Ella D Verma Transition Journey: सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर एला डी वर्मा ने जेंडर ट्रांजिशन के बाद के अपने दर्द पर खुलकर बात की है। उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि उनके इस सफर में उनकी फैमिली ने पूरी तरह से सपोर्ट किया। इसके साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि सोसाइटी से पहले खुद को खुद को स्वीकार करना सबसे बड़ी चुनौती होती है।
Ella D Verma Transition Journey: एला डी'वर्मा, एक भारतीय कंटेंट क्रिएटर, मॉडल और डिजिटल पर्सनैलिटी हैं, जो अपनी जेंडर ट्रांजिशन जर्नी और बेबाक विचारों के लिए जानी जाती हैं। एला ने हाल ही में एक इंटरव्यू में बताया कि जेंडर ट्रांजिशन के बाद उन्हें आजादी तो मिली, लेकिन उनको वो खुशी नहीं मिली जिसकी उनको उम्मीद थी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अपने सपने पूरे करने के बाद भी उनके पुराने दर्द और जख्म फिर से सामने आ गए। इसके अलावा उन्होंने अपने परिवार के साथ की तारीफ करते हुए इस बात को भी माना कि सोसाइटी की स्वीकृति पाने से भी ज्यादा कठिन उनके लिए खुद को पूरी तरह स्वीकार करना सबसे मुश्किल रहा।
इसके आगे एला डी' वर्मा ने FPJ से बात करते हुए बताया कि उनके लिए अपनी असली पहचान तक पहुंचने का सफर सिर्फ नाम या पहचान बदलने तक सीमित नहीं था। यह उनके लिए खुद को समझने का एक बहुत ही निजी और कई बार दर्दभरा अनुभव रहा। देव वर्मा के रूप में जन्मीं एला के लिए यह बदलाव उनकी जिंदगी का बड़ा मोड़ था। लड़के से लड़की बनने के इस सफर ने उन्हें एक तरफ आज़ादी दी, लेकिन साथ ही कुछ अनदेखा भावनात्मक बोझ भी दे दिया। जहां कई लोग जेंडर चेंज कराने को आखिरी पड़ाव मानते हैं, वहीं एला की कहानी इस धारणा को चुनौती देती है। उन्होंने बताया कि हिम्मत और बदलाव के पीछे एक शांत लेकिन जटिल सच्चाई छिपी होती है, एक ऐसी सच्चाई, जहां हर बार बदलाव के साथ मन का घाव भरना आसान नहीं होता।
इस इंटरव्यू में एला ने अपने परिवार से मिली ताकत, पुराने आघातों से जूझने और खुद को सच में स्वीकार करने की शुरुआत पर भी खुलकर बात की। एला ने बताया कि कैसे उनका परिवार उनके लिए सहारा बना। उन्होंने कहा, मुझे सबसे ज्यादा ताकत और मजबूती मेरे परिवार से मिली। मेरा परिवार बहुत ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं है और न ही मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति ही बहुत मजबूत थी, लेकिन हमारे रिश्तों की नींव प्यार पर टिकी है।' इसके साथ ही उन्होंने बताया, 'मेरे पेरेंट्स मुझे हर हाल में प्यार करते हैं। शुरुआत में वो मेरी बात से सहमत नहीं थे, लेकिन जैसे ही उन्हें समझ आया कि यह उनके बच्चे यानी मेरे लिए सही है, उन्होंने मेरा पूरा साथ दिया।' एला के मुताबिक, उस वक्त उनके माता-पिता उनके लिए दुनिया से भी लड़ने को तैयार हो गए, और उन्होंने ऐसा करके भी दिखाया।
इसके आगे उन्होंने कहा कि लंबे समय से वो जिस लक्ष्य के लिए मेहनत कर रही थी, उसे हासिल करने के बावजूद, उनको ख़ुशी नहीं मिली। एला ने बताया कि इस भावनात्मक उथल-पुथल ने उन्हें चौंका दिया था, “लेकिन असल में सबसे अजीब बात ये थी कि जब मुझे वह सब कुछ मिल गया जो मैं चाहती थी, जब पहचान पत्र बदल गए, नाम बदल गया, सब कुछ तैयार था, तब भी मुझे वो संतुष्टि नहीं मिली जिसकी मुझे तलाश थी।' इसके आगे उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि इस सफर में मेरे साथ जो दर्दनाक घटनाएं घटीं, उन्हें समझने का मुझे समय ही नहीं मिला। मुझे पहचान पत्र बदलवाने थे। मुझे हार्मोन लेने थे और इलाज शुरू करवाना था। और उस दौरान आप एक तरह से सब कुछ भूल जाते हैं, लेकिन आपको वो बुक याद रह जाती है जिसमें लिखा होता है कि आपका शरीर सब कुछ गिनता रहता है? तो यह कितना अजीब है कि मैंने जेंडर ट्रांजिशन किया और फिर जब मैं घर से बाहर निकलती तो लोग मुझे घूरते और मुझे ऐसा लगता जैसे मैं स्कूल के गलियारे में हूं और लोग मुझे घूर रहे हैं और मुझ पर हंस रहे हैं। लेकिन ऐसा नहीं था। यह एक ट्रॉमा था। यह एक तरह की सोच थी।” .
एला डी वर्मा के लिए सबसे मुश्किल लड़ाई समाज से नहीं, बल्कि खुद से थी। उन्होंने कहा, “तभी मुझे एहसास हुआ कि, अरे, मैंने दौड़ तो जीत ली है, लेकिन रास्ते में गिर गई और मेरे घुटने में चोट लग गई, और अब इसे ठीक करने की बारी मेरी है। तो यही सबसे कठिन हिस्सा था। मुझे लगता है कि लोग सोचते हैं कि खुलकर सामने आना और दूसरों को स्वीकार करवाना मुश्किल है। जरा खुद को स्वीकार करने की कोशिश करो। असली मुश्किल तो यही है।”
अगर एला की एक्टिंग की बात करें तो अभिनय के मामले में एला का अंदाज काफी नेचुरल और एक्सप्रेसिव है। वो अपने किरदारों में इमोशंस को बहुत सादगी और सच्चाई के साथ पेश करती हैं, जिससे उनकी परफॉर्मेंस रिलेटेबल लगती है। खासकर उनके वीडियो और स्क्रीन प्रेज़ेंस में आत्मविश्वास साफ दिखता है, जो उनके व्यक्तिगत अनुभवों से भी जुड़ा हुआ महसूस होता है। एला की एक्टिंग अभी शुरुआती दौर में मानी जा सकती है, लेकिन उनके अंदर अपनी पहचान और भावनाओं को ईमानदारी से दिखाने की एक अलग क्षमता नजर आती है, जो उन्हें बाकी से अलग बनाती है।