
राजस्थान के चूरू जिले के सुजानगढ़ कस्बे में बुनियादी सुविधाओं की बदहाली और प्रशासनिक अनदेखी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का एक बेहद अनूठा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सुजानगढ़ के बागरेचा बास इलाके में लंबे समय से सड़कें पूरी तरह टूटी हुई थीं, नालियों का निर्माण अटका पड़ा था और गलियों में बदबूदार गंदा पानी फैला हुआ था। जब नगर परिषद के अधिकारियों ने समस्याओं का समाधान करने के बजाय जनप्रतिनिधि का फोन ही ब्लैकलिस्ट कर दिया, तो गुस्से में आए कांग्रेस नेता विद्या प्रकाश बागरेचा सीधे इलाके के गहरे कीचड़ और गंदे नाले के पानी के बीच सड़क पर ही धरने पर जाकर बैठ गए। कलेक्ट्रेट या दफ्तरों के बाहर टेंट लगाने के बजाय गंदे पानी में बैठकर दिए गए इस धरने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
सुजानगढ़ का बागरेचा बास इलाका और आसपास की बस्तियां पिछले लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं के संकट से जूझ रही हैं। इलाके की मुख्य गलियों में नाली निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है और जगह-जगह सड़क पर गहरे गड्ढे बने हुए हैं। नालियों की निकासी न होने से गंदा पानी लोगों के घरों के दरवाजों तक भर जाता है, जिससे निवासियों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ लोगों द्वारा सड़क पर मलबा डालकर रास्ता बाधित किया जा रहा था, जिस पर प्रशासन कोई सख्त कदम नहीं उठा रहा था।
आमतौर पर नेता नगर परिषद या कलेक्ट्रेट के बाहर धरना प्रदर्शन करते हैं, लेकिन विद्या प्रकाश बागरेचा ने सीधा आक्रामक तरीका चुना। कीचड़ के बीच लोटकर विरोध जताते हुए उन्होंने नगर परिषद प्रशासन पर संगीन आरोप लगाए।
नेताजी ने बताया कि जब वे आम जनता की इस समस्या को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों को रोजाना फोन करते थे, तो सुनवाई करने के बजाय अधिकारियों ने उनका मोबाइल नंबर ही ब्लॉक लिस्ट में डाल दिया।
फोन ब्लॉक होने और लंबे समय से पेच वर्क का काम न होने से निराश होकर उन्हें खुद कीचड़ में बैठकर नगर परिषद की नाकामी उजागर करनी पड़ी।
जैसे ही कीचड़ में लोटते नेताजी के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगे, प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में नगर परिषद के जूनियर इंजीनियर (JEN) और तकनीकी दल की टीम बागरेचा बास पहुंची।
अधिकारियों ने मौके पर ही विद्या प्रकाश बागरेचा से समझाइश की और गंदे पानी की निकासी के साथ तुरंत नाली निर्माण शुरू करवाने का वादा किया। नगर परिषद टीम ने प्राथमिकता के आधार पर सड़क के गड्ढों को भरने और पेच वर्क कराने का लिखित व मौखिक भरोसा दिया, जिसके बाद ही धरना समाप्त हुआ।