य नहीं

सिर्फ ITR अपलोड कर देना पर्याप्त नहीं है। आयकर नियमों के अनुसार ई-वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद ही रिटर्न वैध माना जाता है। टैक्सपेयर्स आधार OTP, नेट बैंकिंग, इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड (EVC) या डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) का इस्तेमाल करके इलेक्ट्रॉनिक रूप से वेरिफिकेशन पूरा कर सकते हैं। यदि कोई टैक्सपेयर 31 जुलाई तक रिटर्न दाखिल कर देता है और 30 दिनों के भीतर उसका ई-वेरिफिकेशन कर देता है, तो रिटर्न की फाइलिंग डेट 31 जुलाई ही मानी जाएगी। लेकिन 30 दिन से अधिक देरी होने पर वेरिफिकेशन की तारीख ही फाइलिंग डेट मानी जा सकती है, जिससे रिटर्न बिलेटेड की कैटेगरी में आ जाता है।

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