
Stock Market Tips: तेल की कीमतों में नरमी और मिडिल ईस्ट से आई राहत की खबर ने भारतीय शेयर बाजार में नई ऊर्जा भर दी है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर बनी सहमति के बाद निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। यही वजह है कि भारतीय शेयर बाजार में लगातार पांचवें दिन तेजी देखी जा रही है। पिछले चार ट्रेडिंग सेशन में सेंसेक्स 3,200 अंकों से ज्यादा चढ़ चुका है, जबकि निफ्टी में करीब 4 फीसदी की तेजी देखने को मिली है। बाजार की इस रफ्तार के पीछे सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट को माना जा रहा है। बुधवार को भी सेंसेक्स करीब 200 अंक की बढ़त के साथ 76,990 पर ट्रेड करता दिखाई दिया।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है। ऐसे में जब तेल सस्ता होता है, तो इसका फायदा सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहता। इससे देश का आयात बिल कम होता है, महंगाई पर दबाव घटता है और सरकार से लेकर कंपनियों तक की लागत कम होती है। अमेरिका और ईरान के बीच प्रारंभिक शांति समझौते से मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने और होर्मुज स्ट्रेट दोबारा खुलने की उम्मीद बढ़ी है। अंतिम समझौते पर शुक्रवार को आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर होने की संभावना जताई जा रही है। अगर ऐसा होता है तो ईरानी तेल फिर से वैश्विक बाजार में बड़ी मात्रा में पहुंच सकता है। युद्ध के दौरान जहां ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था, वहीं अब इसकी कीमत 75 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गई है। यही बदलाव बाजार को राहत दे रहा है।
ब्रोकरेज फर्म Emkay Global का मानना है कि यदि ब्रेंट क्रूड 75 से 80 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में बना रहता है, तो भारत के चालू खाते के घाटे यानी करंट अकाउंट डेफिसिट में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है। कम तेल कीमतों का मतलब यह भी है कि कंपनियों को कच्चा माल महंगा नहीं खरीदना पड़ेगा। सप्लाई चेन पर दबाव घटेगा और महंगाई का जोखिम भी कम होगा। इससे रिजर्व बैंक के लिए भी नीतिगत फैसले लेना आसान हो सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि भू-राजनीतिक तनाव और महंगे तेल के बावजूद भारतीय कंपनियों ने अच्छा परफॉर्म किया है। वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में निफ्टी-50 कंपनियों का मुनाफा सालाना आधार पर करीब 4 फीसदी बढ़ा है। अब जब तेल की कीमतों में नरमी आ रही है तो एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि कंपनियों की कमाई और बेहतर हो सकती है। एमके ग्लोबल का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में निफ्टी कंपनियों की प्रति शेयर आय (EPS) में करीब 16 फीसदी की वृद्धि हो सकती है। ऐसा हुआ तो यह पिछले तीन वर्षों का सबसे मजबूत कमाई वाला साल साबित हो सकता है।
ब्रोकरेज हाउस ने मार्च 2027 तक निफ्टी के लिए 29,000 का लक्ष्य बरकरार रखा है। उसके अनुसार हालिया गिरावट के बाद बाजार का वैल्यूएशन पहले की तुलना में ज्यादा संतुलित नजर आ रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार में अभी भी कई शेयर अपने लंबे समय के औसत वैल्यूएशन से नीचे ट्रेड कर रहे हैं। ऐसे में आर्थिक माहौल बेहतर रहने पर निवेशकों को अच्छे अवसर मिल सकते हैं।
तेल की कीमतों में गिरावट का सबसे बड़ा लाभ ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, ट्रांसपोर्ट सेक्टर, सीमेंट कंपनियों, चुनिंदा बैंकों और एनबीएफसी को मिल सकता है। मिडिल ईस्ट में इंफ्रास्ट्रक्चर एक्टिविटीज बढ़ने की स्थिति में लार्सन एंड टुब्रो (L&T) जैसी कंपनियों के लिए भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं। वहीं एयरलाइन और ऑटो कंपनियों को भी फ्यूल लागत कम होने का फायदा मिलेगा।
इसके विपरीत, तेल उत्पादन से जुड़ी कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि उनकी कमाई सीधे तेल की कीमतों से जुड़ी होती है। FMCG, आईटी और फार्मा जैसे सेक्टर्स में भी निवेशकों की दिलचस्पी कुछ समय के लिए कम हो सकती है।
एमके ग्लोबल ने बाजार में संभावित तेजी का फायदा उठाने के लिए ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, लार्सन एंड टुब्रो, श्रीराम फाइनेंस, इंटरग्लोब एविएशन और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स को पसंदीदा विकल्प बताया है। ब्रोकरेज का मानना है कि कम ऊर्जा लागत, आर्थिक गतिविधियों में सुधार और निवेशकों की बढ़ती जोखिम लेने की क्षमता इन कंपनियों की परफॉर्मेंस को आने वाले समय में मजबूती दे सकती है। हालांकि, एक्सपर्ट यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि तेल की कीमतों में फिर से उछाल या मिडिल ईस्ट में किसी नए तनाव की स्थिति स्टॉक मार्केट की चाल बदल सकती है।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमभरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें)