कारोबार

Gold Refining से जुड़ी कंपनी Rajesh Exports पर 15.15 लाख करोड़ के रेवेन्यू हेरफेर का आरोप, लोअर सर्किट में शेयर

Rajesh Exports Share Price: SEBI ने राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके प्रमोटर राजेश मेहता पर बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरिम आदेश जारी किया है। आदेश के बाद कंपनी के शेयर पर लोअर सर्किट लग गया है।

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Jun 04, 2026
Rajesh Exports Share
Rajesh Exports के शेयर में लोअर सर्किट लगा है। (PC: AI)

Rajesh Exports Share: गोल्ड और ज्वैलरी सेक्टर से जुड़ी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स की बैलेंस शीट में बड़ी गड़बड़ी का आरोप लगा है। इससे कंपनी के शेयर में आज गुरुवार को शुरुआती कारोबार में ही 5 फीसदी का लोअर सर्किट लग गया। बाजार नियामक SEBI ने कंपनी और उसके प्रमोटर राजेश मेहता के खिलाफ एक अंतरिम आदेश जारी किया है। इस आदेश में कंपनी पर बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी और रेवेन्यू को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

कंपनी का शेयर क्यों गिरा?

कंपनी का शेयर आज लोअर सर्किट लगने से गिरकर 104.65 रुपये पर आ गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि फोरेंसिक ऑडिट में पाया गया कि कंपनी के करीब 99 फीसदी तक रेवेन्यू में हेरफेर हो सकती है। SEBI ने कहा कि वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच कंपनी ने लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये के रेवेन्यू को गलत तरीके से दिखाया। यह राशि कंपनी द्वारा बताए गए कुल समेकित रेवेन्यू का करीब 99.8 फीसदी हिस्सा है। इस खबर के चलते शेयर में घबराहट के कारण बिकवाली शुरू हो गई, जिससे शेयर लुढ़ककर सीधे लोअर सर्किट में चला गया।

1 शेयरधारक की शिकायत पर हुई जांच

SEBI द्वारा यह जांच साल 2024 में एक शेयरधारक की शिकायत के बाद शुरू हुई थी। इस शिकायत में कंपनी की बैलेंस शीट पर बकाया ट्रेड रिसीवेबल्स यानी की ग्राहकों से मिलने वाली बकाया रकम पर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद फोरेंसिक ऑडिटर BDO इंडिया सर्विसेज को अप्रैल 2020 से मार्च 2024 की अवधि की जांच सौंपी गई थी। SEBI के मुताबिक मूल अकाउंटिंग रिकॉर्ड तक पहुंच न होने के कारण फोरेंसिक जांच सीमित रह गई। इसके बाद SEBI ने वित्तीय आंकड़ों में हेराफेरी, जांचकर्ताओं के साथ असहयोग और जरूरी दस्तावेज छुपाने के आरोप लगाए।

विदेशी लेनदेन में भी हेराफेरी

SEBI ने यह भी कहा कि सिंगापुर और स्विट्जरलैंड में मौजूद कंपनी की विदेशी सहायक इकाइयों, जिनमें आरईएल सिंगापुर, ग्लोबल गोल्ड रिफाइनरीज एजी और स्विस रिफाइनर वैलकैम्बी शामिल हैं, से जुड़े लेनदेन भी संदिग्ध हैं। अब SEBI ने प्रमोटर राजेश मेहता को कंपनी के शेयरों की खरीद-बिक्री से फिलहाल रोक दिया है। कंपनी को 30 दिनों के भीतर सभी लंबित दस्तावेज जमा करने का आदेश दिया गया है। साथ ही एक नया फोरेंसिक ऑडिटर नियुक्त करने का आदेश भी दिया गया है।

लोअर सर्किट का मतलब क्या होता है?

शेयर बाजार में लोअर सर्किट वह सीमा होती है जहां किसी शेयर की कीमत एक ही दिन में तय सीमा से ज्यादा नहीं गिर सकती। कोई भी शेयर लोअर सर्किट में तब जाता है, जब उस शेयर में खरीदार नहीं मिलते और बेचने वाले काफी अधिक संख्या में हो जाते हैं।

Updated on:
04 Jun 2026 01:05 pm
Published on:
04 Jun 2026 01:03 pm