
फिरोजाबाद। बदलते परिवेश में मनुष्य अपने इंसानियत के धर्म से मुकरने लगा है। झूठी शान और शौकत के लिए लोग जिंदगी जी रहे हैं। ऐसे में जाति पांति और भेदभाव से ऊपर उठकर एक युवक ने वाल्मीकि समाज की 13 साल की बालिका की न केवल जान बचाई बल्कि शहरवासियों की दुआएं और वाह वाही भी लूटी। गंभीर रूप से बीमार बालिका की जानकारी होने पर युवक ने शहर में एसए ब्लड डोनेटर के नाम से व्हाट्स एप ग्रुप संचालित करने वाले को जानकारी देकर रक्तदान किया और बालिका की जान बचाई।
दो दिन से ट्राॅमा सेंटर में थी भर्ती
शहर में सफाई कर्मचारी के पद पर तैनात एक वाल्मीकि समाज के युवक की 13 वर्षीय बेटी दो दिन से शहर के ट्राॅमा सेंटर में भर्ती थी। उसकी प्लेट लेट्स करीब आठ हजार के आस-पास रह गई थीं। चिकित्सकों ने तत्काल उसे ब्लड चढ़ाने की बात कही थी। बालिका का ब्लड ग्रुप बी नेगेटिव था जो आस-पास के लोगों से मैच नहीं खा रहा था। शहर में ब्लड डोनेट करने वाली एसए ब्लड डोनेटर नामक संस्था के पदाधिकारी भी ट्राॅमा सेंटर पहुंचे थे। लेकिन उनके पदाधिकारियों का ब्लड ग्रुप मैच नहीं खा रहा था।
ग्रुप में पोस्ट करते ही मिली मदद
एसए ब्लड डोनेटर के नाम से ग्रुप संचालित करने वाले समाजसेवी व वैश्य समाज के जिला अध्यक्ष अमित गुप्ता ने अपने ग्रुप पर खून की जरूरत को लेकर ग्रुप में पोस्ट किया। पोस्ट देखकर शहर के कैलाश नगर निवासी रितेश आर्य ने रक्तदान करने की पेशकश कर दी। उन्होंने कहा कि उनका खून किसी की जान बचाने के काम आ सके तो इससे बेहतर उनके जीवन में कुछ नहीं है। यही सोचकर उन्होंने ग्रुप संचालक अमित गुप्ता को फोन किया और रात्रि में ही रक्तदान करने पहुंच गए। उनके रक्तदान करने से बालिका की जान बच गई। जब इस बात की भनक परिवारीजनों और शहर के लोगों को लगी तो वह बधाई देने ट्राॅमा सेंटर पहुंच गए।
जान बचाना ही मुख्य उद्देश्य
ग्रुप संचालक अमित गुप्ता का कहना है कि उनका और उनके साथियों का मुख्य उद्देश्य लोगों की जान बचाना है। इसके लिए वह सदैव प्रयासरत रहते हैं। क्षेत्र में कहीं भी किसी को रक्त की जरूरत हो तो वह तत्काल हमें सूचित कर सकता है। उनके रक्त की व्यवस्था के लिए ग्रुप के सभी सदस्य पूरे तन, मन और धन से साथ रहते हैं। वाल्मीकि नवयुवक संघ के जिला अध्यक्ष विनय कुमार वाल्मिकि, पूर्व मंडल अध्यक्ष निर्मल शर्मा, अमित जैन आदि मौजूद रहे।