
IPO Market News: भारतीय शेयर बाजार में जल्द एक ऐसा आईपीओ आने वाला है जो अब तक के सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर सकता है। देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज आखिरकार शेयर बाजार में कदम रखने की तैयारी में है। कंपनी ने बुधवार रात भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर दिया है। यानी कंपनी ने आईपीओ के लिए सेबी को आवेदन सौंप दिया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, एनएसई का आईपीओ करीब 30,000 करोड़ रुपये का हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ बन जाएगा। फिलहाल यह रिकॉर्ड हुंडई मोटर इंडिया के नाम है, जिसने साल 2024 में आईपीओ के जरिए 27,870 करोड़ रुपये जुटाए थे। इससे पहले एलआईसी का 21,000 करोड़ रुपये का आईपीओ काफी चर्चा में रहा था। पेटीएम, टाटा कैपिटल और कोल इंडिया ने भी आईपीओ से बड़ी रकम जुटाई थी। लेकिन एनएसई का प्रस्तावित इश्यू इन सभी को पीछे छोड़ सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि एनएसई ऐसे समय बाजार में उतर रहा है, जब आईपीओ मार्केट की रफ्तार कुछ धीमी हुई है। 2026 में अब तक 23 कंपनियों ने करीब 27,000 करोड़ रुपये जुटाए हैं, जबकि पिछले दो साल आईपीओ बाजार के लिए रिकॉर्डतोड़ रहे थे।
मास्टरट्रस्ट के चीफ रिसर्च ऑफिसर डॉ रवि सिंह ने पत्रिका डॉट कॉम को बताया कि इस आईपीओ के जरिए कई प्रमुख वित्तीय संस्थान अपनी हिस्सेदारी घटाएंगे। इनमें एसबीआई, बैक ऑफ बड़ौदा, कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड, जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन और कई सरकारी बीमा कंपनियां शामिल हैं। हालांकि, एलआईसी इस शेयर बिक्री में हिस्सा नहीं ले रही है।
यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) आधारित आईपीओ होगा। इसमें लगभग 14.89 करोड़ शेयर बेचे जाएंगे, जो कंपनी की कुल चुकता पूंजी का करीब 6 फीसदी है। चूंकि नए शेयर जारी नहीं किए जा रहे हैं, इसलिए आईपीओ से जुटाई गई रकम एनएसई को नहीं मिलेगी। पैसा सीधे शेयर बेचने वाले निवेशकों के पास जाएगा।
डॉ रवि ने कहा कि कैश इक्विटी, इक्विटी डेरिवेटिव और करेंसी डेरिवेटिव जैसे लगभग सभी बड़े सेगमेंट में NSE की मजबूत पकड़ है। पिछले दो दशकों से यह भारतीय शेयर बाजार का सबसे बड़ा एक्सचेंज बना हुआ है। डेरिवेटिव ट्रेडिंग के मामले में इसका नाम दुनिया के सबसे बड़े एक्सचेंजों में गिना जाता है।
मार्च 2020 में एनएसई प्लेटफॉर्म पर करीब 3.1 करोड़ यूनिक निवेशक थे। मार्च 2026 तक यह संख्या बढ़कर 12.9 करोड़ से अधिक हो गई। आज NSE देश के 99 फीसदी से ज्यादा पिनकोड क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। यह बताता है कि छोटे शहरों और कस्बों में भी शेयर बाजार की पकड़ मजबूत हो रही है।
वित्त वर्ष 2025-26 में NSE की परिचालन आय 16,601 करोड़ रुपये रही। वहीं शुद्ध लाभ 10,302 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। हालांकि, डेरिवेटिव बाजार में अत्यधिक सट्टेबाजी रोकने के लिए सेबी के कुछ कदमों का असर कंपनी की कमाई पर पड़ा है।
एनएसई लगातार अच्छा डिविडेंड देने वाली कंपनियों में शामिल रही है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2024-25 और 2025-26 दोनों में प्रति शेयर 35 रुपये का डिविडेंड दिया। इससे साफ है कि कंपनी के पास मजबूत नकदी प्रवाह मौजूद है।
भारत की अधिकांश लिस्टेड कंपनियों के विपरीत एनएसई का कोई एक प्रमोटर नहीं है। इसकी हिस्सेदारी कई संस्थानों और निवेशकों के बीच बंटी हुई है। किसी एक निवेशक का कंपनी पर नियंत्रण नहीं है।
NSE की असली ताकत उसकी तकनीक है। एक्सचेंज हर दिन 12 से 14 अरब तक इलेक्ट्रॉनिक संदेशों को प्रोसेस करता है। कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल मार्केट निगरानी, अनुपालन जांच और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में बढ़ा रही है।
एनएसई का कारोबार केवल शेयर खरीदने-बेचने तक सीमित नहीं है। कंपनी क्लियरिंग और सेटलमेंट, इंडेक्स सेवाएं, मार्केट डेटा, एनालिटिक्स और GIFT City के जरिए अंतरराष्ट्रीय कारोबार से भी कमाई करती है। हाल ही में उसे राष्ट्रीय कोयला ट्रेडिंग एक्सचेंज स्थापित करने की मंजूरी भी मिली है।
नियामकीय नियमों के चलते NSE अपने ही प्लेटफॉर्म पर लिस्ट नहीं हो सकता। इसलिए इसके शेयरों की लिस्टिंग BSE पर होगी। इस मेगा आईपीओ को संभालने के लिए देश और दुनिया के कई बड़े निवेश बैंक नियुक्त किए गए हैं, जिनमें कोटक महिंद्रा कैपिटल, मॉर्गन स्टेनली, एचएसबीसी, एसबीआई कैपिटल मार्केटक्स, जेपी मॉर्गन, सिटी, आईसीआईसीआई सिक्युरिटीज और एचडीएफसी बैंक शामिल हैं।
डॉ रवि सिंह ने बताया कि एनएसई का आईपीओ सिर्फ एक और आईपीओ नहीं है, बल्कि भारतीय शेयर बाजार के लिए एक ऐतिहासिक इवेंट माना जा सकता है। एनएसई देश का सबसे बड़ा एक्सचेंज है और डेरिवेटिव्स सेगमेंट में इसकी मजबूत पकड़ है। ऐसे में निवेशकों के बीच इस आईपीओ को लेकर काफी उत्साह देखने को मिल सकता है।
डॉ सिंह ने कहा, 'अगर आईपीओ उचित वैल्यूएशन पर आता है, तो लिस्टिंग गेन के अवसर भी बन सकते हैं। वहीं, लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए भी यह एक दिलचस्प विकल्प हो सकता है, क्योंकि भारत में निवेशकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिसका फायदा एक्सचेंज बिजनेस को मिलता है।
हालांकि, निवेशकों को यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि लिस्टिंग के बाद शेयर लगातार ऊपर ही जाएगा। अक्सर बड़े और चर्चित आईपीओ में शुरुआती उत्साह के बाद कुछ मुनाफावसूली देखने को मिलती है, जिससे शेयर में अस्थायी गिरावट भी आ सकती है। इसलिए केवल शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग के उद्देश्य से निवेश करने के बजाय, इसे लॉन्ग टर्म नजरिए से देखना ज्यादा बेहतर रणनीति हो सकती है।'