डूंगरपुर

Vatsalya Digi Kit : अब गर्भवती महिलाओं को तत्काल मिलेगी जांच रिपोर्ट, अमरीका के एनजीओ ने बढ़ाया हाथ

Vatsalya Digi Kit : डूंगरपुर में गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव के लिए अमरीकी संस्थान जापाईगो ने चिकित्सा विभाग और जिला प्रशासन से मिलकर वात्सल्य डिजी किट बनाया है। जानिए इस किट के फायदे।

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फाइल फोटो पत्रिका

Vatsalya Digi Kit : गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हुए सुरक्षित प्रसव के लिए अमरीकी संस्थान जापाईगो ने चिकित्सा विभाग और जिला प्रशासन से मिलकर वात्सल्य डिजी किट बनाया है। यह किट गर्भवती महिलाओं को तुरंत उसके स्वास्थ्य के परिक्षण में उपयोगी होगा। वहीं, उसकी मॉनिटरिंग एप के माध्यम से पूरे भारत में कही भी हो सकेंगी।

पायलट प्रोजे€क्ट के तहत डूंगरपुर में फिलहाल एएनएम को 12 और चिकित्सा संस्थान को 10 किट दिए हैं। इस किट को देने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब जांच रिपोर्ट के लिए लम्बा इंतजार करना नहीं पड़ेगा। दरअसल अमरीका की एनजीओ जापाईगो महिला और बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए पूरे भारत में कार्य कर रही है।

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इसी संस्थान की ओर से डूंगरपुर में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए कार्य करना शुरू किया। इसमें सबसे पहले उन्होंने प्रसव वॉच करने एक बायोलॉजिकल घड़ी का निर्माण किया है। इस आभासी घड़ी के माध्यम से महिला के गर्भधारण से प्रसव होने तक प्रतिदिन की शारीरिक स्थिति, स्वास्थ्य परिक्षण, जांच और आहार पर एक सारणी तैयार की गई।

इस सारणी को एएनएम के माध्यम से फील्ड में लागू किया। इस प्रसव वॉच के सकारात्मक परिणाम आने के बाद प्रदेश सरकार की ओर से चल रहे पीसीटीएस एप में इसे समायोजित कर दिया। इसके बाद एनजीओ की ओर से स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और राज्य सरकार के साथ अनुबंध करते हुए वात्सल्य डिजी किट पर काम करना शुरू किया है।

वात्सल्य डिजी किट

यह एक प्रकार का उपकरण का बैग है। इस बैग के सभी डिवाइस ब्लूटूथ से मोबाइल एप से जुड जाते हैं। बैग के अंदर वजन मापने के लिए इलेक्टॉनिक वेट मशीन, Žब्लडप्रेशर मॉनिटरिंग मशीन, ग्लूकोमीटर विथ स्ट्रीप, हिमोग्लोबिन मीटर विथ स्ट्रीप, पल्स ऑक्सीमीटर, तापमान मापने के लिए थर्मल गनऔर टोकोमीटर होता है। इन सभी को एक बैग में पैक करके दिया है।

ये होंगे किट के लाभ

फील्ड में कार्य करने वाली एएनएम को गर्भवती महिला के घर पर जाने पर उसका वजन, खून में हीमोग्लोबिन, शुगर, Žब्लडप्रेशर, तापमान और गर्भ की स्थिति की जांच करनी आवश्यक होती है। पहले इन सभी जांच के लिए एएनएम को सैम्पल एकत्रित करके जिला मुख्यालय पर भेजना पड़ता था। इसकी दो से तीन दिन में रिपोर्ट आने के बाद इलाज शुरू हो पाता था।
अक्सर प्रसव से पूर्व हिमोग्लोबिन का स्तर पता नहीं होने के कारण माता और उसके शिशु को खतरा बना रहता था। यह किट आने के बाद सभी प्रकार की जांच मौके पर हो जाती है।

वहीं, ब्लूटूथ से डिवाइस एप से जुडा होने के कारण चिकित्सा अधिकारी के पास गर्भवती महिला की स्वास्थ्य रिपोर्ट भी प्राप्त हो जाती है। ऐसे में रिस्क फै€क्टर वाली महिलाओं को तुरंत इलाज मिल जाता है। वहीं, गर्भवती महिला की पूरी कुंडली एप में होने के कारण वो देश के किसी भी शहर, गांव में पहुंच जाए डाक्टर पीसीटीएस से देखकर उसके स्वास्थ्य का स्टेटस पता लगा सकता है।

एएनएम को दिया प्रशिक्षण

जाईपेगो के जिला प्रभारी संजय पाठक ने बताया कि योजना में फिलहाल जिले की 450 एएनएम को प्रशिक्षण दिया है। प्रथम चरण में शुरुआती दौर में 12 एएनएम और 10 संस्थान को किट दिए गए हैं। प्रति सप्ताह विजिट में इसके सार्थक परिणाम आ रहे हैं। इसकी टेबलेट के माध्यम से मॉनिटरिंग की जा रही है।

जल्द ही वात्सल्य डिजी किट की संख्या में इजाफा किया जाएगा। इसके आने के बाद अब फिल्ड में एएनएम और स्वास्थ्यकर्मी अलग-अलग फॉर्म भरकर रजिस्टर रखने की जरूरत भी नहीं है। सारी जानकारी एप के माध्यम से पोर्टल पर अपलोड हो चुकी है।

आने लगे हैं सार्थक परिणाम

वात्सल्य डिजी किट के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की मॉनिटरिंग और मौके पर स्वास्थ्य जांच का लाभ मिल रहा है। पायलट प्रोजे€क्ट के रुप में फिलहाल 450 एएनएम को ट्रेनिंग देकर 22 किट के माध्यम से जांच की जा रही है। इसके सार्थक परिणाम भी आने लगे हैं। जल्द ही किट की संख्या बढ़ाकर स्वास्थ्य सेवा को बेहतर किया जाएगा।
डा. अलंकार गुप्ता, सीएमएचओ डूंगरपुर

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Published on:
02 Jan 2026 11:28 am
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