
धौलपुर। करीब 17 साल पुराने हत्या के मामले में धौलपुर के विशिष्ट न्यायालय (डकैती प्रभावित क्षेत्र) ने फैसला सुनाते हुए लाल सिंह गुर्जर और पप्पू गुर्जर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोनों पूर्व दस्यु जगन गुर्जर के सगे भाई हैं। विशिष्ट न्यायाधीश राकेश गोयल ने मामले की सुनवाई के दौरान पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद दोनों को हत्या का दोषी माना। अदालत ने दोनों पर 5-5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
विशिष्ट लोक अभियोजक सतीश चंद्र शर्मा के अनुसार, हत्या की यह वारदात 22 अगस्त 2010 की रात हुई थी। लाल सिंह गुर्जर, पान सिंह गुर्जर और पप्पू गुर्जर निवासी विभूतिपुर हथियारों से लैस होकर पड़ोसी गांव कुदिन्ना पहुंचे थे। वहां पुरानी रंजिश के चलते आरोपियों ने संतोष नाम के युवक को अपने साथ लिया और गांव से कुछ दूरी पर ले गए। इसके बाद संतोष की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
वारदात के बाद मृतक संतोष के चाचा भूरा ने आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया था। पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच की और अनुसंधान पूरा होने के बाद मामला अदालत में पहुंचा। इसके बाद लंबे समय तक न्यायिक प्रक्रिया चली। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य पेश किए।
अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर लाल सिंह गुर्जर और पप्पू गुर्जर को हत्या का दोषी करार दिया। दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाने के साथ 5-5 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। मामले में पान सिंह गुर्जर का नाम भी वारदात में शामिल आरोपियों के तौर पर सामने आया था।
सजा पाने वाले लाल सिंह और पप्पू गुर्जर पूर्व दस्यु जगन गुर्जर के सगे भाई हैं। हाल ही में जगन गुर्जर की अजमेर स्थित हाई सिक्योरिटी जेल में हत्या का मामला सामने आया था। जगन गुर्जर की मौत के बाद उसके भाई पप्पू गुर्जर को दौसा जेल में शिफ्ट किया गया था।