धमतरी

Pm Awas Yojana: धमतरी में 70 हितग्राहियों के 42 लाख रुपए अटके, फिर से टूटे घरों में रहने को मजबूर

Pradhan Mantri Awas Yojana: राशि नहीं मिलने के कारण कई परिवारों के घरों का निर्माण अधूरा रह गया है और उन्हें फिर से टूटे-फूटे पुराने मकानों में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।

2 min read
Jun 12, 2026
Pm Awas Yojana
पीएम आवास योजना के अधूरे मकान (photo Patika)

Chhattisgarh News: धमतरी में गरीबों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 धमतरी नगर निगम क्षेत्र में सुस्त रफ्तार और फंड की कमी से लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। समय पर किश्त नहीं मिलने से हितग्राही मकान निर्माण कार्य पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इससे हितग्राहियों को निगम का दफ्तर का चक्कर काटना पड़ रहा है। हितग्राहियों ने समय पर किश्त दिलाने की मांग निगम प्रशासन से की है।

Dhamtari News: 1100 से अधिक आवेदन मिले

पीएम आवास 2.0 योजना के तहत 747 आवासों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन 1100 से अधिक आवेदन मिलने के बाद 1072 हितग्राहियों को स्वीकृति प्रदान कर दी गई। इसके बावजूद अब तक केवल 77 मकानों का निर्माण ही पूर्ण हो सका है, जबकि 525 आवास निर्माणाधीन स्थिति में हैं। वहीं 119 प्रकरण अंतिम स्वीकृति के लिए शासन स्तर पर लंबित बताए जा रहे हैं।


हितग्राहियों को 6.85 करोड़ रुपये की राशि जारी

निगम प्रशासन अब तक हितग्राहियों को करीब 6.85 करोड़ रुपये की राशि जारी कर चुका है, लेकिन कई लाभार्थियों को अगली किस्त नहीं मिलने से निर्माण कार्य बीच में ही रुक गया है। स्थिति यह है कि कई परिवार अपने पुराने कच्चे मकान तोडक़र नए घर का निर्माण शुरू कर चुके थे, लेकिन समय पर राशि नहीं मिलने से वे अधूरे निर्माण के बीच रहने को मजबूर हैं। इधर नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि लंबित राशि के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। राशि स्वीकृत होते ही पात्र हितग्राहियों को भुगतान कर निर्माण कार्य में तेजी लाई जाएगी। हालांकि प्रभावित परिवारों को अब भी राहत का इंतजार है।

हितग्राही हो रहे परेशान

निगम पहुंचे रामकुमार साहू, आदित्य पटेल ने बताया कि किस्त मिलने की उम्मीद में उन्होंने कर्ज लेकर निर्माण कार्य शुरू कराया था। अब भुगतान में देरी से निर्माण कार्य ठप हो गया है, बल्कि उन्हें आर्थिक संकट का भी सामना करना पड़ रहा है। नगर निगम कार्यालय के लगातार चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें केवल यह आश्वासन मिल रहा है कि शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है और राशि प्राप्त होते ही भुगतान किया जाएगा। इधर लोगों का कहना है कि जब मूल लक्ष्य 747 आवासों का था, तब पर्याप्त बजट सुनिश्चित किए बिना 1072 आवासों को स्वीकृति क्यों दी गई। अधूरे पड़े मकानों के कारण कई परिवारों के सामने आवासीय संकट खड़ा हो गया है।

Published on:
12 Jun 2026 11:49 am