
Raksha Bandhan 2026 Muhurat: भाई बहन के पवित्र प्रेम का पर्व रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। आमतौर पर इस पर्व पर भद्रा का साया भी रहता है, लेकिन इस बार यह पर्व बिना किसी विघ्न के मनाया जाएगा, दरअसल भद्रा एक दिन पहले 27 अगस्त को ही समाप्त हो जाएगी। 28 अगस्त को सूर्योदय के बाद तक पूर्णिमा रहेगी, साथ ही श्रवण नक्षत्र भी रहेगा, ऐसे में रक्षाबंधन के दिन सुबह से रात्रि तक पूरे दिन राखी बांधने के लिए शुभ रहेगा। पिछले पांच सालों में यह लगातार दूसरा वर्ष है, जब रक्षाबंधन के दिन भद्रा नहीं रहेगी। इसके पहले 2022 से 2024 तक रक्षाबंधन के दिन लगातार कभी सुबह से दोपहर तो कभी रात तक भद्रा की स्थिति रहती थी, इसलिए भद्रा समाप्ति तक राखी बांधने के लिए इंतजार करना पड़ा था, लेकिन इस बार एक दिन पहले ही भद्रा समाप्त होने के कारण पूरा दिन राखी बांधने के लिए शुभ रहेगा।
पं. रामनारायण आचार्य का कहना है कि भद्रा सूर्य देव की पुत्री और शनि की बहन है। जिसका वास पृथ्वी, पाताल और स्वर्ग में होता है। आमतौर पर पूर्णिमा पर भद्रा की स्थिति रहती है, इसलिए पूर्णिमा पर आने वाले पर्वो के दौरान अक्सर भद्रा की बाधा आती है और उसकी समाप्ति का इंतजार किया जाता है। जब भद्रा का वास पृथ्वी पर होता है उसे अशुभ माना जाता है, जबकि स्वर्ग और पाताल लोक में भद्रा का वास होने पर शुभकार्य किए जा सकते हैं। चूंकि रक्षाबंधन का पर्व भाई बहन के पकिा रिश्ते का पर्व है। इसलिए इस पर्व में भद्रा दोष मान्य किया जाता है, लेकिन इस बार भद्रा की स्थिति रक्षाबंधन के एक दिन पहले ही समाप्त हो जाएगी।
बीते कई सालों की तरह इस बार भी रक्षाबंधन को लेकर कई तरह के विरोधाभास चल रहे हैं। खासकर इंटरनेट पर इस दिन भद्रा का साया बताते हुए राखी बंधवाने पर रोक बताई जा रही है। ज्योतिषाचार्यों के अलग- अलग मत हैं। अंकशास्त्री डॉ. नीता मनीष अरोरा के अनुसार 28 अगस्त को प्रातः 9.48 तक पूर्णिमा तिथि है। श्रावण पूर्णिमा पर श्रावणी का महत्व होता है, जिसमें ब्रह्म मुहूर्त स्वीकार होता है। इस हेतु 28 को ही निर्विवाद रक्षाबंधन मनाया जाएगा। राखी बांधने का मुख्य शुभ मुहूर्त सुबह 5.57 बजे से सुबह 9.48 बजे (पूर्णिमा तिथि समाप्त होने) तक है।
गणेश धाम के गुरु सुधांशु नागर के अनुसार 28 को प्रातः 9.48 तक पूर्णिमा तिथि है। श्रावण पूर्णिमा पर श्रावणी का महत्व होता है, जिसमें ब्रह्म मुहूर्त स्वीकार होता है। इस हेतु 28 को ही निर्विवाद रक्षाबंधन मनाया जाएगा। बीते कई सालों की तरह इस बार भी रक्षाबंधन को लेकर कई तरह के विरोधाभास चल रहे हैं। खासकर इंटरनेट पर इस दिन भद्रा का साया बताते हुए राखी बंधवाने पर रोक बताई जा रही है। चूंकि इस दिन पूर्णिमा उदयकालीक रहेगी और श्रवण नक्षत्र भी रहेगा। इसलिए इस दिन रक्षाबंधन और श्रवणी पर्व मनाया जाएगा।
ज्योतिषाचार्य कान्हा जोशी के अनुसार दोपहर बाद बन रहे शुभ मुहूर्त में बहनें भाइयों को रक्षा सूत्र बांध सकती हैं। इस पर कोई दोष नहीं है।