चित्तौड़गढ़

Chittorgarh: बड़ी सादड़ी-नीमच रेलवे ट्रैक पर स्पीड ट्रायल में दौड़ा इंजन, 15 किमी ट्रैक का 11 जून को होगा CRS निरीक्षण

Railway Line Project: चित्तौड़गढ़ में बड़ी सादड़ी से नीमच तक बिछाई जा रही नई रेलवे लाइन परियोजना के तहत 15 किमी लंबे ट्रैक का कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) निरीक्षण 11 जून को होगा। इसके लिए रेलवे के इंजीनियर्स ने तैयारियां पूरी कर ली हैं।
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Updated: 8 Jun 2026, 9:39 AM IST
Badi Sadri Neemuch Rail Line Speed Trial
Photo: patrika

Railway Line Project: चित्तौड़गढ़ में बड़ी सादड़ी से नीमच तक बिछाई जा रही नई रेलवे लाइन परियोजना के तहत 15 किमी लंबे ट्रैक का कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) निरीक्षण 11 जून को होगा। इसके लिए रेलवे के इंजीनियर्स ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। सीआरएस बड़ी सादड़ी से जलोदा जागीर स्टेशन तक ट्रैक का निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण सफल होने के बाद इस रेलखंड पर यात्री ट्रेनों के संचालन की अनुमति मिल सकेगी।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार सीआरएस निरीक्षण से पहले शनिवार को ट्रैक पर स्पीड ट्रायल किया गया। ट्रायल के दौरान सामने आईं कमियों को दूर करने के साथ ही अन्य तकनीकी खामियों को भी ठीक किया जा रहा है, ताकि निरीक्षण के दौरान किसी प्रकार की परेशानी नहीं आए।

70 प्रतिशत पूरा हुआ परियोजना का कार्य

बड़ी सादड़ी चित्तौड़गढ़ से नीमच तक करीब 49 किमी लंबी रेल लाइन का कार्य जनवरी 2024 में शुरू हुआ था। करीब 495 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना का लगभग 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। परियोजना के तहत एक बड़ा रोड ओवर ब्रिज (आरओबी), 11 बड़े पुल और 78 छोटे पुलों का निर्माण किया जा रहा है।

मध्य प्रदेश से रेल संपर्क होगा मजबूत

बड़ी सादड़ी से नीमच के बीच रेल लाइन शुरू होने से राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच व्यापार एवं यातायात को नई गति मिलेगी। इससे उदयपुर और नीमच के बीच यात्रा दूरी भी कम हो जाएगी। नई रेल लाइन शुरू होने के बाद ट्रेनों का संचालन मावली जंक्शन के रास्ते किया जाएगा, जिससे दोनों शहरों के बीच आवाजाही अधिक आसान होगी। वर्तमान में मध्य प्रदेश के लिए ट्रेनों का संचालन चित्तौड़गढ़ मार्ग से किया जाता है।

सीआरएस निरीक्षण क्यों है जरूरी

किसी भी नवनिर्मित रेलवे ट्रैक पर रेल संचालन से पूर्व कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) निरीक्षण करना अनिवार्य होता है। सीआरएस से हरी झंडी मिलने के बाद ही रेल संचालन को अनुमति दी जाती है। कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी स्वंय रेलवे ट्रैक का अवलोकन करते हैं और विभिन्न तकनीकी बिंदूओं के सघन निरीक्षण के बाद ही ट्रैक को रेल संचालन के लिए फिट मानने पर ही रेल संचालन की स्वीकृति जारी होती है। ट्रैक पर रेल इंजन को तय स्पीड में दौड़ाकर ट्रैक की क्षमता और तकनीक का परीक्षण मौके पर किया जाता है। वहीं पैसेंजर ट्रेन से पूर्व नए ट्रैक पर पहले मालगाड़ी दौड़ाकर ट्रैक की फिटनेस की जांच की जाती है।

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8 Jun 2026, 9:39 AM IST
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