ख्वाजा ने दोहरे मापदंडों का उदाहरण देते हुए कहा, "कई खिलाड़ी टेस्ट से एक दिन पहले गोल्फ खेलकर या रात में 15 बीयर पीकर चोटिल हुए, लेकिन उन्हें 'ऑस्ट्रेलियन लैरिकिन्स' कहा गया। मेरे साथ ऐसा हुआ तो मेरी पहचान और साख पर हमला हुआ।"
Usman Khawaja Retirement: ऑस्ट्रेलिया के बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया है। सिडनी में 4 जनवरी से शुरू हो रहा एशेज सीरीज का पांचवां टेस्ट ख्वाजा के करियर का आखिरी टेस्ट होगा। ख्वाजा ने शुक्रवार की सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए अपने संन्यास की घोषणा की। इस मौके पर उनका परिवार भी मौजूद था।
ख्वाजा ने कहा, "मैं घोषणा करने आया हूं कि सिडनी टेस्ट के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास ले लूंगा। ईश्वर ने क्रिकेट के जरिए मुझे मेरी सोच से कहीं ज्यादा दिया है। उन्होंने मुझे ऐसी यादें दी हैं जिन्हें मैं हमेशा अपने साथ रखूंगा, ऐसी दोस्ती जो खेल से कहीं आगे है, और ऐसे सबक जिन्होंने मुझे बनाया कि मैं मैदान के बाहर कौन हूं।"
उन्होंने कहा, "कोई भी करियर किसी एक इंसान का नहीं होता। मुझे मेरे माता-पिता और पत्नी से बहुत मदद मिली। इन्होंने बहुत त्याग किया, जो कभी चर्चा में नहीं रहा है। मैं ऑस्ट्रेलिया के लिए खेलूंगा, इसका विश्वास मेरे पिता को मुझसे ज्यादा था। इस विश्वास के लिए धन्यवाद।"
ख्वाजा ने क्रिकेट के एक संवेदनशील और कई अहम पहलूओं पर भी बात की। ख्वाजा ने स्वीकार किया कि वह आज भी नस्लीय पूर्वाग्रह और स्टीरियोटाइप्स से जूझ रहे हैं। इतना ही नहीं बिना किसी का नाम लिए ख्वाजा ने दोहरे मापदंड के लिए फैंस को क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (CA) को भी लताड़ा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ख्वाजा ने क्रिकेट जगत में मौजूद नस्लीय पूर्वाग्रहों और दोहरे मापदंडों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि वह आज भी इन स्टीरियोटाइप्स से जूझते हैं। एशेज सीरीज की शुरुआत में पर्थ टेस्ट से पहले गोल्फ खेलने और फिर बैक स्पैज्म की चोट पर हुई आलोचना का जिक्र करते हुए बोले, "मीडिया और कुछ पूर्व खिलाड़ियों ने मुझे स्वार्थी, आलसी और टीम के प्रति कमिटेड नहीं बताया। ये वही नस्लीय स्टीरियोटाइप्स हैं जिनके साथ मैं बड़ा हुआ हूं। मैंने ऑस्ट्रेलियाई टीम में किसी और को ऐसे व्यवहार का सामना करते नहीं देखा।"
ख्वाजा ने दोहरे मापदंडों का उदाहरण देते हुए कहा, "कई खिलाड़ी टेस्ट से एक दिन पहले गोल्फ खेलकर या रात में 15 बीयर पीकर चोटिल हुए, लेकिन उन्हें 'ऑस्ट्रेलियन लैरिकिन्स' कहा गया। मेरे साथ ऐसा हुआ तो मेरी पहचान और साख पर हमला हुआ।" उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाली पीढ़ी के लिए रास्ता आसान होगा। "मैं चाहता हूं कि अगले उस्मान ख्वाजा का सफर थोड़ा आसान हो, और एक दिन ऐसा आए जब उस्मान ख्वाजा का सफर जॉन स्मिथ जैसा ही हो।"
ख्वाजा ने पिछले साल भारत के खिलाफ बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के दौरान ही संन्यास के बारे में सोचना शुरू कर दिया था। अंतिम फैसला उन्होंने एडिलेड टेस्ट में लिया, जहां शुरुआत में टीम से बाहर होने के बावजूद स्टीव स्मिथ की चोट के कारण मौका मिला और उनकी 82 व 40 रनों की पारियों ने सीरीज जीत में योगदान दिया।
ख्वाजा ने जूनियर क्रिकेट के अनुभवों को याद करते हुए कहा कि रास्ता आसान नहीं था। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के जूनियर सिस्टम को 'व्हाइट-डॉमिनेटेड' बताते हुए कहा कि वहां उन्हें नस्लीय भेदभाव का सामना करना पड़ा। इस्लामाबाद में जन्मे और बचपन में सिडनी आए ख्वाजा, ऑस्ट्रेलिया के पहले मुस्लिम टेस्ट क्रिकेटर हैं। उन्होंने राजनीतिक और मानवीय मुद्दों पर खुलकर राय रखी, जिसके चलते वह अक्सर आलोचना के केंद्र में रहे। दो साल पहले, जब उन्होंने 'स्वतंत्रता एक मानव अधिकार है' और 'सभी जीवन समान हैं' लिखे जूते पहनने की कोशिश की थी, तो आईसीसी ने इसकी अनुमति नहीं दी थी।
39 साल के उस्मान ख्वाजा की उम्र और एशेज सीरीज में उनकी फॉर्म और युवाओं को मौका देने का समय, कहीं न कहीं उनके संन्यास की वजह बनी। जारी एशेज सीरीज के 4 मैचों में वह तीन मैच का हिस्सा रहे हैं। ब्रिसबेन टेस्ट में वह इंजरी की वजह से नहीं खेल पाए थे। ख्वाजा एशेज सीरीज की पांच पारियों में 2, 82, 40, 0, 29 का स्कोर कर सके हैं। पिछली 15 पारियों में उनके बल्ले से सिर्फ एक अर्धशतक आया है। सिडनी टेस्ट में उनकी कोशिश एक बड़ी पारी के साथ संन्यास लेने की होगी।
ख्वाजा ने 2011 में टेस्ट और 2013 में वनडे में डेब्यू किया था। 87 टेस्ट की 157 पारियों में 43.39 की औसत से 16 शतक और 28 अर्धशतक लगाते हुए वह 6,206 रन बना चुके हैं। उनका सर्वाधिक स्कोर 232 है। वहीं 40 वनडे की 39 पारियों में 2 शतक और 12 अर्धशतक की मदद से 1,554 रन उनके नाम दर्ज हैं। 9 टी20 में 1 अर्धशतक की मदद से वह 241 रन बना चुके हैं। ख्वाजा ने आखिरी वनडे 2019 और आखिरी टी20 मैच 2016 में खेला था।