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इंदौर-दाहोद रेल प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार, सुरंग में लाइनिंग का काम पूरा

Indore-Dahod Rail Project : इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन परियोजना अपने अंतिम चरण में है। लाइनिंग का काम 100 फीसदी पूरा हो गया है। बैलास्टलेस ट्रैक बिछाने का काम तेज।
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Aug 06, 2026
Indore-Dahod Rail Project
Indore-Dahod Rail Project (इंदौर-दाहोद रेल प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार Photo Source- Patrika)

Dhar News : मालवा-निमाड़ को गुजरात से सीधे जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित इंदौर - दाहोद नई रेल लाइन परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। परियोजना की सबसे चुनौतीपूर्ण कड़ी मानी जाने वाली 2957 मीटर लंबी रेलवे सुरंग का लाइनिंग (कांक्रीट अस्तर) कार्य शत - प्रतिशत पूरा हो चुका है। अब सुरंग के भीतर बैलास्टलेस ट्रैक, ड्रेनेज सिस्टम, वेंटीलेशन और आधुनिक सुरक्षा सुविधाओं का निर्माण युद्धस्तर पर किया जा रहा है।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि, यह सुरंग न सिर्फ परियोजना की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धि है, बल्कि मध्य प्रदेश और गुजरात के बीच तेज, सुरक्षित और आधुनिक रेल संपर्क की मजबूत आधारशिला भी बनेगी।

सिर्फ दो कामों पर फोकस

Indore-Dahod Rail Project (इंदौर-दाहोद रेल प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार Photo Source- Patrika)

पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि, सुरंग की खुदाई के बाद सबसे महत्वपूर्ण लाइनिंग कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इससे सुरंग की मजबूती, दीर्घकालीक स्थायित्व और सुरक्षित संचालन सुनिश्चित होगा। अब निर्धारित समय सीमा में ट्रैक बिछाने और अन्य निर्माण कार्य पूरे करने पर विशेष फोकस किया जा रहा है।

आपात स्थिति में शरण स्थल तक बन सकेगी सुरंग

अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुरक्षा व्यवस्था रेलवे सुरंग को अत्याधुनिक सुरक्षा सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सुरंग के भीतर रिफ्यूजनिच (आपातकालीन शरण स्थल), रेस्क्यू शाफ्ट, वेंटिलेशन डक्ट और हेवी - ड्यूटी एग्जॉस्ट फैन लगाए जा रहे हैं।

अधिक सुरक्षित होगी यात्री सुरक्षा और रेल संचालन

वहीं जलभराव रोकने के लिए दोनों ओर साइड ड्रेन और इनवर्ट ड्रेन का अधिकांश निर्माण भी पूरा हो चुका है। इन व्यवस्थाओं से यात्रियों की सुरक्षा और रेल संचालन दोनों अधिक सुरक्षित होंगे। सुरंग के भीतर रेलवे अत्याधुनिक बैलास्टलेस ट्रैक तकनीक का उपयोग कर रहा है। इस तकनीक से ट्रैक का रखरखाव कम होगा और ट्रेनों की गति व सुरक्षा दोनों बेहतर होंगी।

युद्ध स्तर पर पूरा किया जा रहा काम

अब तक 1216 मीटर बैलास्टलेस ट्रैक बिछाया जा चुका है, जबकि 810 मीटर हिस्से में कार्य तेजी से जारी है। इसके अलावा पीसीसी की पहली लेयर का 2007 मीटर और अंतिम लेयर का 1470 मीटर कार्य पूरा हो चुका है। शेष 740 मीटर में निर्माण कार्य प्रगति पर है। कट एंड कवर सेक्शन में रिइनफोर्समेंट और लाइनिंग का कार्य भी पूर्ण कर लिया गया है। रेलवे निर्माण एजेंसियां सुरंग के शेष हिस्से में ड्रेनेज, बैकफिलिंग और अन्य सिविल कार्यों को आधुनिक मशीनों की मदद से तेजी से पूरा कर रही हैं।

Updated on:
06 Aug 2026 02:12 pm
Published on:
06 Aug 2026 02:12 pm