
नई दिल्ली । भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को अपने मजबूत व्यक्तित्व और कठोर फैसलों के लिए आज भी याद किया जाता । भारत को इंदिरा जैसा नेता तब मिला जब भारत ने प्रगति की दिशा में अपने कदम बढ़ाने ही शुरू किये थे । दृढ़ निश्चयी और किसी भी परिस्थिति से जूझने और जीतने की क्षमता रखने वाली प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने न केवल इतिहास बल्कि पाकिस्तान को विभाजित कर दक्षिण एशिया के भूगोल को ही बदल डाला था। आज 31 अक्टूबर है और आज के दिन ही 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा की गोली मार के हत्या कर दी गई थी। यह तो हम सब जानते हैं की उसके बाद सिख दंगों में भारत में क्या-क्या हुआ था । लेकिन आज हम आपको बताने वाले हैं उस भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच के बारे में जो बीच में ही इंदिरा की मौत की वजह से बंद कर देना पड़ा था ।
34 साल पुरानी वो कहानी जो कम ही लोग जानते हैं-
1984 में भारत ऐसा बिलकुल भी नहीं था जैसा अभी है । स्वप्नदर्शी राजनेता जवाहर लाल नेहरू ने भारत में कई महत्वपूर्ण पहल कीं, लेकिन उन्हें अमली जामा इंदिरा गांधी ने पहनाया। चाहे रजवाड़ों के प्रिवी पर्स समाप्त करना हो, बैंकों का राष्ट्रीयकरण हो अथवा कोयला उद्योग का राष्ट्रीयकरण... इनके जरिए उन्होंने अपने आपको गरीबों और आम आदमी का नेता साबित कर दिया । आज से ठीक 34 साल पहले आज के ही दिन इंदिरा की हत्या कर दी गई थी । चलिए आज आपको बताते हैं 34 साल पुरानी वो कहानी जो बहुत कम ही लोग जानते हैं । 31 अक्टूबर 1984 बाकी दिनों जैसा ही सामान्य सा दिन था। और उस दिन भारतीय क्रिकेट सियालकोट में थी। तब टीम की कमान सुनील गावस्कर के हाथों में थी । लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ पहले वनडे में उन्हें चोट लग गई थी जिस वजह से दूसरे मैच में वो खेलने में असमर्थ थे । उनके अनुपस्थिति में टीम की कप्तानी मोहिंदर अमरनाथ को दी गई थी। उस रोज जब भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा पर उनके ही बॉडीगार्ड्स गोलियों बरसा रहे थे । ठीक उसी समय भारतीय टीम पाकिस्तान के खिलाफ बल्लेबाजी कर रही थी ।
मैच के बीच में ही आई मनहूस खबर-
तब टेस्ट और वनडे सीरीज के मैच साथ में खेले जाते थे । पहले वनडे में भारत को जहां हार मिली थी तो बाद के दो टेस्ट ड्रा रहे थे । फिर सीरीज के आखिरी वनडे में 31 अक्टूबर को दोनों टीमें भिड़ रही थी। इस मैच में टीम इंडिया को पहले बल्लेबाजी करने का मौका मिला । शुरूआती झटकों के बाद भारतीय टीम सम्भली और फिर संदीप पाटिल और कर्नल यानी दिलीप वेंगसरकर ने शानदार बैटिंग शुरू की। दोनों ने 143 रनों की पार्टनरशिप की इस पार्टनरशिप के दौरान ही स्टेडियम में एक फ़ोन बजा । फोन पर जो मनहूस मैसेज मिला उसके बाद कुछ भी सामान्य रहने वाला नहीं था ।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने मैच किया निरस्त-
कॉल कटने के साथ ही जो मैसेज सामने से दिया गया था उसे अब भारतीय टीम तक कैसे पहुंचाया जाए यह बहुत बड़ी चुनौती थी । खैर उसके पहले आपको यह बता दें आखिर उस फोन कॉल के दौरान मैसेज क्या दिया गया था। कॉल के दौरान बताया गया था “भारत की प्रधानमंत्री इंडिया गांधी की गोली मार मारकर हत्या कर दी गई है। पाकिस्तान के प्रेसिडेंट जनरल ज़िया उल हक़ ने मैच को तुरंत ही निरस्त कर देने का ऑर्डर दिया है।''
भारत की बल्लेबाजी खत्म हुई लेकिन मैसेज नहीं मिला-
मैदान में तब लगभग 25 हज़ार दर्शक बैठे हुए थे जो हर गेंद पर दोनों ही टीमों का उत्साह वर्धन कर रहे थे । सभी ने टिकट के पैसे दिए थे ऐसे में उन्हें मैदान छोड़ कर घर जाने के लिए कहना किसी बड़ी दुर्घटना को आमंत्रित करना जैसे होता । लेकिन चुकी पाकिस्तान के प्रेसिडेंट का आदेश था तो उनकी बात ना मानना भी खतरनाक साबित हो सकता था। किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था किया क्या जाए । समय बीतता जा रहा था और देखते-देखते भारतीय बल्लेबाजी खत्म हो गई । 40 ओवर की इनिंग में भारत ने 210 रन बनाये । तब वेंगसरकर ने 102 गेंदों गेंदों की अपनी नाबाद पारी में 94 रन ठोक डाले थे ।
फुट-फुट कर रोइ टीम इंडिया-
भारतीय बल्लेबाजी खत्म होने के बाद रवि शास्त्री और वेंगसरकर क्यूंकि वो बैटिंग से आने के बाद चेंज करने के लिए चले गए थे । इसलिए उन्हें इस बात की भनक भी नहीं लगी की मैदान पर चल क्या रहा है । जब सुनील गावस्कर और उस वक़्त के टीम इंडिया के मैनेजर राज सिंह डूंगरपुर को सारी बात पता चली तो उनके आँखों के सामने अंधेरा छा गया । प्रधानमंत्री की हत्या की खबर जैसे ही सबको मिली सब रोने लगे वही इनसब के बीच मैदान के बाहर खिलाड़ियों को ले जाने के लिए गाड़ियां लग चुकी थीं। साथ ही सामन भी उनमें लादे जाने लगे थे ।