डूंगरपुर

Dungarpur Fish : डूंगरपुर की ‘ऑर्गेनिक सुपरफूड’ मछलियों की दीवानी हुई दुनिया, मत्स्य विभाग व किसानों की पलटी किस्मत

Dungarpur Fish : डूंगरपुर जिले के सोमकमला बांध की मछलियां 'ऑर्गेनिक सुपरफूड' के रूप में दिल्ली, मुंबई और विदेशों के बड़े बाजारों तक निर्यात की जा रही हैं। बढ़ती मांग की वजह से डूंगरपुर के ​मत्स्य विभाग व मछुआरों की किस्मत पलट गई है। जानें सोमकमला बांध की मछलियां की इतनी डिमांड क्यों है?
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डूंगरपुर. जलाशय से पकड़ी मछलियां। फोटो पत्रिका

Dungarpur Fish : रसायनों के दौर में जब दुनिया शुद्ध खान-पान की ओर लौट रही है, डूंगरपुर जिले का सोमकमला बांध एक नई वैश्विक पहचान बना चुका है। यहां की मछलियां अब केवल स्थानीय आहार नहीं, बल्कि 'ऑर्गेनिक सुपरफूड' के रूप में दिल्ली, मुंबई और विदेशों के बड़े बाजारों तक निर्यात की जा रही हैं। प्राकृतिक वातावरण में पलने वाली इन मछलियों की बढ़ती मांग ने डूंगरपुर को मत्स्य पालन के क्षेत्र में एक 'ब्रांड' बना दिया है। इससे इलाके के ​मछुआरों की किस्मत पलट गई है।

इसलिए है ये खास

डूंगरपुर के सोमकमला बांध की सबसे बड़ी यूएसपी इसकी शुद्धता है। बांध के जलग्रहण क्षेत्र में कोई औद्योगिक गतिविधि नहीं होने के कारण पानी पूरी तरह स्वच्छ है। यहां मछलियों को बड़ा करने के लिए किसी भी प्रकार के कृत्रिम रसायन या एंटीबायोटिक का उपयोग नहीं होता, जिससे ये शत-प्रतिशत जैविक श्रेणी में आती हैं।

बांध के पानी में प्लैंकटन, प्राकृतिक शैवाल और जलीय पौधों की प्रचुरता है। मछलियां इन्हीं प्राकृतिक स्रोतों से अपना पोषण प्राप्त करती हैं। पर्याप्त सूर्य की रोशनी और स्वच्छ ऑक्सीजन युक्त जल के कारण ये मछलियां पोषक तत्वों और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होती हैं।

इसलिए बदल रही पसंद

पिछले कुछ वर्षों में कृत्रिम तालाबों में रसायनों के सहारे तैयार की गई मछलियों से उपभोक्ताओं का मोहभंग हुआ है। गुणवत्ता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग अब सोमकमला बांध जैसे प्राकृतिक जलाशयों की मछलियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। यही कारण है कि बड़े शहरों के न्यूट्रिशन विशेषज्ञ और दवा कंपनियां भी यहां की मछलियों की विशेष मांग कर रही हैं।

उल्लेखनीय है कि सोमकमला बांध पिछले पांच दशकों से मत्स्य उत्पादन में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। विभाग अब इसे और अधिक आधुनिक पैकेजिंग और बेहतर सप्लाई चेन से जोड़ने पर विचार कर रहा है, ताकि डूंगरपुर की इस ऑर्गेनिक मछली का लाभ स्थानीय मछुआरों को और अधिक मिल सके।

आंकड़ों का गणित

वार्षिक उत्पादन : 300 मीट्रिक टन।
राजस्व : प्रतिवर्ष करीब 1.50 करोड़ की आय।
प्रमुख प्रजातियां : कतला, रोहू और मृगल (मीठे पानी की सर्वश्रेष्ठ मछलियां)।
बाजार : फाइव स्टार होटल, दवा कंपनियां और विदेशी निर्यात।

ऑर्गेनिक श्रेणी में आती हैं ये मछलियां

सोमकमला बांध की रोहू, कतला और मृगल जैसी प्रजातियों की मांग दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में बहुत अधिक है। पूर्णतः प्राकृतिक वातावरण में पनपने के कारण ये ऑर्गेनिक श्रेणी में आती हैं, जिससे विभाग को शानदार राजस्व प्राप्त हो रहा है और जिले का नाम वैश्विक स्तर पर चमक रहा है।
डॉ. रवि पटेल, जिला मत्स्य अधिकारी, डूंगरपुर

Updated on:
29 Mar 2026 09:21 am
Published on:
29 Mar 2026 09:21 am