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RTE Update : शिक्षा के अधिकार के तहत निजी विद्यालयों की नि:शुल्क सीटों पर प्रवेश के लिए टाइम फ्रेम जारी होने के साथ ही प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। गत वर्ष हुई पंचायत पुनर्गठन की प्रक्रिया ने नि:शुल्क सीटों की राह में उलझन बढ़ा दी है। प्रावधान के मुताबिक नि:शुल्क सीटों पर वार्ड के विद्यार्थियों को वरीयता मिलती है। पर, पंचायत पुनर्गठन के बाद कई वार्डों का खाका बदला है। ऐसे में अब वार्ड बदलाव की स्थिति में अभिभावकों को अतिरिक्त दस्तावेज बनाकर अपलोड करना होंगे।
निजी विद्यालयों की 25 फीसदी सीट नि:शुल्क होती है और इसकी राशि का पुनर्भरण सरकार की ओर से किया जाता है। विद्यार्थी का प्रवेश होने पर वह 12वीं तक नि:शुल्क अध्ययन होता है। आरटीई के तहत प्रवेशित बच्चों को निजी स्कूल सेफ सीट मानते हैं तथा पूरा कोटा भरवाने के प्रयास करते हैं।
जिले सहित प्रदेश में पंचायत पुनर्गठन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद गजट नोटिफिकेशन जारी हो गया है। इसके तहत बांसवाड़ा जिले में 132 नई ग्राम पंचायतों के साथ ही अब ग्राम पंचायतों की संख्या बढक़र 547 हो गई हैं। वहीं, प्रदेश में 3416 नई पंचायतों का गठन हुआ है।
कई घरों एवं स्कूलों के वार्ड क्रमांक बदल गए हैं तथा शैक्षिक एवं पहचान संबंधित दस्तावेजों में भी पते आदि अपडेट नहीं हुए हैं। ऐसे में अभिभावकों को यह चिंता सता रही है कि कहीं थोड़ी सी चूक से उनके बच्चे का आवेदन अस्वीकृत नहीं हो जाए।
विद्यार्थी के प्रवेश से संबंधित मूल आधार बालक या अभिभावक का तहसीलदार द्वारा मूल निवास प्रमाण पत्र मान्य है। इसके साथ ही वैधानिक दस्तावेजों में राशन कार्ड, आधार कार्ड, वोटरआईडी, ड्राइविंग लाइसेेंस, बिजली बिल दिए जा सकते हैं।
पर, पंचायत या वार्ड परिसीमन के कारण वार्ड में बदलाव होने की स्थिति में अभिभावकों को सरपंच, वार्ड पंच, पार्षद, बीएलओ अथवा किसी राजपत्रित अधिकारी से प्रमाणित अतिरिक्त दस्तावेज देना होगा। इसके लिए आरटीई की निर्देशिका में परिशिष्ट पांच संलग्न किया है।
1- अभिभावक की वार्षिक आय 2.50 लाख रुपए तक होने का प्रमाण-पत्र
2- बच्चे की आयु संबंधी दस्तावेज
3- जाति प्रमाण-पत्र
4- दिव्यांगता का प्रमाण पत्र
5- बीपीएल कार्ड, निवास संबंधी प्रमाण-पत्र, आधार, जनाधार आदि।
पंचायत पुनर्गठन से पते, वार्ड, ग्राम पंचायत आदि बदल गए हैं। पर, दस्तावेज अभी पुराने ही चल रहे हैं। ऐसे में नि:शुल्क सीटों पर दाखिले में समस्या आ रही है। गाइडलाइन में अतिरिक्त दस्तावेज संलग्न करना बताया है। पर, संगठन ने सुझाव दिया है कि नि:शुल्क सीटों के लिए कैचमेंट एरिये के प्रावधान को बदल कर एक जिले को आधार बनाएं। इससे सभी समस्याओं का समाधान हो जाएगा।
तरुण त्रिवेदी, अध्यक्ष, निजी शिक्षण संस्थान, बांसवाड़ा
Updated on:
23 Feb 2026 09:13 am
Published on:
23 Feb 2026 09:13 am
