
Chiraiya Marital Rape Scene: हाल ही में रिलीज हुई दिव्या दत्ता की वेबसीरीज 'चिरैया' की थीम, मेरिटल रेप (वैवाहिक बलात्कार) और भारत में इसे आपराधिक अपराध क्यों नहीं माना जाता, के बारे में बात कर रही है। यह सीरीज बंद दरवाजों के पीछे घटी घटनाओं को दर्शाती है जिसमें साफ तौर पर दिखाया गया है कि मेरिटल रेप न केवल बॉउंड्रीज को तोड़ता है, बल्कि एक औरत की सुरक्षा, पहचान और मानसिक स्वास्थ्य को भी अंदर तक खोखला कर सकता है।
चिरैया सीरीज के कुछ सीन्स ऐसे हैं जो आपको अंदर तक झकझोर कर रख देंगे। जैसे सुहागरात पर पत्नी की इच्छा के विरुद्ध उसके साथ जबरदस्ती (मैरिटल रेप) करने वाला सीन और शादी के बाद हनीमून पर होटल के कमरे में पत्नी के साथ बर्बरता वाला सीन। जानकारी के लिए बता दें कि इस सीरीज के मुख्य किरदार सुकुमार भरमार (संजय मिश्रा), कमलेश (दिव्या दत्ता), अरुण (सिद्धार्थ शॉ), पूजा (प्रसन्ना बिष्ट), विनय (फैजल रशीद) हैं। हाल ही में फिल्मीज्ञान को दिए इंटरव्यू में सिद्धार्थ शॉ और प्रसन्ना बिष्ट ने सुहागरात और हनीमून वाले सीन पर बात की और बताया कि कैसे सुहागरात वाला सीन शूट करते हुए वो फूट-फूट कर रोने लगे थे।
इंटरव्यू के दौरान जब सिद्धार्थ से पूछा गया कि सुहागरात वाले सीन के दौरान आपके क्या इमोशंस थे? इस पर उन्होंने कहा, 'जब मैंने और प्रसन्ना ने उस सीन का पहला टेक किया, तो मैं रोने लगा। उस वक्त मेरे अंदर क्या चल रहा था, मैं आज तक समझ नहीं पाया। ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरी आत्मा को छू लिया हो या उसे गंदा कर दिया हो।' इसके आगे उन्होंने कहा कि हमें पता था कि यह सिर्फ एक्टिंग है, लेकिन एक इंसान के तौर पर उस पल जो महसूस हुआ, वह बहुत गहरा था। यहां तक कि जब हमने पहली बार सीरीज देखी, तब भी मेरा फर्स्ट रिएक्शन रोना ही था।' इस पर प्रसन्ना ने कहा, 'वह सच में रोने लगा था, कांपने लगा था। हमें शूटिंग रोकनी पड़ी ताकि वह थोड़ा संभल सके।'
6 एपिसोड की 'चिरैया' वेबसीरीज को आप जियोहॉटस्टार पर देख सकते हैं। यह सीरीज कमलेश के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक आदर्श बहू है। उसकी जिंदगी में तब संघर्ष शुरू हो जाता है जब उसकी नई देवरानी, पूजा खुलासा करती है कि उसका पति अरुण उसका यौन शोषण कर रहा है। वैवाहिक बलात्कार की समस्या यह है कि इसे साबित करना बहुत मुश्किल होता है और सब कुछ ऊपर से ठीक लगता है, लेकिन बंद दरवाजों के पीछे क्या होता है, यह कोई नहीं जान पाता। चिरैया दिखाती है कि कैसे दशकों से चली आ रही सामाजिक रूढ़िवादिता वैवाहिक बलात्कार को सामान्य बना देती है।