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Stock Market Outlook: क्या टिकी रहेगी बाजार में बीते हफ्ते आई तेजी? US Fed से लेकर खाड़ी युद्ध तक ये 5 फैक्टर तय करेंगे मार्केट की दिशा

Stock Market Next Week: शेयर बाजार के निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक, अमेरिका-ईरान समझौते, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और रुपये की चाल पर रहेगी। ये फैक्टर बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।

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Jun 14, 2026
Stock Market Outlook
इस हफ्ते यूएस फेड की बैठक होने वाली है। (PC: AI)

Share Market News: दो हफ्तों तक लगातार दबाव झेलने के बाद भारतीय शेयर बाजार ने बीते हफ्ते आखिरकार राहत की सांस ली है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने मजबूत वापसी की और निवेशकों का भरोसा भी कुछ हद तक लौटा है। लेकिन बाजार की असली परीक्षा अब आने वाले सप्ताह में होने वाली है, क्योंकि कई ऐसे बड़े इवेंट सामने हैं जो बाजार पर काफी असर डाल सकते हैं। बीते हफ्ते निफ्टी-50 करीब 1.1 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,622.90 पर बंद हुआ। जबकि सेंसेक्स लगभग 1.7 प्रतिशत चढ़कर 75,527.95 के स्तर पर बंद हुआ। शेयर बाजार को सहारा देने में वैश्विक संकेतों के साथ-साथ भारतीय रिजर्व बैंक के कुछ अहम कदमों की भी बड़ी भूमिका रही।

निवेशकों का सेंटीमेंट इसलिए पॉजिटिव हुआ, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर सकारात्मक खबरें सामने आई हैं। अगर यह समझौता होता है, तो मिडिल ईस्ट में तनाव कम हो सकता है और ऑयल मार्केट में भी स्थिरता लौट सकती है। यही उम्मीद फिलहाल दुनियाभर के शेयर बाजारों को सहारा दे रही है। इसके अलावा आरबीआई ने विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के उद्देश्य से कुछ नए कदम उठाए हैं। विदेशी मुद्रा जमा और बाहरी वाणिज्यिक उधारी से जुड़े प्रावधानों में राहत देकर केंद्रीय बैंक ने बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाने की कोशिश की है। इसका असर निवेशकों के भरोसे पर भी दिखाई दिया।

इस हफ्ते ये फैक्टर्स तय करेंगे बाजार की दिशा

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक

अगले सप्ताह सबसे बड़ा फोकस अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर रहेगा। 16 और 17 जून को होने वाली इस बैठक में ब्याज दरों में बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है, लेकिन निवेशकों की दिलचस्पी फेड के बयान में होगी। बाजार यह समझने की कोशिश करेगा कि अमेरिका में महंगाई, आर्थिक विकास और आने वाले महीनों में ब्याज दरों को लेकर फेड का रुख क्या रहने वाला है। अगर फेड का बयान सख्त रहा, तो वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है, जिसका असर भारत में भी दिखेगा।

अमेरिका-ईरान समझौते पर नजर

पूरी दुनिया की निगाहें अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत पर टिकी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच जल्द पीस डील हो सकती है। हालांकि, ईरान की ओर से अभी अंतिम तारीख तय नहीं होने की बात कही गई है। यानी तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है। अगर समझौते पर मुहर लगती है तो वैश्विक बाजारों को राहत मिल सकती है। वहीं, किसी तरह की अड़चन बाजार की बेचैनी फिर बढ़ा सकती है।

क्रूड ऑयल की कीमतें

ऑयल मार्केट फिलहाल शेयर बाजार के लिए सबसे संवेदनशील संकेतकों में शामिल है। हाल के दिनों में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में अच्छी गिरावट देखने को मिली है, जिससे भारत जैसे आयातक देशों को राहत मिली है। कम तेल कीमतों का मतलब है कि महंगाई पर दबाव घट सकता है, आयात बिल कम हो सकता है और अर्थव्यवस्था को फायदा मिल सकता है। लेकिन अगर मिडिल ईस्ट में हालात बिगड़ते हैं, तो तेल फिर से महंगा हो सकता है, जिसका असर सीधे बाजार पर पड़ेगा।

विदेशी निवेश

विदेशी संस्थागत निवेशक यानी FPI अभी भी भारतीय बाजार में लगातार बिकवाली कर रहे हैं। शुक्रवार को भी उन्होंने 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की शुद्ध बिकवाली की है। हालांकि, अच्छी बात यह है कि घरेलू संस्थागत निवेशक मजबूती से खरीदारी कर रहे हैं और बाजार को सपोर्ट दे रहे हैं। यही वजह है कि विदेशी बिकवाली के बावजूद मार्केट में बड़ी गिरावट नहीं आई। आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों का रुख बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

रुपये की मजबूती

बीते सप्ताह रुपये ने भी शानदार वापसी की। डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा में 67 पैसे की मजबूती दर्ज की गई। तेल कीमतों में गिरावट, घरेलू शेयर बाजार की मजबूती और डॉलर इंडेक्स में कमजोरी ने रुपये को सहारा दिया। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि भू-राजनीतिक मोर्चे पर कोई निगेटिव खबर नहीं आती है, तो रुपया और मजबूत हो सकता है। मजबूत रुपया विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में भी मदद करता है।

Published on:
14 Jun 2026 10:30 am