दौसा

राजस्थान के इस जिले में 44 साल बाद ऐसा नजारा, 12 बांध लबालब; इन बांधों में भी आया पानी

दौसा जिले में छोटे-बड़े कुल 39 बांध हैं, जिनमें से 37 में पानी की आवक हो चुकी है। ऐसा कई दशकों बाद संभव हुआ है।

3 min read
Sep 06, 2025
सिकंदरा में बाणगंगा नदी में आए पानी का विहंगम दृश्य। फोटो: पत्रिका

दौसा। कई दशकों बाद मानसून की मेहरबानी से बांध-तालाबों से लेकर कुएं-बावड़ी सभी पानी से लबालब हैं। दौसा जिले में छोटे-बड़े कुल 39 बांध हैं, जिनमें से 37 में पानी की आवक हो चुकी है। ऐसा कई दशकों बाद संभव हुआ है।

लोगों का मानना है कि 1981 की बाढ़ के बाद अब पानी की ऐसी तस्वीर जिले में नजर आ रही है। अब मात्र राहुवास और चुड़ास बांध खाली हैं, शेष सभी बांधों में पानी आया है। हालांकि कुछ में नाममात्र का पानी है, जबकि 12 बांध शत-प्रतिशत भर चुके हैं। बांधों में चल रही चादर से बहाव क्षेत्र की नदियां बह रही हैं।

ये भी पढ़ें

44 साल बाद राजस्थान की इस नदी का दिखा रौद्र रूप, कई गांव डूबे; दहशत में ग्रामीण

मोरेल बांध पर चली चादर के बाद बहता पानी। फोटो: पत्रिका

ये बांध 100 प्रतिशत लबालब

दौसा जिले का मोरेल, कालाखो, झिलमिली, गेटोलाव, रेहडिय़ा, सिंथोली, दिवांचली, हरिपुरा, महेश्वरा, भांकरी, नामोलाव, सूरजपुरा बांध 100 प्रतिशत लबालब हैं।

इन बांधों में आया इ​तना पानी

जल संसाधन विभाग के अनुसार शुक्रवार सुबह आठ बजे तक माधोसागर 7.61, सैंथल सागर 48.57, बिनोली सागर दक्षिण सागर 4.98, चांदराना 45.06, भंडारी 9.87, सिनोली 22.90, खारली 20.44, जगरामपुरा 37.41, कोट 20.57, कोंड्रा 1.74, रामपुरा 61.29, पापड़दा 25, बड़ियाल 17.24, विजय सागर 0.98, धपावन 5.88, उपरेड़ा 1.47, गुढ़ामुई 2.22, रौंथ 8.16, शीशवाड़ा 3.31, समसपुर 3.41, बड़ागांव खेड़ला 51.58, सिकंदरपुर 4.10, पावटा 73.42, हुड़ला 76.47 तथा नाहरपुरा बांध में 7.38 प्रतिशत जलभराव है।

कांकरिया एनिकट की दीवार टूटी, खेत हुए जलमग्न

लालसोट. मोरेल बांध पर चल रही करीब 3 फीट की चादर के कारण वेस्ट वेयर से बहकर नदी में तेज गति सो बह कर जा रहे पानी ने कांकरिया गांव के पास डाउन स्ट्रीम में बने एक एनीकट को क्षतिग्रस्त कर दिया है, पानी के तेज बहाव के कारण नदी पर 8 साल पूर्व मनरेगा के तहत बने इस एनिकट की दीवार टूट गई।

सहायक अभियंता चेतराम मीना ने बताया कि यह एनिकट वेस्ट वेयर से करीब 400 से 500 मीटर आगे बना हुआ है। अब तक भारी बारिश नहीं होने यह एनिकट सुरक्षित था, गत वर्ष भी थोड़ा क्षतिग्रस्त हुआ था, शुक्रवार को एनिकट की एक ओर की दीवार टूटी है। मामले की जानकारी मिलते ही भाकिस नेता धर्मराज मीना, धूमसिंह मीना समेत कई ग्रामीण भी पहुंचे। ग्रामीणों ने बताया कि मौके पर मिट्टी का बड़ा कटाव हो गया है। इससे अब एनिकट टूटने का खतरा बन गया है एवं कई बीघा खेतों में पानी भर गया है।

सर्वाधिक दौसा तहसील में बारिश

जिले में 664.92 एमएम औसत बारिश के मुकाबले अब तक 1056.96 एमएम (158.96 फीसदी) बारिश हो चुकी है। वर्तमान मानसून सीजन में सर्वाधिक बारिश दौसा तहसील क्षेत्र में 1605 एमएम हुई है। इसके चलते दौसा के आसपास सभी बांध ओवरफ्लो हैं। दूसरे नंबर पर सिकराय तहसील में 1425 एमएम तथा तीसरे नंबर पर लालसोट में 1384 एमएम कुल वर्षा दर्ज की गई है। सबसे कम बारिश सैंथल सागर स्टेशन पर 762 एमएम, बैजूपाड़ा में 784 व बसवा में 791 एमएम हुई है। जिला मुख्यालय पर शुक्रवार को भी दिनभर रुक-रुककर बारिश का दौर जारी रहा।

ये भी पढ़ें

IMD Red Alert: राजस्थान के 5 जिलों में अत्यधिक भारी बारिश का रेड अलर्ट, इन 3 जिलों में आज स्कूलों की छुट्टी

Also Read
View All

अगली खबर