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अब Credit Score नहीं, AI पास करेगा लोन, RBI ने FREE-AI रिपोर्ट में बताया कैसे होगा यह काम

RBI guidelines: AI अब बैंकों को क्रेडिट स्कोर की बजाय कैश फ्लो, खर्च की आदतें और अल्टरनेटिव डेटा से लोन देने का फैसला करने में मदद कर रहा है। RBI की FREE-AI रिपोर्ट 2025 ने इस बदलाव को दिशा दी है और इनफॉर्मल सेक्टर के लोगों के लिए नए दरवाजे खोले हैं।

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Apr 24, 2026
भारतीय रिजर्व बैंक (Photo-ANI)

अभी तक बैंक लोन देने से पहले आपके क्रेडिट स्कोर को देखते हैं। इसके साथ ही आपके रिपेमेंट रिकॉर्ड और इनकम का भी अहम रोल होता है। लेकिन आने वाले समय में यह तस्वीर बदल जाएगी। क्योंकि AI इन सीमित मानकों से आगे बढ़कर real-time financial behaviour को समझ रहा है, जिससे ज्यादा सटीक फैसले लिए जा सकते हैं। आपके बैंक अकाउंट में पैसे कैसे आते-जाते हैं, आप खर्च कैसे करते हैं, आपकी डिजिटल ट्रांजेक्शन की हिस्ट्री क्या है-यही सब अब लोन मिलने की असली कसौटी बनती जा रही है।

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पुराने सिस्टम की क्या कमियां है?

शुरुआत से बैंकों का सिस्टम यही रहा है कि आय देखो, क्रेडिट स्कोर देखो, पुराने लोन की रिपेमेंट हिस्ट्री देखो और फिर अप्रूव या रिजेक्ट कर दो। यह तरीका भले ही व्यवस्थित लगता हो, लेकिन बहुत से ऐसे लोग है जिनको इस सिस्टम से लोन लेने में बहुत कठिनाई आती हो। जैसे कि कोई व्यक्ति जिसने कभी लोन लिया ही नहीं या उसका क्रेडिट स्कोर बना ही नहीं। इसके अलावा जो सेल्फ एम्लॉय है और उनकी सैलरी स्लिप नहीं है। ऐसे लोगों के लिए पुराने सिस्टम से लोन लेना बहुत कठिन होता था।

AI कैसे बदल रहा है यह पूरी तस्वीर

AI आधारित अंडरराइटिंग में लेंडर्स अब तय नियमों की जगह एक पैटर्न को फोलो करते है। मान लीजिए कोई व्यक्ति है जिसकी कोई क्रेडिट हिस्ट्री नहीं है, लेकिन उसके बैंक अकाउंट में हर महीने नियमित रकम आती है, खर्च नियंत्रित हैं और बचत भी हो रही है। पुराने मॉडल में यह व्यक्ति शायद रिजेक्ट हो जाता, लेकिन AI इसे एक स्थिर और भरोसेमंद उधारकर्ता के रूप में पहचान सकता है।

कैश फ्लो यानी खाते में पैसों की आवाजाही अब सबसे अहम पैमाना बन रही है। रेगुलर इनकम, संतुलित खर्च और नियंत्रित देनदारियां, यह तीनों मिलकर एक मजबूत उधारकर्ता प्रोफाइल बनाते हैं। इसके अलावा AI अलग-अलग ग्राहकों की प्रोफाइल के आधार पर अलग-अलग ब्याज दर यानी डिफरेंशियल ROI ऑफर करने में भी लेंडर्स की मदद करता है।

Reserve Bank of India का क्या कहना है?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 13 अगस्त 2025 को "फ्रेमवर्क फॉर रिस्पॉन्सिबल एंड एथिकल इनेबलमेंट ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस" यानी FREE-AI रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में RBI ने माना कि AI क्रेडिट अंडरराइटिंग को बेहतर बना सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक सर्वे में शामिल संस्थाओं में से करीब 20.8 फीसदी बड़े बैंक और NBFC पहले से AI सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं या उसे विकसित कर रहे हैं। इनमें से 13.7 फीसदी एप्लीकेशन सीधे क्रेडिट अंडरराइटिंग पर केंद्रित हैं। ये संस्थाएं मुख्य रूप से डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, क्रेडिट रिस्क असेसमेंट और ऑटोमेटेड डिसीजन मेकिंग में AI का उपयोग कर रही हैं।

भविष्य कैसा होगा?

आने वाले समय में loan approval एक बार का process नहीं रहेगा, बल्कि लगातार update होता रहेगा। इसका मतलब है कि आपका व्यवहार बेहतर हुआ तो आपकी क्रेडिट लिमिट बढ़ सकती है, ब्याज दर घट सकती है और जरूरत पड़ने पर लेंडर आपको पहले से सपोर्ट भी दे सकता है।

चुनौतियां भी कम नहीं

यह बदलाव जितना उम्मीद जगाने वाला है, उतनी ही सावधानी भी जरूरी है। RBI की रिपोर्ट में यह भी माना गया है कि AI को अपनाने में कई बाधाएं हैं। इनमें ज्यादा लागत, टेक्निकल टैलेंट की कमी प्रमुख हैं। यह दिक्कतें खासतौर पर छोटे लेंडिंग संस्थानों के लिए ज्यादा बड़ी हैं। साथ ही यदि AI को ट्रेंड करने के लिए जो डेटा इस्तेमाल होगा वह यदि गलत हुआ तो नतीजे भी गलत हो सकते हैं।

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Published on:
24 Apr 2026 03:35 pm
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