कर्नाटक चुनाव से पहले केंद्र की मोदी सरकार जीएसटी बैठक के जरिए आम लोगों को कई राहत दे सकती है। इसमें पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती प्रमुख है।
नई दिल्ली। कर्नाटक में 12 मई को विधानसभा का चुनाव होना है। एक चरण में होने वाले इस चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया खत्म हो चुकी है। नामांकन के बाद सभी दलों के प्रत्याशी चुनाव प्रचार में जुट गए हैं। प्रदेश में मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ पार्टी कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच है। कांग्रेस की ओर से पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी एक चरण का चुनाव प्रचार कर चुके हैं। वहीं भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चुनाव प्रचार में उतर चुके हैं। मंगलवार को पीएम मोदी ने कर्नाटक के चामराजनगर में जनसभा की। भाजपा कर्नाटक चुनाव में पूरी ताकत झोंक रही है। इसके लिए पीएम से लेकर पार्टी के कई बड़े नेता कर्नाटक में कैंप कर रहे हैं। कर्नाटक चुनाव के बीच वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) काउंसिल की बैठक होने जा रही है। कई राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कर्नाटक चुनाव से पहले केंद्र की मोदी सरकार इस जीएसटी बैठक के जरिए आम लोगों को कई राहत दे सकती है। इसमें पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती प्रमुख है। सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में शामिल करने का प्रस्ताव आ सकता है। यदि जीएसटी काउंसिल इस प्रस्ताव पर मुहर लगा देती है तो आम लोगों को सस्ते पेट्रोल-डीजल की सौगात मिल सकती है।
आम जनता से सीधे जुड़ा है पेट्रोल-डीजल का मुद्दा
इस समय पेट्रोल डीजल के दाम मोदी सरकार के कार्यकाल में अपने उच्च स्तर पर चल रहे हैं। यह हालात तब हैं जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें तत्कालीन मनमोहन सरकार के कार्यकाल के मुकाबले निम्न स्तर पर हैं। इससे जनता में मोदी सरकार के खिलाफ माहौल है। डीजल-पेट्रोल का मुद्दा सीधे आम लोगों से जुड़ा है। देशभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों के खिलाफ गुस्से को देखते हुए पीएमओ सक्रिय हो गया है। सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने के प्रस्ताव को लेकर तैयारी पूरी हो गई हैं। खुद पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी कई बार पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की बात कह चुके हैं।
राज्य कर रहे विरोध
केंद्र सरकार की ओर से एक देश, एक कर की अवधारणा से लागू किए गए जीएसटी में अभी कई वस्तुएं शामिल नहीं हैं। इसमें पेट्रोल-डीजल प्रमुख वस्तु हैं। सीधे आम लोगों से जुड़े होने के कारण केद्र सरकार पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने के लिए तैयार है लेकि कई राज्य इसका विरोध कर रहे हैं। राज्यों का कहना है कि यदि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है तो उनकी कमाई पर असर पड़ेगा। आपको बता दें कि पेट्रोल-डीजल पर केंद्रीय करों के अलावा राज्य भी कई प्रकार के कर लगाते हैं। इससे उनकी कमाई अधिक होती है। यदि पेट्रोल-डीजल जीएसटी के दायरे में आते हैं तो राज्यों को होने वाली अतिरिक्त कमाई बंद हो जाएगी।