
Shekhar Suman does not use surname: शेखर सुमन एक जाने-माने एक्टर, होस्ट और राइटर के रूप में बॉलीवुड में जाने जाते है, लेकिन उनके नाम से जुड़ा एक सवाल लंबे समय से लोगों के मन में रहा है, आखिर वो अपने नाम के साथ कोई सरनेम क्यों नहीं लगाते? इस पर हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने इस राज पर्दा उठाया और इसके पीछे की इमोशनल कहानी शेयर की।
शेखर सुमन ने बताया कि 'सुमन' वास्तव में कोई जाति या पारंपरिक पारिवारिक सरनेम नहीं है। इस पर इंटरव्यूअर ने कहा कि बिहार में जाने के दौरान उन्होंने सिन्हा, श्रीवास्तव, प्रसाद जैसे कई सरनेम सुने थे, लेकिन कभी सुमन नहीं सुना, तब शेखर सुमन ने बताया कि 'सुमन' आम तौर पर सरनेम के रूप में इस्तेमाल नहीं होता और ये कोई सरनेम नहीं है। इसके पीछे उनके पिता की एक खास सोच थी।
बता दें, उनके पिता एक दूरदर्शी इंसान थे। उनका मानना था कि किसी व्यक्ति की पहचान उसके सरनेम या जाति से नहीं, बल्कि उसके काम, विचार और व्यक्तित्व से होनी चाहिए। उस दौर में बिहार में जाति और भेदभाव काफी देखने को मिलता था। शेखर ने बताया कि कई बार लोगों को उनके नाम और जाति के आधार पर जज किया जाता था। उनके पिता नहीं चाहते थे कि उनके बच्चों की पहचान किसी जातिगत दायरे में सीमित हो।
इसी सोच के तहत उन्होंने अपने सभी बच्चों को 'सुमन' नाम दिया। शेखर के अलावा उनके भाई-बहनों के नाम के साथ भी यही शब्द जोड़ा गया। दरअसल, शेखर ने ये भी बताया कि जब वो मुंबई या दिल्ली जैसे शहरों में जाते थे, तो लोग अक्सर उनकी जाति या कहां से आए हो जानने की कोशिश करते थे। हालांकि, उनके नाम से कोई स्पष्ट जातिगत पहचान नहीं बनती थी, जिससे उन्हें कभी भी उस तरह की सामाजिक जजमेंट का सामना नहीं करना पड़ा। वो अक्सर सवालों को मुस्कुराकर टाल देते थे और चाहते थे कि लोग उन्हें उनके काम से पहचाने।
एक्टर शेखर सुमन ने अपने नाम का अर्थ भी शेयर किया। उन्होंने कहा कि 'शेखर' का मतलब ऊंचाई और शिखर होता है, जबकि 'सुमन' का अर्थ फूल है। उनके लिए ये सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि उनके पिता की सोच और जीवन दर्शन का प्रतीक है। दरअसल, शेखर सुमन ने ये खुलासा लेहरें को दिए एक इंटरव्यू में किया और अपने बात के अंत में उन्होंने कहा कि इंसान की असली पहचान उसके कर्म और विचार होते हैं, न कि उसका सरनेम से।