
Home Loan Tips: जॉइंट होम लोन लेने से बड़ी रकम का लोन मिल सकता है और ईएमआई का बोझ भी दो लोगों में बंट जाता है। लेकिन क्या सिर्फ इन फायदों के लिए जॉइंट होम लोन लेना सही फैसला है। जॉइंट होम लोन का फैसला लेने से पहले तय करें कि घर का मालिक कौन होगा, डाउन पेमेंट कौन करेगा और ईएमआई कौन और कितनी भरेगा। क्योंकि अगर एक को-एप्लिकेंट बीच में ईएमआई देना बंद कर देता है, तो बैंक दूसरे व्यक्ति से पूरी ईएमआई और पूरे बकाया लोन की वसूली कर सकता है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, सबसे अच्छा होम लोन हमेशा सबसे कम ब्याज वाला नहीं होता, बल्कि वह होता है जिसका पूरा स्ट्रक्टर सही तरीके से तय किया गया हो। इसलिए पति-पत्नी या को-एप्लिकेंट को लोन लेने से पहले यह स्पष्ट कर लेना चाहिए कि संपत्ति में किसका कितना हिस्सा होगा, ईएमआई कौन भरेगा और भविष्य में ईएमआई कैसे चुकाई जाएगी।
बगाड़िया का कहना है कि हर मामले में 50-50 हिस्सेदारी सबसे अच्छा विकल्प नहीं होती। सही हिस्सा इस बात पर निर्भर करता है कि डाउन पेमेंट किसने किया है, संपत्ति का मालिक कौन है और वास्तव में ईएमआई कौन चुका रहा है। इसलिए हर परिवार को अपनी आर्थिक स्थिति के हिसाब से फैसला लेना चाहिए।
जॉइंट होम लोन में सबसे बड़ा जोखिम तब सामने आता है, जब किसी एक व्यक्ति की नौकरी चली जाए, कारोबार शुरू कर दे या ईएमआई देना बंद कर दे। ऐसे में बैंक के लिए दोनों बराबर जिम्मेदार रहते हैं। बैंक सिर्फ एक को-एप्लीकेंट से लोन की पूरी बकाया राशि वसूल सकता है। इसलिए लंबे समय के लिए होम लोन लेने से पहले इस बात का ध्यान रखना जरूरी है।
जॉइंट होम लोन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यदि आपकी सैलरी कम है, तो बैंक दो लोगों की इनकम को मिलाकर रिपेमेंट कैपेसिटी तय करता है। इसके साथ कई बैंक महिलाओं को ब्याज दर पर छूट देते हैं, जिससे लॉन्ग टर्म के लोन में बचत बढ़ जाती है। ईएमआई समय पर चुकाई जाए तो जॉइंट होम लोन से जुड़े हर को-एप्लिकेंट का क्रेडिट स्कोर बेहतर होता है। इससे भविष्य के लोन लेने का मजबूत आधार बनता है।