
आरोपी विराज (फोटो- पत्रिका)
Aarav Murder Case Latest Update:फिरोजाबाद की सत्र अदालत से डेढ़ साल के मासूम आरव की हत्या के मामले में दोषी जितेंद्र पाठक उर्फ विराज को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद अब कानूनी प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। कानूनी जानकारों के मुताबिक सत्र न्यायालय द्वारा दी गई फांसी की सजा को तब तक लागू नहीं किया जा सकता, जब तक इलाहाबाद हाईकोर्ट उस पर अपनी अंतिम मुहर न लगा दे। इसके लिए नियमानुसार 30 दिन के भीतर इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल की जाएगी।
शिकोहाबाद पुलिस और मॉनीटरिंग सेल ने इस मामले में तत्परता की एक ऐसी मिसाल कायम की है, जो भारतीय कानूनी इतिहास में दर्ज हो गई है। 30 मई 2026 को हुई इस रूह कंपा देने वाली वारदात के बाद शिकोहाबाद पुलिस और मॉनीटरिंग सेल ने तेजी से कार्रवाई करते हुए महज 6 दिन में 80 पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी। 9 जून को कोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया और अगले 7 दिनों में 13 मुख्य गवाहों के बयान दर्ज किए गए। इसके बाद वारदात के सिर्फ 41वें दिन, 10 जुलाई को अदालत ने आरोपी विराज को फांसी की सजा और 50 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जिला जेल के अधीक्षक अमित चौधरी ने बताया कि फांसी की सजा का एलान होते ही बंदी जितेंद्र उर्फ विराज को लेकर जेल प्रशासन पूरी तरह अलर्ट हो गया है। जेल मैनुअल के कड़े नियमों के तहत अब विराज को सामान्य बंदियों से अलग बैरक में शिफ्ट कर दिया गया है जहां 24 घंटे सुरक्षाकर्मियों का कड़ा पहरा रहेगा। इसके साथ ही सुरक्षा कारणों और नियमों का हवाला देते हुए उसे जल्द ही आगरा सेंट्रल जेल ट्रांसफर करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
फांसी की सजा पाने के बाद कैदी अक्सर अवसाद या गुस्से का शिकार हो जाते हैं। इसे देखते हुए जेल प्रशासन विशेष सावधानी बरत रहा है। डॉक्टरों और वार्डन की टीम विराज की मानसिक स्थिति और स्वास्थ्य पर लगातार नजर रख रही है। उसका रेगुलर मेडिकल चेकअप कराया जा रहा है और बैरक के आसपास की सुरक्षा काफी कड़ी कर दी गई है ताकि वह खुद को किसी तरह का कोई नुकसान न पहुंचा सके।
इस जघन्य हत्याकांड में मृत मासूम आरव की मां रति की गवाही सबसे अहम साबित हुई। रति ने कोर्ट के सामने रोते हुए वह दिल दहला देने वाला खौफनाक मंजर बयां किया। उसने बताया कि विराज लंबे समय से उसपर शादी का दबाव डाल रहा था। रति ने उसके प्रस्ताव को ठुकरा दिया। जिससे नाराज विराज बेटे आरव को टॉफी के बहाने अपने साथ ले गया। इसके बाद उसने बच्चे को बार-बार सड़क पर पटका। आठ बार पटकने के बाद शव को घर के बाहर फेंककर फरार हो गया।
रति ने कहा, 'वो मेरे बच्चे को प्यार से गोद में लेकर ले गया था। मुझे क्या पता था कि वो इतना बर्बर है।' मां की इस गवाही के अलावा घटनास्थल से मिले साक्ष्य और फॉरेंसिक रिपोर्ट ने भी दोषी के खिलाफ अहम सबूत पेश किए जिससे उसका जुर्म पूरी तरह से साबित हो गया।
मासूम आरव की हत्या के अलावा फांसी की सजा पाने वाले दोषी विराज पर एक और गंभीर मुकदमा दर्ज है। 30 मई, 2026 की रात जब पुलिस ने मासूम की हत्या करके भाग रहे विराज की घेराबंदी की थी तो उसने शिकोहाबाद थाना पुलिस पर फायरिंग कर दी थी। इस मामले में पुलिस ने जानलेवा हमले की धाराओं में अलग से केस दर्ज किया था। कोर्ट ने चार्जशीट का संज्ञान लेते हुए आरोपी पर चार्ज फ्रेम यानी आरोप तय कर दिए हैं। जल्द ही इस मामले का ट्रायल भी कोर्ट में शुरू होने वाला है। बता दें पुलिस मुठभेड़ में दोनों पैरों में गोली लगने के कारण आरोपी विराज वैसाखी (बाकर) के सहारे अदालत पहुंचा था।
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Updated on:
11 Jul 2026 01:13 pm
Published on:
11 Jul 2026 01:02 pm
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