Axar Patel Fielding: कभी सुस्त फील्डिंग के लिए धोनी के गुस्से का शिकार होने वाले और जिम से जी चुराने वाले अक्षर पटेल आज टीम इंडिया के सुपरमैन कैसे बने? जानिए 'ऑस्कर' से वर्ल्ड कप हीरो बनने तक के उनके सफर की पूरी कहानी और 2026 वर्ल्ड कप में उनके उस तहलका मचाने वाले प्रदर्शन का राज।
Axar Patel Fielding: टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल में जब टीम इंडिया इंग्लैंड के सामने थी, तब अक्षर पटेल के उन दो अविश्वसनीय कैचों ने पूरे मैच का पासा पलट दिया था। अक्षर का जादू यहीं नहीं रुका, न्यूजीलैंड के खिलाफ फाइनल में उन्होंने 3/27 का स्पेल डाल कर कीवियों की कमर तोड़ दी थी। आज अक्षर पटेल को दुनिया के सबसे चुस्त और बेहतरीन फील्डरों में गिना जाता है, लेकिन उनकी यह कामयाबी रातों-रात नहीं आई। क्या आप जानते हैं कि एक वक्त ऐसा भी था जब उनकी सुस्त फील्डिंग देखकर कैप्टन कूल एमएस धोनी अपना आपा खो बैठे थे और उन्हें डेथ स्टेयर (खतरनाक वाली घूरती) दी थी?
टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ अक्षर ने जो फिल्डिंग की, उसने मैच पलट दिया था। उन्होंने एक के बाद एक कई शानदार कैच लपके। बाउंड्री के पास शिवम दुबे के साथ मिलकर उन्होंने विल जैक्स का जो कैच पकड़ा, उसने सबको हैरान कर दिया। हैरी ब्रूक का कैच लेने के लिए उन्होंने जिस तरह लंबी डाइव लगाई, उसकी तुलना 1983 वर्ल्ड कप में कपिल देव के ऐतिहासिक कैच से की जा रही है। जानकारों का मानना है कि भारत की 7 रनों की जीत में अक्षर के कैचों का उतना ही बड़ा हाथ था जितना बुमराह की गेंदबाजी का।
आज भले ही अक्षर की तुलना रवींद्र जडेजा से होती है, लेकिन 2017 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक मैच में अक्षर काफी सुस्त नजर आए थे। थर्ड मैन पर फिल्डिंग करते हुए उन्होंने इतनी धीमी गेंद फेंकी कि कंगारुओं ने दो रन ले लिए। तब कप्तान धोनी ने उन्हें गुस्से में घूरा था और विराट कोहली भी उन पर बुरी तरह झल्लाए थे।
अक्षर हमेशा से एक नेचुरल एथलीट रहे हैं, लेकिन शुरुआत में वो काफी आलसी थे। वह जिम जाने से बचने के लिए नए-नए बहाने बनाते थे, इसीलिए उनके दोस्त उन्हें मजाक में 'ऑस्कर' बुलाते थे। उन्हें गुजरात का जंक फूड खाना बहुत पसंद था, और हैरानी की बात ये थी कि इतना सब खाकर भी वो कभी मोटे नहीं दिखे।
पूर्व स्ट्रेंथ कोच सोहम देसाई ने बताया कि अक्षर अक्सर छोटी-मोटी चोटों से परेशान रहते थे। 2018 से उनकी ट्रेनिंग और खान-पान पर काम शुरू हुआ। उनके खाने के समय और मात्रा में बदलाव किया गया। गलत चीजों (जंक फूड) को उनकी डाइट से हटाया गया। नतीजा ये हुआ कि उनकी चोट लगने की दर 80% से घटकर सिर्फ 10% रह गई।
आज अक्षर 32 साल के हैं, लेकिन उनकी फिटनेस गजब की है। सोहम देसाई का कहना है कि आज अक्षर जो ट्रॉफियां जीत रहे हैं या मैदान पर चीते जैसी फुर्ती दिखा रहे हैं, वो उनकी बरसों की कड़ी मेहनत और अनुशासन का नतीजा है।