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IND vs ZIM: मयंक यादव की तूफानी वापसी, पिता मथुरा में कर रहे थे परिक्रमा, बेटे ने हरारे में बरपाया कहर

IND vs ZIM, Mayank Yadav Comeback: हरारे स्पोर्ट्स क्लब में ज़िम्बाब्वे के खिलाफ मयंक यादव ने 2 साल बाद शानदार वापसी की। उन्होंने 149 kmph की रफ्तार से पहली गेंद पर विकेट लिया, जबकि उनके पिता मथुरा में गोवर्धन परिक्रमा कर रहे थे।
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Jul 24, 2026
Mayank Yadav Comeback, India vs Zimbabwe T20,
मयंक यादव (Photo - IANS)

IND vs ZIM, Mayank Yadav Comeback: जब 24 साल के भारतीय तेज गेंदबाज मयंक यादव 7,000 किलोमीटर दूर हरारे स्पोर्ट्स क्लब (Harare Sports Club) में अपनी रफ्तार का कहर बरपा रहे थे, तब उनके पिता प्रभु यादव मथुरा में गोवर्धन परिक्रमा कर रहे थे।

दो साल बाद टीम इंडिया में वापसी कर रहे मयंक ने जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले टी20 मैच में कमाल कर दिया। उन्होंने अपने शानदार स्पेल में सिर्फ 18 रन देकर 2 विकेट झटके। मयंक ने अपनी पहली ही गेंद 149 kmph की रफ्तार से फेंकी और खतरनाक बल्लेबाज ब्रायन बेनेट को आउट किया, जिन्होंने टी20 वर्ल्ड कप में भारत को डरा दिया था।

उनके पिता प्रभु यादव, जो ओखला की एक फैक्ट्री में एम्बुलेंस और पुलिस की गाड़ियों के सायरन बनाते हैं, ने 21 किलोमीटर की परिक्रमा के बाद कहा, 'मैंने तो मैच देखा तक नहीं। मैं तो बस कल रात ही मथुरा आ गया था। मैंने बस भगवान से बेटे की फिटनेस मांगी है, क्योंकि पिछले दो साल उसके लिए बहुत मुश्किल रहे हैं।'

चोट से लड़कर की शानदार वापसी

मयंक के लिए पिछले दो साल बिल्कुल आसान नहीं थे। उनके बचपन के कोच देवेंद्र शर्मा ने बताया कि जब मयंक को टीम में चुने जाने की खबर मिली, तो उन्हें यकीन ही नहीं हुआ। मयंक ने हैरान होकर कहा था, 'क्यों मजाक कर रहे हो सर?'

लगातार चोटों (पीठ में स्ट्रेस फ्रैक्चर, टखने, पिंडली और घुटने की चोट) के कारण मयंक लंबे समय तक क्रिकेट से दूर रहे। इस साल आईपीएल में भी उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। उन्होंने लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) के लिए 4 मैचों में बिना कोई विकेट लिए 11.37 की इकॉनमी से 182 रन दिए। लेकिन BCCI ने उन पर भरोसा बनाए रखा। पिछले एक साल से वह बेंगलुरु के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) में रोज 15-20 ओवर गेंदबाजी कर रहे हैं, ताकि अगली वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के लिए तैयार हो सकें।

आलोचकों को दिया करारा जवाब

उनके मेंटर नरेंद्र नेगी ने कहा, 'लगातार 145+ kmph की रफ्तार से गेंदबाजी करना आसान नहीं है। लोगों ने उसे चुका हुआ मान लिया था, लेकिन आज उसने सबको गलत साबित कर दिया।' खुद मयंक ने मैच के बाद माना कि दो साल बाद वापसी करने पर वह नर्वस थे, लेकिन पहली ही गेंद पर विकेट मिलने से उनका सारा दबाव खत्म हो गया और आत्मविश्वास लौट आया। मयंक के लिए ये विकेट सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि लंबे दर्द और रिहैब के खत्म होने का जश्न है। अब उनकी मां ममता यादव को बस यही उम्मीद है कि यह सीरीज खत्म होने के बाद उनका बेटा आखिरकार कुछ दिन घर पर परिवार के साथ बिताएगा।