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Nag Panchami: नागदेव की पूजा में किन बातों का रखें ध्यान? तांबे के नाग का दान क्यों माना जाता है शुभ? ज्योतिषाचार्य से जानिए

Nag Panchami 2026:इस बार नागपंचमी सावन के तीसरे सोमवार पर पड़ रही है। यह संयोग पूजा को और खास बना रहा है। जानिए इसका धार्मिक महत्व, किन लोगों को मिलेगा विशेष लाभ और कौन-से उपाय शुभ माने गए हैं।
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Aug 06, 2026
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Nag Panchami Puja: ज्योतिषाचार्य से जानिए नागदेव की पूजा में किन बातों रखना है ध्यान (फोटो सोर्स- chatgpt)

Kaal Sarp Dosh Remedies: नागपंचमी (Nag Panchami) का पर्व 17 अगस्त को श्रावण माह के तीसरे सोमवार को पड़ने से विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व रहेगा। ज्योतिषाचार्य हिमांशु-हुकुमचंद जैन के अनुसार, श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी पर होने वाली नाग पूजा भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के साथ राहु-केतु और कालसर्प दोष (Kaal Sarp Dosh) से जुड़ी बाधाओं की शांति के लिए भी अत्यंत शुभ मानी जाती है। जिन लोगों की कुंडली में राहु-केतु की प्रतिकूल स्थिति, कालसर्प योग या राहु-केतु की महादशा चल रही हो, वे इस दिन नाग देवता का पूजन, शिवलिंग का जलाभिषेक और राहु-केतु शांति मंत्रों का जाप करें। तांबे के नाग का दान भी शुभ माना गया है।

सावन में नाग पूजा का खास महत्व

सावन माह भगवान शिव की आराधना के साथ नाग देवता की पूजा के लिए भी खास माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने नाग पूजा का विशेष महत्व रहता है।

प्रतीकात्मक रूप में करें नागदेवता का पूजन (Nag Panchami Puja)

नागपंचमी केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति और जीव-जंतुओं के संरक्षण का भी संदेश देती है। वर्षा ऋतु में सांप अपने बिलों से बाहर निकलते हैं, इसलिए उन्हें नुकसान पहुंचाने के बजाय उनकी रक्षा का संकल्प लेना चाहिए। जीवित सांपों को दूध पिलाने के बजाय प्रतीकात्मक रूप से नाग देवता की प्रतिमा पर दूध अर्पित करना ही शास्त्र सम्मत और वैज्ञानिक दृष्टि से उचित माना गया है।

चौरसिया दिवस मनेगा

नाग पंचमी पर चौरसिया समाज के लोग नाग बेल और पान की पूजा करते हैं। इस दिन को समाज की ओर से चौरसिया दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। वहीं चौरसिया समाज विकास संघ की ओर से नागपंचमी के मौके पर चल समारोह निकाला जाता है, इस बार भी तैयारियां की जा रही हैं।

देश के प्रमुख नाग देवता मंदिर

नागचंद्रेश्वर मंदिर (उज्जैन) : महाकालेश्वर मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित यह मंदिर साल में सिर्फ नाग पंचमी के दिन 24 घंटे के लिए खुलता है। इस दिन यहां बड़ी संख्या में आते है।

नागवासुकी मंदिर (प्रयागराज): मां गंगा के दरियागंज तट के पास स्थित इस प्राचीन मंदिर में नाग पंचमी पर बड़ा मेला लगता है और सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें होती हैं।

नागद्वार मंदिर (पचमढ़ी): सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच नाग पंचमी पर यहां कठिन पदयात्रा और मेले का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से लोग आते हैं।

कुक्के सुब्रह्मण्य मंदिर (दक्षिण कन्नड़): सर्प दोष निवारण और विशेष पूजा के लिए यह मंदिर देश भर में प्रसिद्ध है, नाग पंचमी पर यहां विशेष उत्सव होता है।

मन्नारशाला नागराज मंदिर (हरिपद): नाग राजा को समर्पित यह दक्षिण भारत का बहुत बड़ा सर्प मंदिर है, जहां पंचमी पर विशेष पारंपरिक अनुष्ठान होते हैं।

भुजंग नाग मंदिर (भुज): भुंजिया पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर में नाग पंचमी के अवसर पर स्थानीय मेला और भारी भीड़ देखने को मिलती है।

Updated on:
06 Aug 2026 10:45 am
Published on:
06 Aug 2026 10:45 am