Rajasthan Panchayat Elections : राजस्थान में पंचायत चुनावों की आधिकारिक घोषणा में थोड़ी ही देर है। पर गांवों में सरपंच पद को लेकर सियासी माहौल गरमा चुका है। हर तरफ सिर्फ एक ही चर्चा है कौन बनेगा सरपंच? मौके की नजाकत को देखते हुए दावेदारों का भी व्यवहार कुछ बदला नजर आ रहा है।
Rajasthan Panchayat Elections : राजस्थान में पंचायती राज चुनावों की आधिकारिक घोषणा भले अभी शेष हो, लेकिन गांवों में विशेषकर सरपंच पद को लेकर सियासी माहौल गरमा चुका है। लंबे समय से लंबित चुनावों की घोषणा पर सबकी निगाहें टिकी हैं। संभावित दावेदारों ने चुनावी रण की तैयारी शुरू कर दी है।
चौपालों, खेत-खलिहानों, चौराहों की थड़ियों से लेकर मोबाइल स्क्रीन तक “अबकी बार सरपंच कौन” की चर्चाएं आम हो गई हैं। सोशल मीडिया पर संभावित प्रत्याशी अपने पुराने विकास कार्यों की तस्वीरें साझा कर रहे हैं। वहीं, नए दावेदार पूर्व प्रतिनिधियों की कमियां गिनाकर बदलाव का दावा कर रहे हैं। डिजिटल टोली भी इस बार चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बन गई है।
जिन प्रतिनिधियों से पहले मिलना कठिन माना जाता था, वे अब गली-मोहल्लों में सक्रिय नजर आ रहे हैं। लोगों को सम्मानपूर्वक संबोधित करना, बीमारों का हालचाल पूछना और समस्याओं के त्वरित समाधान का आश्वासन देना आम हो गया है।
फेसबुक, व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर चुनावी सक्रियता चरम पर है। संभावित प्रत्याशी अपने कार्यों और योजनाओं का ब्यौरा देकर समर्थन जुटाने में लगे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जर्जर सड़कें, अधूरी नालियां, गंदगी, सार्वजनिक शौचालयों की कमी, पेयजल संकट जैसे मुद्दे अब चुनावी एजेंडे में प्रमुखता से शामिल हो गए हैं। युवाओं के लिए निःशुल्क डिजिटल लाइब्रेरी, स्ट्रीट लाइट, सीसीटीवी कैमरे, एनीकट व चबूतरा निर्माण जैसे वादों की झड़ी लगाई जा रही है।
संभावित दावेदार सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभा रहे हैं। सामूहिक भोज, छोटी बैठकों, शोक सभाओं, जन्मदिन समारोहों और मंदिर आयोजनों में उनकी मौजूदगी बढ़ गई है। कई दावेदार मानकर चल रहे हैं कि सीट महिला या पुरुष किसी के लिए भी आरक्षित हो सकती है, इसलिए पति-पत्नी दोनों की सक्रियता बढ़ाई जा रही है।
आगामी होली पर्व पर स्नेह मिलन व ढूंढोत्सव जैसे आयोजनों में चुनावी रंग और गहरा होगा। बाहर रोजगार कर रहे लोग भी त्योहार पर गांव आएंगे, ऐसे में दावेदारों की सक्रियता और बढ़ने की संभावना है।
दीपावली, नववर्ष और होली की शुभकामनाओं के बैनर-पोस्टर में पति-पत्नी दोनों की तस्वीरें लगाई जा रही हैं, ताकि आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होते ही प्रत्याशी के अनुसार प्रचार सामग्री बदली जा सके।
कुल मिलाकर, आधिकारिक घोषणा से पहले ही बनकोड़ा में सरपंच चुनाव की बिसात बिछ चुकी है और गांव का राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है।