Iran-Israel War: ईरान और इजराइल के बीच लंबे समय से चली आ रही जंग में अमेरिका और ईरान की डील के साथ ही नया मोड़ आ गया है। इस पूरे मामले पर अब फिल्म क्रिटिक केआरके ने चुटकी ली है।
Kamaal Rashid Khan Takes Dig At Donald Trump: अमेरिका के राष्ट्रपति और मौजूदा चुनावी राजनीति के सबसे चर्चित चेहरे डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह बनी है ईरान के साथ होने वाली नई डील, जिसे लेकर अमेरिका की राजनीति में जबरदस्त घमासान मचा हुआ है।
दिलचस्प बात ये है कि ट्रंप जिस समझौते को अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत बता रहे हैं, उसी को लेकर अब उनकी अपनी पार्टी के नेता भी सवाल उठाने लगे हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग ट्रंप को घेरते नजर आ रहे हैं। इसी बीच खुद को फिल्म क्रिटिक बताने वाले कमाल आर खान यानी केआरके ने भी ट्रंप पर तंज कस दिया है।
कमाल आर खान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए ट्रंप के पुराने बयानों की याद दिलाई। उन्होंने लिखा कि ईरान युद्ध से पहले ट्रंप के पांच बड़े लक्ष्य थे- ईरान में सत्ता परिवर्तन, बिना शर्त सरेंडर, यूरेनियम सौंपना, तेल पर अमेरिका का नियंत्रण और कठपुतली सरकार बनाना। लेकिन अब जो डील सामने आई है उसमें ट्रंप खुद ईरान की शर्तों को मानते दिखाई दे रहे हैं। केआरके ने तंज कसते हुए सवाल किया कि आखिर इस युद्ध में जीत किसकी हुई, इसका जवाब पूरी दुनिया जानती है।
दरअसल अमेरिका और ईरान के बीच जिस अंतरिम समझौते की चर्चा हो रही है, उसमें 60 दिनों तक सीजफायर बढ़ाने की बात कही गई है। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने, समुद्री माइंस हटाने और ईरान पर लगे कुछ प्रतिबंधों में राहत देने जैसी शर्तें भी शामिल बताई जा रही हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान को फिर से तेल बेचने की सीमित अनुमति भी मिल सकती है। यही वजह है कि ट्रंप के विरोधी ही नहीं बल्कि रिपब्लिकन पार्टी के कई नेता भी सवाल उठा रहे हैं कि अगर अंत में ईरान को इतनी छूट देनी थी तो फिर युद्ध की जरूरत क्या थी।
वहीं दूसरी तरफ ट्रंप समर्थक इसे शांति की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं। उनका कहना है कि लंबे युद्ध की बजाय बातचीत के जरिए समाधान निकालना ज्यादा बेहतर है। हालांकि अभी ये समझौता पूरी तरह फाइनल नहीं हुआ है और अमेरिकी अधिकारियों ने भी माना है कि हालात कभी भी बदल सकते हैं।
फिलहाल इस डील ने अमेरिकी राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हर कोई यही सवाल पूछ रहा है कि क्या ट्रंप ने अपनी पुरानी रणनीति से यू-टर्न ले लिया है? और अगर ऐसा है, तो क्या इसे अमेरिका की जीत माना जाएगा या फिर ईरान की बड़ी कूटनीतिक सफलता?