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प्रियरंजन भारती
दरभंगा,पटना: बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी भाजपा और जदयू के नेताओ के सामूहिक रूप से कोरोना संक्रमित पाए जाने के साथ ही खलबली मच गई है। दोनों ही पार्टियां चुनाव की तैयारियों में शिद्दत से जुटी हैं। कोरोना के कहर से सूबे में दो डॉक्टरों की असमय मौत और पटना जिलाधिकारी कार्यालय में चौदह कर्मियों के चपेट में आ जाने से हड़कंप मच उठा है। महामारी के कहर को देखते हुए प्रदेश में 16 से 31 जुलाई तक लॉकडाउन लागू करने की घोषणा भी कर दी गई है।
भाजपा के 75 नेता संक्रमित
चुनावी तैयारियों में जुटी प्रदेश भाजपा के एक साथ 75 नेता कोरोना पॉजिटिव पाए गए। प्रदेश कार्यालय को अगले 15 दिनों के लिए सील कर दिया गया है। सभी पॉजिटिव पाए गए नेता होम क्वारंटाइन में चले गए हैं। पिछले कई दिनों से प्रदेश प्रभारी भूपेंद्र यादव के नेतृत्व में प्रदेश कार्यालय में क्षेत्रीय बैठकें की जा रही थीं। इसी दौरान किसी संक्रमित नेता के संपर्क में आने से संक्रमण का विस्तार हुआ। 137 लोगों के लिए गए सैंपल्स में 75 की रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई। इनमें संगठन प्रभारी नागेंद्र नाथ, उनके निजी सचिव विकास कुमार, उपाध्यक्ष राजेश वर्मा, राधामोहन शर्मा, महामंत्री देवेश कुमार, पूर्व उपाध्यक्ष अनिल शर्मा, मीडिया प्रभारी राकेश कुमार, कार्यालय सचिव अनिल मिश्रा आदि प्रमुख हैं। इनके परिजनों के भी चपेट में आने की आशंका बढ़ गई हैं।
इधर जदयू में भी कई नेताओं के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने से दहशत का माहौल बन गया है। ग्रामीण कार्य मंत्री शैलेश कुमार ढाका के विधायक फैसला रहमान और पार्टी प्रवक्ता अजय आलोक समेत कई नेता पॉजिटिव पाए गए हैं। मुख्यममंत्री तथा उपमुख्यमंत्री के घर दफ्तरों में कोरोना ने पहले ही इंट्री मार दी है।
31 जुलाई तक हुआ संपूर्ण लॉकडाउन
कोरोना संक्रमण की लगातार बढ़ती संख्या से राज्य सरकार ने संपूर्ण प्रदेश में 16 से 31 जुलाई तक पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा कर दी। राजधानी पटना समेत आठ जिलों में पहले से 16 तक आंशिक लॉकडाउन लागू है। मुख्य सचिव के कार्यालय से पूरे प्रदेश में कड़ी हिदायतों के साथ लॉकडाउन लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी गई। बढ़ते संक्रमण के बीच राज्य सरकार ने समीक्षा कर लॉकडाउन लागू करने का निर्णय किया था।
डॉक्टरों की मौत से बढ़ी चिंता
बिहार में कोरोना की चपेट में आने से डॉक्टरों की मौत का सिलसिला भी चिंता का कारण बन गया है। अधिकांश डॉक्टर अब सामूहिक रूप से इलाज करने से कतराने लगे हैं। गया के एक मशहूर डॉक्टर अश्विनी कुमार की रविवार को कोरोना से मौत हो गई। दूसरे ही दिन पीएमसीएच के ईएनटी विभाग के प्रोफेसर डॉ केएन सिंह की पटना एम्स में मौत हो गई। अभी तक सूबे में तीस से अधिक डॉक्टर कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। भोजपुर के एक अधिवक्ता समेत दस लोग पिछले 24 घंटों में कोरोना से जान गंवा चुके हैं।
डीएम कार्यालय में 14 पॉजिटिव
पटना के जिलाधिकारी कुमार रवि के कार्यालय के 14 कर्मियों की कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव पाए जाने से प्रशासनिक क्षेत्र में भी दहशत फ़ैल गई है। पटना सचिवालय और पुलिस लाइन में पहले ही से कोरोना की इंट्री हो चुकी है। सचिवालय में चुनिंदा आला अधिकारियों के अलावा किसी की इंट्री पर रोक है। पुलिस लाइन में 38 कोरोना संक्रमितों के पाए जाने के बाद इलाके को कंटेन्मेंट जोन घोषित किया जा चुका है। माना जा रहा कि यही संक्रमण जिलाधिकारी कार्यालय तक भी जा पहुंचा।
सूबे में सत्तरह हजार से पार हुए संक्रमित
राज्य में जांच की रफ्तार बढ़ने के साथ कोरोना मरीजों की पहचान का आंकड़ा भी बढ़ा है। अभी दस हजार हर दिन जांच किए जाने के दौरान मरीजों की कुल संख्या 17421 पहुंची है। हालांकि 12364 ठीक भी हो चुके हैं। इस दौरान मृत्यु दर भी कम चौंकाने वाला नहीं। करीब 134 लोग इसकी गिरफ्त में आकर जान गंवा चुके हैं। पटना में ही 15 लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी हैं। राजधानी में मंगलवार तक कुल 2097 कोरोना मरीज चिन्हित हैं। सभी 38 जिलों में संक्रमण के लिहाज से पटना अभी नंबर वन और मिनी राजस्थान कहलाने वाला भागलपुर नंबर दो पर बना है।