
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के राष्ट्रीय संयोजक और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने हाल ही में चूरू जिले के तालछापर में एक जनसभा के दौरान मंच पर माइक फेंकने और भाषण अधूरा छोड़कर जाने की चर्चित घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। सरदारशहर के दलमान गांव में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए बेनीवाल ने सार्वजनिक रूप से उस वाकये पर गहरा अफसोस जताया और साफ शब्दों में कहा कि उस घटना में सामने बैठे मासूम बच्चों की कोई गलती नहीं थी। उन्होंने घटना के लिए खेद व्यक्त करते हुए वहां मौजूद युवाओं और जनता से हाथ जोड़कर माफी मांगी। इसके साथ ही उन्होंने समर्थकों को खुश करते हुए यह भी घोषणा की कि वे बहुत जल्द फिर से तालछापर जाएंगे और इस बार हेलीकॉप्टर से वहां उतरकर एक और ऐतिहासिक रैली करेंगे।
सरदारशहर विधानसभा क्षेत्र के दलमान गांव में आयोजित आरएलपी की सांगठनिक सभा में हनुमान बेनीवाल ने तालछापर के उस पूरे वाकये की परतें खोलीं। उन्होंने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि तालछापर का कार्यक्रम ऐतिहासिक था, जहां करीब 20 हजार की संख्या में नौजवान एकत्र हुए थे।
बेनीवाल ने स्पष्ट किया कि उनका गुस्सा सामने बैठे स्कूली बच्चों पर नहीं था, बल्कि पीछे मौजूद कुछ ऐसे तत्वों पर था जो जानबूझकर नारेबाजी और शोर-शराबा करके सभा का माहौल बिगाड़ रहे थे। उन्होंने कहा कि छापर के लोग और वहां के युवा उनसे बेहद प्यार करते हैं, लेकिन उस वक्त ऐसी परिस्थितियां बन गईं कि उन्हें भाषण छोड़कर जाना पड़ा।
तालछापर में हुए 'ड्रामे' के बाद सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने पर कई शुभचिंतकों और वरिष्ठ नेताओं ने बेनीवाल को अपना गुस्सा शांत रखने की सलाह दी थी। इस पर अपनी खास शैली में जवाब देते हुए नागौर सांसद ने कहा कि लोगों ने उन्हें गुस्सा न करने की सलाह दी है, लेकिन अगर वे गुस्सा करना पूरी तरह छोड़ देंगे तो जनता के अटके हुए काम कैसे होंगे?
हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अब वे अपना गुस्सा नियंत्रण में रखेंगे और केवल वहीं गुस्सा दिखाएंगे जहां जनता के हक और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए उसकी वास्तव में जरूरत होगी।
यह पूरा विवाद 2 अगस्त 2026 (रविवार देर रात) को चूरू जिले के तालछापर कस्बे में हुआ था। उस रात करीब 11:30 बजे आरएलपी के नए कार्यालय के उद्घाटन और कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा था।
हनुमान बेनीवाल जब मंच से भाषण दे रहे थे, तो सामने बैठे कुछ बच्चे और युवक लगातार नारे लगा रहे थे। बेनीवाल ने उन्हें 2-3 बार शांत रहने के लिए समझाया। जब शोर बंद नहीं हुआ तो बेनीवाल आपा खो बैठे और उन्होंने कह दिया कि "इन बच्चों को कौन पकड़कर लाया है?" इसके बाद उन्होंने गुस्से में हाथ का माइक सीधे मंच पर दे मारा और बिना भाषण पूरा किए अपनी गाड़ी में बैठकर चले गए।
RLP कार्यकर्ताओं का कहना था कि उस रात स्थानीय स्तर पर सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण में बड़ी चूक हुई थी, जिसकी वजह से नेताजी का नियंत्रण खो गया था।
सरदारशहर की सभा में अपने भाषण के अंत में हनुमान बेनीवाल ने चूरू की जनता से वादा किया कि वे तालछापर के लोगों से मिले प्यार को कभी नहीं भूल सकते। उन्होंने ऐलान किया कि वे जल्द ही दोबारा तालछापर जाएंगे और इस बार हेलीकॉप्टर से लैंड करेंगे। इस घोषणा के बाद पूरी जनसभा बेनीवाल के समर्थन में नारों से गूंज उठी।