
Aarav Murder Case: आरव हत्याकांड: 41 दिन में फैसला, विराज को फांसी की सजा (फोटो सोर्स: ANI)
Viraj Death Sentence: जब कानून का शिकंजा कसता है, तो बड़े से बड़े सूरमाओं के पैर उखड़ जाते हैं। फिरोजाबाद के जिला एवं सत्र न्यायालय में शुक्रवार को कुछ ऐसा ही मंजर देखने को मिला। जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. बब्बू सारंग ने जैसे ही डेढ़ साल के मासूम आरव के हत्यारे विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को मौत की सजा (फांसी) सुनाई, कोर्ट रूम में सन्नाटा पसर गया। सुनवाई के दौरान जब जज ने आरोपी से पूछा कि उसने उस नन्हे बच्चे को क्यों मारा, तो विराज विचलित हो गया। उस पर ऐसा मानसिक दबाव बना कि वह भरी अदालत में खुद को ही ताबड़तोड़ थप्पड़ मारने लगा। हालांकि, उसका यह ड्रामा और पश्चाताप कानून की नजर में उसे बचा नहीं सका।
शिकोहाबाद पुलिस और मॉनीटरिंग सेल ने इस मामले में तत्परता की एक ऐसी मिसाल कायम की है, जो भारतीय कानूनी इतिहास में दर्ज हो गई है। 30 मई 2026 को हुई इस रूह कंपा देने वाली वारदात के बाद:
फिरोजाबाद के एसएसपी आदित्य लांग्हे और डीएम संतोष कुमार शर्मा ने इस त्वरित न्याय की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे ऐतिहासिक फैसलों से समाज में अपराधियों के भीतर कानून का खौफ पैदा होगा और न्यायपालिका के प्रति जनता का विश्वास मजबूत होगा।
मामले की जड़ में एकतरफा प्यार और सनक थी। बदायूं के सियाराम नगर निवासी सुमित शर्मा की शादी रति शर्मा से हुई थी। आपसी अनबन के बाद रति अपने बेटे आरव के साथ मायके शिकोहाबाद आ गई थी। इस दौरान रिश्ते का देवर विराज रति को तलाक दिलाने में मदद के बहाने नजदीक आने की कोशिश करने लगा। विराज रति से शादी करना चाहता था, लेकिन रति ने साफ कह दिया कि वह अपनी पूरी जिंदगी सिर्फ अपने बेटे आरव के सहारे काटेगी।
बस यही बात कातिल विराज को चुभ गई। उसे लगा कि आरव ही उसकी राह का सबसे बड़ा रोड़ा है। 30 मई की शाम वह मासूम को टॉफी दिलाने के बहाने बाहर ले गया और घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे के सामने उसे आठ बार जमीन पर बेरहमी से पटका। सरकारी अधिवक्ता (DGC) राजीव उपाध्याय प्रियदर्शी ने बताया कि यह सीसीटीवी फुटेज इतना विचलित करने वाला था कि इसे कोर्ट में दोबारा देखने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पा रहा था। यही फुटेज कातिल की मौत का सबसे बड़ा गवाह बना।
| परिजन | प्रतिक्रिया और वर्तमान स्थिति |
| सुमित ( पिता, बदायूं) | कोर्ट के फैसले के बाद घर लौटे पिता सुमित रोते हुए बोले, "फांसी की सजा का स्वागत है, लेकिन कलेजे को ठंडक तभी मिलेगी जब वह फंदे पर लटकेगा। उस मासूम ने दुनिया भी नहीं देखी थी, उसका क्या कसूर था?" |
| रति (मां, शिकोहाबाद) | "कातिल ने मेरे बच्चे की निर्मम हत्या की थी। अदालत के इस फैसले से आज मेरे बेटे की आत्मा को थोड़ी शांति जरूर मिलेगी।" |
| दादी व अन्य परिजन | बदायूं स्थित घर में इकलौते चिराग आरव को याद कर दादी का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार अब तक इस गहरे सदमे से उबर नहीं पाया है। |
दूसरी तरफ, पुलिस मुठभेड़ में दोनों पैरों में गोली लगने के कारण वैसाखी (बाकर) के सहारे अदालत पहुंचने वाले कातिल विराज का कहना है कि उसने नशे की हालत में यह कदम उठाया और वह इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेगा। वहीं विराज के भाइयों ने भी इस घटना पर गहरा अफसोस जताते हुए कहा कि विराज नशे की लत और गलत संगत का शिकार हो चुका था।
Updated on:
11 Jul 2026 11:08 am
Published on:
11 Jul 2026 11:08 am
