
फतेहपुर : कहते हैं वक्त इंसान को बदल देता है, लेकिन कोई वक्त और गुस्सा इस कदर अंधा कर देगा कि एक पिता अपने ही खून की तड़प देखकर तस से मस न हो, ऐसा कम ही सुनने को मिलता है। फतेहपुर जिले के सीतापुर गांव में बुधवार को जो कुछ भी हुआ, उसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। एक 75 साल के बुजुर्ग पिता रामखेलावन पटेल ने अपनी ही लाइसेंसी दुनाली बंदूक से अपने बड़े बेटे अवनीश (35) और बहू मनीषा (28) को गोली मार दी।
दिल को दहला देने वाली बात यह नहीं है कि गोली चली; रूह कंपा देने वाला मंजर तो वो था जब गोली मारने के बाद करीब 40 मिनट तक दोनों लहूलुहान होकर दरवाजे पर तड़पते रहे और पिता हाथ में बंदूक लहराता हुआ किसी 'रंगबाज' की तरह वहीं घूमता रहा।
इस खूनी संघर्ष की पटकथा कुछ दिन पहले ही लिखी जाने लगी थी। रामखेलावन की पत्नी मिथलेश का पैर फ्रैक्चर हो गया था। घर में बड़े बेटे अवनीश और बहू मनीषा के साथ इलाज के खर्च और मां की देखभाल को लेकर अक्सर तनाव रहने लगा था। बुधवार सुबह करीब 10 बजे इसी बात को लेकर पिता-पुत्र में बहस शुरू हुई।
तभी बहू मनीषा भी वहां आ गई। बात बढ़ी तो मनीषा ने कहा कि 'हमें फसल और संपत्ति का हमारा हिस्सा दे दो, तभी हम देखभाल करेंगे।' यह सुनते ही रामखेलावन का पारा चढ़ गया और उसने बहू पर हाथ उठाने की कोशिश की। बीच-बचाव करने आए बेटे अवनीश ने पिता को धक्का दे दिया। 40 साल पहले डकैतों से लड़ चुके 75 साल के रामखेलावन को अपने बेटे का यह धक्का बर्दाश्त नहीं हुआ। खुद को अपमानित महसूस कर वह कमरे के अंदर गया और अपनी दोनाली बंदूक उठा लाया।
रामखेलावन ने आव देखा न ताव, पहली गोली सीधे बेटे अवनीश पर दाग दी जो उसके हाथ और पंजे को चीरती निकल गई। चीख-पुकार मची तो दूसरी गोली बहू मनीषा के पेट में मार दी। गोली लगने के बाद अवनीश जान बचाने के लिए बाहर भागा, लेकिन कुछ ही दूरी पर गिर पड़ा।
गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा गांव दहल गया। अवनीश और मनीषा खून से लथपथ दरवाजे पर तड़प रहे थे, लेकिन रामखेलावन हाथ में बंदूक लिए वहीं टहलता रहा। उसकी दहशत ऐसी थी कि 40 मिनट तक किसी ग्रामीण की हिम्मत नहीं हुई कि आगे बढ़कर तड़पते हुए दंपती को पानी भी पिला सके।
जब रामखेलावन को यकीन हो गया कि दोनों अब उठने लायक नहीं बचे, तो वह आराम से घर के अंदर गया, कपड़े बदले और साइकिल पर सवार होकर हरीखेड़ा शराब दुकान की तरफ भाग निकला।
इस पूरी घटना का सबसे काला पहलू यह है कि जिस बंदूक ने आज घर उजाड़ा, वो कभी इस परिवार की ढाल थी। करीब चार दशक पहले रामखेलावन के घर पर डकैतों ने हमला किया था, जिसमें उसके पिता (अवनीश के दादा) की हत्या कर दी गई थी। उसी हादसे के बाद जिला प्रशासन ने रामखेलावन को आत्मरक्षा के लिए यह लाइसेंसी बंदूक दी थी। किसे पता था कि डकैतों से रक्षा करने वाला यह हथियार एक दिन अपने ही नाती-पोतों का खून बहाएगा।
आरोपी के भागने के बाद ग्रामीणों ने पुलिस (डायल 112) को सूचना दी। ग्रामीणों का आरोप है कि एम्बुलेंस समय पर नहीं पहुंची, जिसके चलते घायलों को निजी वाहन से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर दोनों को कानपुर के रीजेंसी अस्पताल रेफर किया गया।
अत्यधिक खून बह जाने के कारण डॉक्टर अवनीश को नहीं बचा सके और उसे मृत घोषित कर दिया गया। वहीं, बहू मनीषा के पेट का ऑपरेशन कर गोली बाहर निकाल ली गई है, और वह अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है। इस दंपती की एक मासूम बच्ची थी, जिसकी पहले ही बीमारी से मौत हो चुकी है। अब अवनीश की मौत के बाद परिवार में सिर्फ मातम और सन्नाटा पसरा है।
घटना की सूचना मिलते ही एसपी अभिमन्यु मांगलिक और सीओ गौरव शर्मा ने भारी पुलिस बल के साथ मौका-ए-वारदात का मुआयना किया। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल की गई लाइसेंसी बंदूक को बरामद कर लिया है।
एसपी अभिमन्यु मांगलिक ने बताया कि आरोपी पिता वारदात के बाद साइकिल से फरार हो गया है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें गठित कर दी गई हैं। जल्द ही उसे सलाखों के पीछे भेजा जाएगा और इस घातक हथियार के लाइसेंस को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।