पांज राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय निर्वाचन आयोग ने शनिवार को अहम बैठक की। इस बैठक में एक बार फिर रैली और रोड शो पर लगे प्रतिबंध को आगे बढ़ा दिया है। कोरोना के बढ़ते मामलों के चलते आयोग ने ये फैसला लिया है।
पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव में प्रचार के लिए की जाने वाली रैली और रोड शो को लेकर अभी राजनीतिक दलों को इंतजार करना होगा। दरअसल भारत निर्वाचन आयोग ने विधानसभा चुनावों को लेकर शनिवार को एक बैठक की। इस बैठक में चुनावी रैली, रोड शो, जुलूस पर पाबंदी जारी रखने का बड़ा फैसला लिया गया है। ये फैसला कोरोना मामलों के लगातार बढ़ने के चलते लिया गया है। इसके तहत फिजिकल रैलियां, रोड शो और जुलूसों पर फिलहाल पाबंदियां जारी रहेंगी। आयोग की इस बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त के अलावा सभी आयुक्त और उपायुक्त भी शामिल हुए थे। इसके अतिरिक्त पांचों राज्यों के मुख्य निर्वाचन आयुक्तों ने भी आयोग की बैठक में हिस्सा लिया।
चुनाव आयोग की इस बैठक में पांचों राज्यों के केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव और मुख्य स्वास्थ्य सचिव वर्चुअल रूप से शामिल हुए। बैठक में कोरोना के हालात पर समीक्षा की गई, जिसके बाद चुनावी रैली पर पाबंदी को बढ़ाने का फैसला लिया गया। माना जा रहा है कि ये पाबंदी फिलहाल एक हफ्ते के लिए आगे बढ़ाई गई है। एक हफ्ते बाद इसको लेकर दोबारा बैठक होगी।
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हालांकि इस बार चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को पहले से ज्यादा छूट दी है। प्रचार के दूसरे तरीकों में कुछ छूट दी गई है। पहले चरण का चुनाव प्रचार पिछले चुनावों की तरह अगर 72 घंटे पहले ही बंद होगा तो उससे संभवत: हफ्ते भर पहले छूट मिल सकती है।
बताया जा रहा है कि मणिपुर में टीकाकरण की सुस्त रफ्तार से आयोग असंतुष्ट है। वहीं पंजाब में भी टीकाकरण की रफ्तार बढ़ी तो है, लेकिन लक्ष्य तक पहुंचने में वक्त लगेगा। हालांकि गोवा, उत्तराखंड और यूपी में टीकाकरण और संक्रमण दोनों में काफी सुधार किया है।
मणिपुर में उग्रवादियों को वोट की इजाजत
मणिपुर में होने वाले चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत उग्रवादियों को भी वोट डालने की इजाजत दी गई है। आयोग ने मणिपुर के उग्रवादी गुटों को विधानसभा चुनाव में पोस्टल बैलेट के जरिए वोट करने की मंजूरी दी है। बता दें कि ये वो उग्रवादी हैं, जिन्होंने सरकार से सीजफायर का समझौता किया है।
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इन उग्रवादियों के नाम वोटर लिस्ट में शामिल हैं। हालांकि चुनाव आयोग ने इनके वोटिंग को लेकर कई शर्ते भी रखी हैं। आयोग के निर्देश के मुताबिक इन मतदाताओं को उनके मताधिकार के इस्तेमाल को ध्यान में रखते हुए पोस्टल बैलेट से वोटिंग करने की अनुमति दी जाएगी, क्योंकि इन्हें कैंप्स से बाहर नहीं लाया जा सकता है।