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Israel Iran War: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहा तो भी भारत में नहीं आएगा तेल संकट, देश की रिफाइनरीज निकाल रहीं यह तोड़

Israel Iran War Impact on Crude Oil: भारत के तेल आयात का करीब 50 फीसदी होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर ही गुजरता है। ईरान या खाड़ी क्षेत्र की अन्य तेल सुविधाओं पर हमला होता है, तो क्रूड ऑयल की सप्लाई पर असर पड़ेगा।

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Mar 01, 2026
कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा हुआ है। (PC: AI)

Israel Iran War: अमेरिका-इजराइल द्वारा ईरान पर हमले के बाद भारतीय रिफाइनरियां कच्चे तेल की कीमतों में संभावित नई तेजी के लिए तैयारियां कर रही हैं। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद होता है या इस क्षेत्र की एनर्जी फैसिलिटीज पर हमले होते हैं, तो वे वैकल्पिक आपूर्ति विकल्पों की समीक्षा कर रही हैं।

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बढ़ गए कच्चे तेल के भाव

तेल बाजार पहले ही कुछ भू-राजनीतिक जोखिमों को कीमतों में शामिल कर चुके हैं। हमले की आशंकाओं के बीच बेंचमार्क ब्रेंट फ्यूचर्स शुक्रवार को करीब 73 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो फरवरी की शुरुआत की तुलना में लगभग 6 डॉलर अधिक है।

क्रूड ऑयल की कीमतों में हो सकता है बड़ा इजाफा

इजराइल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई है। उधर ईरान भी लगातार खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहा है। ईरान ने केमिकल युद्ध की भी धमकी दी है। उद्योग जगत के अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय तक संघर्ष की आशंका बढ़ गई है। एक अधिकारी ने कहा, “इस बार इसके परिणाम कहीं अधिक गंभीर हो सकते हैं।” एक्सपर्ट्स का मानना है कि तनाव लंबे समय तक बना रहा, तो तेल की कीमतों में बड़ा इजाफा हो सकता है।

भारतीय उपभोक्ताओं को नहीं होगी ज्यादा परेशानी

हालांकि, शॉर्ट टर्म में भारतीय उपभोक्ताओं के लिए बड़ी परेशानी की बात नहीं है। खुदरा ईंधन कीमतें तीन वर्षों से लगभग स्थिर हैं और रिफाइनरियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव को नियमित रूप से उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा रही हैं। इससे जल्द पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की उम्मीद नहीं है। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें रिफाइनिंग मार्जिन को कम करेंगी और भारत का आयात बिल बढ़ाएंगी, जिससे चालू खाते के घाटे और रुपये पर दबाव पड़ सकता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है बेहद खास?

भारत फिलहाल ईरान से तेल आयात नहीं करता, क्योंकि ईरान अपना अधिकांश कच्चा तेल चीन को भेजता है। लेकिन यदि ईरान या खाड़ी क्षेत्र की अन्य तेल सुविधाओं पर हमला होता है, तो आपूर्ति सख्त हो सकती है और कीमतें बढ़ सकती हैं, भले ही होर्मुज जलडमरूमध्य खुला रहे। होर्मुज जलडमरूमध्य भारत की एनर्जी सेफ्टी के लिए बेहद अहम है। देश के लगभग 40% कच्चे तेल और 55% एलएनजी आयात इसी मार्ग से गुजरते हैं।

क्या है वैकल्पिक प्लान?

अधिकारियों के अनुसार, रिफाइनरियां वैकल्पिक योजनाओं पर विचार कर रही हैं। इनमें सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के ऐसे बंदरगाहों से तेल लोड करना शामिल है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य को बायपास करते हैं। इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र के बाहर के उत्पादकों से अतिरिक्त ऑर्डर देना भी रिफाइनरीज की रणनीति में शामिल हैं।

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Published on:
01 Mar 2026 04:23 pm
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