
Prasanna Bisht On Chiraiya Propanganda Controversy (सोर्स- एक्स )
Prasanna Bisht On Chiraiya Propanganda Controversy: हाल ही में रिलीज हुई वेब सीरीज 'चिरैया' इन दिनों सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा का विषय बनी हुई है। इस सीरीज में शादीशुदा रिश्तों में सहमति और महिलाओं की गरिमा जैसे संवेदनशील मुद्दों को उठाया गया है। जहां एक तरफ कई दर्शक इस कहानी को साहसिक और जरूरी कोशिश बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों ने इसे ‘एंटी-मेन प्रोपेगेंडा’ यानी पुरुषों के खिलाफ प्रोपेगेंडा कहकर आलोचना भी शुरू कर दी है। अब इस विवाद पर सीरीज में अहम भूमिका निभाने वाली अभिनेत्री प्रसन्ना बिष्ट ने खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
प्रसन्ना बिष्ट ने साफ शब्दों में कहा कि समाज को बदलती सोच को स्वीकार करने की जरूरत है। उनके अनुसार 'चिरैया' का मकसद किसी के खिलाफ माहौल बनाना नहीं, बल्कि यह समझाना है कि किसी भी रिश्ते में सहमति का क्या महत्व होता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई इस विषय को प्रोपेगेंडा मानता है, तो ये एक दुखद और सोचने वाली बात है।
उनका मानना है कि समय के साथ प्रकृति, मौसम और समाज सब बदलते हैं, इसलिए सोच भी बदलनी चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि बिना पूरी कहानी समझे किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है।
सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स द्वारा ये दावा किया गया कि सीरीज में शादीशुदा महिलाओं के साथ होने वाले अत्याचार से जुड़े प्रतिशत बताए गए हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रसन्ना ने कहा कि ऐसे किसी आंकड़े का उल्लेख शो में नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि दर्शकों को पहले पूरी सीरीज देखनी चाहिए, उसके बाद ही राय बनानी चाहिए।
उनके मुताबिक आज के समय में बिना पूरी जानकारी के राय बनाना एक आम प्रवृत्ति बन चुकी है, जो कई बार गलतफहमी पैदा कर देती है।
अपने किरदार को लेकर पूछे गए सवाल पर प्रसन्ना बिष्ट ने बेहद साहसिक जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जब समाज में कई लड़कियां कम उम्र में ही उत्पीड़न का सामना करती हैं, तो ऐसे मुद्दों पर आवाज उठाने के लिए उम्र को बाधा नहीं बनना चाहिए।
उन्होंने ये भी स्वीकार किया कि इस तरह की भूमिका निभाना सिर्फ अभिनय नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी थी। उनके अनुसार कई महिलाएं निजी अनुभवों के कारण तुरंत आवाज नहीं उठा पातीं, क्योंकि रिश्तों और सामाजिक दबाव का असर उनके फैसलों पर पड़ता है।
प्रसन्ना बिष्ट ने ये भी कहा कि शो को केवल एक नजरिए से देखना सही नहीं है। उन्होंने बताया कि सीरीज में ऐसे पुरुष किरदार भी दिखाए गए हैं जो महिलाओं का समर्थन करते हैं और सम्मान की भावना रखते हैं। लेकिन दुर्भाग्य से लोग केवल नकारात्मक पहलू पर ही ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
उनका मानना है कि समाज को संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर चर्चा करनी चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर माहौल तैयार किया जा सके। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह की कहानियां दर्शकों को सोचने पर मजबूर करेंगी और सकारात्मक बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाएंगी।
Updated on:
02 Apr 2026 01:56 pm
Published on:
02 Apr 2026 01:55 pm
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