दौसा

दौसा: ‘चायवालाज’ स्टार्टअप के फाउंडर ने दी जान, जयपुर में खोला था पहला कैफे, नेशनल अवॉर्ड के बाद चुनी अध्यात्म की राह

Chaiwalaz Founder Rohit Sharma: 'चायवालाज' के 30 वर्षीय फाउंडर रोहित शर्मा ने दौसा जिले के साकेत कॉलोनी स्थित घर में फंदा लगाकर जान दे दिया। 17 साल की उम्र में नर्सिंग पढ़ाई के दौरान स्टार्टअप शुरू कर जयपुर समेत सात आउटलेट खोलने वाले रोहित को साल 2022 में नेशनल MSME अवॉर्ड मिला था।
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Aug 02, 2026
Rohit Sharma Chaiwalaz Suicide
Chaiwalaz Founder Rohit Sharma Suicide (Patrika Photo)

Rohit Sharma Chaiwalaz Suicide: दौसा: राजस्थान के चर्चित युवा उद्यमी और 'चायवालाज' स्टार्टअप के संस्थापक रोहित शर्मा (30) ने शनिवार दोपहर दौसा स्थित अपने निवास पर फांसी लगाकर जान दे दी (आत्महत्या)। इस घटना से पूरे क्षेत्र और स्टार्टअप जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। घटना दौसा शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत साकेत कॉलोनी की है।

बता दें कि शनिवार दोपहर जब परिजनों को रोहित के कमरे में कोई हलचल महसूस नहीं हुई, तो उन्होंने दरवाजा खटखटाया। अंदर से कोई जवाब न मिलने पर परिजनों ने अनहोनी की आशंका में दरवाजा तोड़ा, तो रोहित कमरे में फंदे से लटके मिले। परिजन तुरंत उन्हें फंदे से नीचे उतारकर दौसा जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

सूचना मिलते ही कोतवाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है और फिलहाल जान देने के कारणों का स्पष्ट रूप से पता नहीं चल पाया है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है।

17 साल की उम्र में शुरू किया था बिजनेस

रोहित शर्मा बेहद कम उम्र से ही अपनी उद्यमशीलता और नवाचार के लिए चर्चा में रहे थे। महज 17 वर्ष की आयु में, जब वे नर्सिंग की पढ़ाई कर रहे थे, उन्होंने बिजनेस की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने जयपुर में 'चायवालाज' नाम से चाय कैफे का एक अनूठा स्टार्टअप शुरू किया।

उनका पहला आउटलेट जयपुर के मानसरोवर स्थित शिप्रा पथ पर खुला था। रोहित का यह कांसेप्ट युवाओं और चाय प्रेमियों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ, जिसके बाद उन्होंने जयपुर में दूसरा आउटलेट खोला। देखते ही देखते उन्होंने अन्य शहरों में भी इसका विस्तार किया और कुल 7 आउटलेट का सफल संचालन किया। बिजनेस के साथ-साथ वे दौसा में 'मिशन हेल्पलाइन' चलाकर समाजसेवा के कार्यों से भी जुड़े रहे।

नेशनल अवॉर्ड से हुए थे सम्मानित

रोहित के इस सफल स्टार्टअप मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली। उन्हें वर्ष 2022 में ग्लोबल इंडिया बिजनेस फोरम की ओर से बिजनेस एक्सीलेंस कैटेगरी के तहत 'नेशनल MSME अवॉर्ड 2022' प्रदान किया गया था। इसके अलावा, कई अन्य राष्ट्रीय व स्थानीय संस्थाओं ने भी एक सफल युवा उद्यमी के रूप में उन्हें सम्मानित किया था।

स्टार्टअप बंद कर चुनी अध्यात्म की राह

सफलता की ऊंचाइयों को छूने के बावजूद, पिछले कुछ समय से रोहित के जीवन में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा था। करीब 6 महीने पहले उन्होंने अचानक 'चायवालाज' के अपने सभी 7 आउटलेट्स को बंद कर दिया था।

व्यवसाय समेटने के बाद रोहित ने अध्यात्म की राह चुन ली थी। वे अक्सर धार्मिक व आध्यात्मिक स्थलों की यात्राएं करने लगे थे। इस दौरान उन्होंने लेखन में भी अपनी रुचि दिखाई और कई किताबें लिखीं। उनकी लिखी पुस्तक 'तत्सुखे सुखित्वं' काफी पसंद की गई और बेस्टसेलर श्रेणी में शामिल हुई। अध्यात्म से उनके गहराते लगाव का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपना नाम बदलकर 'रोहित शिवोहम' कर लिया था।

राजनीति में भी आजमाया था भाग्य

रोहित शर्मा केवल बिजनेस और अध्यात्म तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने सार्वजनिक जीवन में भी दिलचस्पी दिखाई। वर्ष 2024 में हुए दौसा विधानसभा उपचुनाव के दौरान उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था। हालांकि, बाद में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की समझाइश और आश्वासन के बाद उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया था।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

रोहित के पिता हितेंद्र मोहन शर्मा दौसा में मेडिकल स्टोर संचालित करते हैं। रोहित की पत्नी एक प्राइवेट स्कूल में शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं और उनका एक 7 साल का मासूम बेटा भी है। रोहित की अचानक हुई मौत से उनके हंसते-खेलते परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

Updated on:
02 Aug 2026 11:17 am
Published on:
02 Aug 2026 11:08 am