
मावजी महाराज के चौपड़ा, जो वागड़ी का आद्यग्रंथ माना जाता है। फोटो पत्रिका
International Mother Language Day : आज अंतरराष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस है। वागड़ सहित गुजरात और मालवा के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में मिश्री सी मीठी और अपनेपन का अहसास कराती वागड़ी बोलते हैं। अब तो वागड़ी में युवा और इंफ्लूएंसर सोशल मीडिया कंटेंट भी बना रहे हैं, जिससे इसकी लोकप्रियता और बढ़ी है। इसे बोलने व लिखने वालों की संख्या बढ़ रही है।
नई शिक्षा नीति में प्री-प्राइमरी एजुकेशन मातृभाषा में ही करवाने के प्रावधानों ने इसे नई संजीवनी दी है। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर हमारी वागड़ी भाषा पर खास रिपोर्ट…
राजस्थान : डूंगरपुर, बांसवाड़ा और उदयपुर जिलों के कुछ क्षेत्र।
गुजरात : दाहोद और पंचमहल के कुछ क्षेत्र में।
मध्यप्रदेश : कुछ सीमावर्ती क्षेत्र।
(वागड़ी बोलने वाले लोग मुंबई, सूरत, बड़ौदा के साथ ही विदेशों में यूएसए, दुबई, कुवैत आदि खाड़ी देशों में भी हैं।)
वागड़ी बोली के प्रमुख लेखक एवं साहित्यकार दिनेश पंचाल बताते हैं कि वागड़ी बोली की उत्पत्ति का कोई स्पष्ट उल्लेख तो नहीं मिलता है। वमासा के वरिष्ठ साहित्यकार एवं लेखक तथा वागड़ी बोली पर शोधकर्ता प्रो.एलडी जोशी के शोध में वागड़ी की बोली के उद्गम अपभ्रंश से बताया है।
गुजराती के साथ इसका निकट संबंध हैं तथा भीली और गुजराती के बीच यह वागड़ी सेतु का काम करती है। यदि वागड़ी के आद्यकवियों में मावजी महाराज, गवरी बाई एवं संत दुर्लभजी आते हैं, जिनके पद्य आज भी गाए और सुने जाते हैं। पहली वागड़ी गद्य पुस्तक ‘वात नू वतेसर’ बृजलाल भाणावत ने लिखी है। वरदा के अर्जुनलाल कुमुद ने पहला वागड़ी शब्दकोष लिखा है।
गवरी गीत : पारंपरिक नृत्य-नाटिका है, जो वर्षा ऋतु में भगवान शिव की आराधना के रूप में की जाती है।
गैर नृत्य गीत : होली और अन्य पर्वों पर समूह में गाए जाने वाले उत्साहपूर्ण गीत।
हलमा गीत : हलमा सामूहिक श्रम की परंपरा है। इस दौरान प्रेरणा और एकता के गीत गाए जाते हैं।
भगोरिया गीत : भगोरिया मेले के अवसर पर गाए जाने वाले प्रेम और मिलन के गीत।
1- 44 बाल पुस्तिकाओं का वागड़ी में अनुदान हुआ तथा यह मां-बाड़ी केन्द्रों में पढ़ाई जा रही है।
2- राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी बीकानेर द्वारा मीनाक्षी बोराणा के संपादन में वागड़ विशेषांक निकला। वागड़ी बोली के बूते ही कई साहित्यकार साहित्य अकादमियों से पुरस्कृत हुए हैं। इनमें डाॅ. ज्योतिपूंज सूर्यमल्ल मिश्रण शिखर पुरस्कार, उपेन्द्र अणु सर्वोच्च अनुवाद पुरस्कार, दिनेश पंचाल सर्वोच्च पुरस्कार, भोगीलाल पाटीदार बाल साहित्य का सर्वोच्च पुरस्कार एवं शरदचन्द्र पण्ड्या आगीवाण पुरस्कार से नवाजे गए हैं।
1- मौजूदा दौर में वागड़ी बोली को प्रोत्साहित करने के ध्येय से साहित्यकार उपेन्द्र अणु के निर्देशन एवं दिनेश प्रजापति के संयोजन में यहां वागड़ी कार्यशालाएं भी हो रही हैं। इसमें वागड़ी के लेखन, व्याकरण आदि पर अनुसंधान किया रहा है।
2- डाॅ. सतीश आचार्य, हरीश आचार्य, घनश्याम प्यासा, रामचन्द्र पंचाल, सूर्यकरण सोनी, कैलाश गिरी, मोहनदास वैष्णव, डा. जनार्दन जलज, छत्रपाल शिवाजी, भरतराज ब्रह्मचारी, सुरेश सरगम, दिनेश पंछी, गोपाल सेवक, महेश देव, संजय आमेटा, सारिका भुवन, बृजमोहन तूफान, रमण पाटीदार, आदि अपनी रचनाओं से वागड़ी का मान बढ़ा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर पिछले कुछ समय से कई कंटेट क्रिएटर्स वागड़ी बोली के जरिये फॉलोअर बढ़ा रहे हैं। अब लाखों व्यूवर्स वागड़ी में कंटेंट पसंद कर रहे हैं। लोग वागड़ी में बनी रील्स खूब शेयर भी करते हैं। अरविंद अहारी, विक्की कोटेड, चिन्मय लखारा, मेहूल चौबीसा, नीलम जोशी, दिनेश दबंग आदि वागड़ी आदि प्रमुख हैं।
Updated on:
21 Feb 2026 09:35 am
Published on:
21 Feb 2026 09:26 am
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