Akansh JEE Main Success Story: अक्सर स्टूडेंट्स बोर्ड एग्जाम और जेईई के बीच उलझ जाते हैं लेकिन, एकांश ने CBSE 12th में 96 परसेंट के साथ दोनों में बाजी मार ली। जानिए कैसे एनसीईआरटी और स्कूल के सही सपोर्ट से एकांश मे यह मुकाम हासिल किए।
JEE Main Success Story: बारहवीं बोर्ड परीक्षा और इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम (जेईई) की एक साथ तैयारी करना स्टूडेंट्स के लिए आसान नहीं होता है। लेकिन एकांश ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर इसे मुमकिन कर दिखाया। एकांश ने सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा में 96 परसेंट अंक हासिल किए हैं और इसके साथ ही जेईई मेन परीक्षा भी पास कर ली। अब उनका अगला लक्ष्य जेईई एडवांस्ड क्रैक करना है।
एकांश ने अपनी दो साल की तैयारी के बारे में बात करते हुए बताया कि, ग्यारहवीं और बारहवीं क्लास के दौरान मेरा पूरा फोकस जेईई की तैयारी पर ही था। आगे उन्होंने बताया कि, उन्होंने शुरुआत में अलग से सीबीएसई बोर्ड पर ध्यान नहीं दिया लेकिन उनके स्कूल ने इस पूरे सफर में उनकी बहुत मदद की। वह साउथ सिटी के एक कोचिंग सेंटर में पढ़ते थे। उनका रोज का रूटीन था कि वह पहले स्कूल जाते थे और फिर हफ्ते में चार दिन शाम को कोचिंग क्लास अटेंड करते थे।
एकांश का मानना है कि उनकी सफलता का सबसे बड़ा कारण लगातार पढ़ाई करना यानी कंसिस्टेंसी है। उन्होंने कहा कि, मैंने हर दिन तय घंटों तक पढ़ाई की। ऐसा एक भी दिन नहीं था जब मैंने पढ़ाई बिल्कुल छोड़ दी हो। जिस दिन मेरा पढ़ने का मन नहीं होता था उस दिन भी मैं थोड़ा बहुत जरूर पढ़ता था।
एकांश के मुताबिक, जेईई और सीबीएसई बोर्ड की तैयारी लगभग एक-दूसरे से काफी हद तक जुड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि, जेईई बोर्ड परीक्षा से बस एक कदम ऊपर है। जेईई को सही तरीके से क्रैक करने के लिए आपके बेसिक क्लियर होने चाहिए और इसकी शुरुआत एनसीईआरटी किताबों से होती है।
उन्होंने खास तौर पर केमिस्ट्री के लिए एनसीईआरटी को अपनी तैयारी का आधार बनाया। एकांश ने कहा कि, वह अपनी केमिस्ट्री की एनसीईआरटी किताब करीब 20 बार पढ़ चुके हैं लेकिन फिर भी उन्हें लगता है कि अभी बहुत कुछ याद करना बाकी है।
एकांश ने अपनी सफलता का श्रेय अपने स्कूल के शिक्षकों और प्रशासन को भी दिया। उन्होंने बताया कि उनके स्कूल ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को दोपहर 1 बजे घर जाने की अनुमति दे दी थी ताकि वे सेल्फ स्टडी और कोचिंग पर ध्यान दे सकें। उन्होंने कहा कि अगर स्कूल हमें जल्दी जाने की अनुमति नहीं देता तो शायद मैं इतने अच्छे से पढ़ाई मैनेज नहीं कर पाता और शाम तक बहुत थक जाता।
बाकी स्टूडेंट्स की तरह एकांश को भी तैयारी के दौरान कई बार निराशा का सामना करना पड़ा। खास तौर पर जब मॉक टेस्ट में उनके नंबर कम आते थे। उन्होंने बताया कि, कई बार टेस्ट में कम नंबर आने से वह काफी डिमोटिवेट हो जाते थे लेकिन उनके परिवार, दोस्तों और शिक्षकों ने हमेशा उनका साथ दिया और उनका हौसला बढ़ाया। फिलहाल एकांश का पूरा ध्यान जेईई एडवांस्ड की परीक्षा पर है।