
Rental Income Tax Rules: बहुत से मकान मालिकों को यह लगता है कि उनकी कमाई का जरिया सिर्फ किराया है, इसलिए उन्हें इनकम टैक्स रिटर्न भरने की जरूरत नहीं है। ऐसे में यह गलतफहमी आगे चलकर जुर्माने और टैक्स डिपार्टमेंट का नोटिस मिलने का कारण बन सकती है। असल में डिपार्टमेंट यह नहीं देखता कि आपकी कमाई कितने स्रोतों से आ रही है, बल्कि यह देखता है कि आपकी कुल आमदनी छूट की सीमा से ज्यादा है या नहीं। यदि आपकी एकमात्र आय किराये से है, तब भी आपको ITR फाइल करना होगा। यदि आपकी कुल आय (Gross Total Income) मूल छूट सीमा (Basic Exemption Limit) से अधिक है या आपने कुछ निर्धारित हाई वैल्यू के लेनदेन किए हैं, तो आपको ITR भरना होगा।
अगर आप सिर्फ किराए पर निर्भर हैं, तब भी नई टैक्स व्यवस्था में 3 लाख रुपए और पुरानी व्यवस्था में 2.5 लाख रुपए की सालाना लिमिट पार करने पर रिटर्न भरना अनिवार्य हो जाता है। हालांकि, टैक्स डिपार्टमेंट सीधे पूरे किराए पर टैक्स नहीं लगाता। पहले इसमें से नगर निगम को चुकाए गए टैक्स घटाए जाते हैं। इसके बाद जो रकम बचती है उस पर मरम्मत और रखरखाव के लिए 30 प्रतिशत की एकमुश्त छूट मिलती है। इसके साथ ही इनकम टैक्स के सेक्शन 24(b) के तहत अगर मकान होम लोन से खरीदा गया है तो उसके ब्याज पर भी छूट का क्लेम किया जा सकता है। इन सभी कटौतियों के बाद जो रकम बचती है, उसी पर टैक्स की देनदारी तय होती है।
BDO इंडिया में ग्लोबल मोबिलिटी सर्विसेज, टैक्स और रेगुलेटरी एडवाइजरी की पार्टनर दीपाश्री शेट्टी ने बताया कि दोनों टैक्स व्यवस्थाओं में सिर्फ रुपयों की लिमिट का ही अंतर नहीं है, बल्कि एक अंतर यह भी है यदि प्रॉपर्टी से कोई नुकसान होता है, तो वह दूसरी आमदनी से एडजेस्ट (Set Off) नहीं किया जा सकता, जबकि पुरानी व्यवस्था में यह सुविधा मिलती है। इसलिए सिर्फ छूट की सीमा देखकर नहीं, बल्कि अपनी पूरी आर्थिक स्थिति समझकर ही यह तय करना चाहिए कि कौन सी व्यवस्था फायदेमंद रहेगी।
फॉर्म चुनने में भी सावधानी जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति की आय केवल एक प्रॉपर्टी से है और इनकम 50 लाख से कम है, तो उसे ITR-1 फॉर्म भरना चाहिए। लेकिन यदि उसकी आय दो या अधिक प्रॉपर्टीज से है तो उसे ITR-2 फॉर्म भरना चाहिए। इसलिए यदि सिर्फ किराए से आमदनी हो रही है, तो भी ITR फाइल करना जरूरी है। इन दोनों ही फॉर्म की लास्ट डेट 31 जुलाई 2026 है।