विराट कोहली एक बार फिर अपने पुराने फॉर्म में लौट आए है और शुभमन गिल वही पुरानी तकनीकी कमजोरियों से जूझते दिख रहे हैं। अब हालत पहले जैसे नहीं रहे। अब कोहली को टीम की नहीं, बल्कि 2027 वर्ल्ड कप के लिए टीम इंडिया को कोहली की जरूरत है।
Virat Kohli, India vs New Zealand: इंदौर वनडे ने भारतीय क्रिकेट फैंस को 1990 के दशक की याद दिला दी। वह दौर, जब सचिन तेंदुलकर अकेले दम पर लड़ते थे, शतक बनता था, लेकिन टीम जीत तक नहीं पहुंच पाती थी। रविवार को कुछ वैसा ही नज़ारा दिखा। विराट कोहली ने 124 रनों की शानदार पारी खेली, इसके बावजूद भारत 337 रनों का लक्ष्य हासिल नहीं कर सका और न्यूजीलैंड से 38 साल बाद घर पर वनडे सीरीज़ हार गया।
यह हार विराट कोहली की नहीं, बल्कि पूरी टीम की नाकामी रही। सपाट पिच पर, जहां बल्लेबाज़ी आसान मानी जा रही थी, भारत के टॉप-5 में शामिल बाकी चार बल्लेबाज़ पूरी तरह विफल रहे। एक छोर पर कोहली टिके रहे, लेकिन दूसरे छोर से लगातार विकेट गिरते रहे। जब हालात ऐसे हों, तो दुनिया का सबसे बड़ा बल्लेबाज़ भी मैच नहीं जिता सकता।
कोहली पर दबाव लगातार बढ़ता गया। निचले क्रम पर भरोसा न होने की वजह से उन्हें मजबूरन बड़ा शॉट खेलना पड़ा और वह कैच आउट हो गए। उनके आउट होते ही भारत की जीत की उम्मीद भी खत्म हो गई। यह एक साफ संकेत था कि भारतीय वनडे बल्लेबाज़ी इस वक्त गंभीर अस्थिरता से गुजर रही है। जिस तरह बार-बार बल्लेबाज़ एक जैसी गलतियां कर आउट हो रहे हैं, उसने अब कहानी की दिशा ही बदल दी है।
कोहली की इस पारी ने टीम मैनेजमेंट और चयनकर्ताओं की सोच बदल दी है। कुछ महीने पहले तक चर्चा यह थी कि विराट कोहली 2027 विश्व कप तक खुद को जबरन खींच रहे हैं। अब हालात उलट हैं। टीम को उनकी ज़रूरत पहले से कहीं ज़्यादा महसूस हो रही है। बल्कि अब हालात ऐसे हैं कि भारत लगभग उनसे गुज़ारिश करता दिख रहा है कि वे कम-से-कम अगले साल तक टिके रहें। खेल में वक्त के साथ तस्वीर कितनी तेज़ी से बदलती है, यह उसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
छह महीने पहले तस्वीर बिल्कुल अलग थी। इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज़ में शुभमन गिल ने 700 से ज्यादा रन बनाए थे। उन्हें कोहली का उत्तराधिकारी माना जाने लगा था। कहा जा रहा था कि वे तीनों फॉर्मेट के खिलाड़ी हैं। उन्हें स्टार बल्लेबाज़ और भविष्य का कप्तान भी बताया जा रहा था। टेस्ट कप्तानी उनके पास थी और माना जा रहा था कि वनडे व टी20 की जिम्मेदारी भी जल्द मिलेगी।
उसी समय यह भी माना जा रहा था कि टेस्ट और टी20 से संन्यास ले चुके रोहित शर्मा और विराट कोहली को धीरे-धीरे बाहर किया जाएगा। उम्र और सीमित वनडे कैलेंडर को देखते हुए यह सोच तार्किक लगती थी।ऑस्ट्रेलिया दौरे से पहले रोहित को कप्तानी से हटा दिया गया और गिल को वनडे टीम की कमान सौंप दी गई।
लेकिन रोहित शर्मा ने अपनी फिटनेस पर काम किया और साफ कर दिया कि वह अभी खत्म नहीं हुए हैं। ऑस्ट्रेलिया दौरे पर कोहली फ्लॉप रहे, लेकिन रोहित का बल्ला जमकर चला। इसके बाद घरेलू सीरीज़ में विराट कोहली ने दमदार वापसी की। इंदौर में खेले गए इस आखिरी वनडे में, टी20 सीज़न शुरू होने से पहले, कोहली ने एक बार फिर बता दिया कि टीम को अभी भी उनकी जरूरत है।
दिलचस्प बात यह है कि जिस समय कोहली अपनी कमजोरी पर काबू पा चुके हैं, उसी वक्त कप्तान शुभमन गिल फिर से अपनी पुरानी समस्या से जूझते दिखे। काइल जैमीसन ने गिल के बल्ले और पैड के बीच के गैप को निशाना बनाया, जैसा पहले रबाडा और एंडरसन कर चुके हैं। पूरी सीरीज़ में गिल वैसा प्रभाव नहीं छोड़ पाए, जैसा उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ किया था।
कुछ ही महीनों में भूमिकाएं बदल गई हैं। जिसे भविष्य माना जा रहा था, वह लड़खड़ा रहा है और जिसे अतीत समझा जाने लगा था, वही आज भारतीय टीम की सबसे बड़ी ताकत बन गया है। क्रिकेट में इससे बड़ा व्यंग्य शायद ही देखने को मिले।