गाज़ियाबाद

क्या गाजियबाद कर रहा किसी बड़े हादसे का इंतजार? इंदिरापुरम में लगी आग ने खोली सिस्टम की पोल

Ghaziabad fire: गाजियाबाद के इंदिरापुरम में लगी आग ने फायर विभाग की सीमित क्षमता उजागर की। रेस्क्यू सफल रहा, लेकिन उपकरणों की कमी और हाईराइज सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

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गाजियाबाद की सोसाइटी में भीषण आग | Image - X/@ANI

Ghaziabad fire: इंदिरापुरम के गौर ग्रीन एवेन्यू में बुधवार को लगी आग ने साफ दिखा दिया कि शहर की फायर सेफ्टी की हालत असल में कैसी है। आग लगने के बाद करीब 30-45 मिनट तक हालात काफी खराब बने रहे। आपको बता दें कि ग्रीन एवेन्यू में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी थी। आग इतनी भयावक थी कि इसने चंद मिनटों में 9वीं, 10वीं और 11वीं मंजिल को भी अपनी आगोश में ले लिया। इस दौरान लोगों के घरों में काफी नुकसान हुआ हालांकि राहत की बात यह है कि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई है।

होदसे के रेस्क्यू प्रोसेस में सबसे बड़ी दिक्कत यह सामने आई कि पानी ऊपर वाली मंजिल तक पहुंच ही नहीं पा रहा था। फिर भी फायर टीम ने जैसे-तैसे 10 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। उपकरणों की कमी की वजह से आग बुझाना असरदार तरीके से और समय पर नहीं हो पाया। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या गाजियाबाद सही में बड़ी आगजनी से निपटने के लिए तैयार है?

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उपकरणों की कमी बनी चुनौती

गाजियाबाद के फायर विभाग के पास पूरे जिले के हिसाब से संसाधन काफी कम हैं। करीब 780 वर्ग किलोमीटर के बड़े इलाके और लाखों लोगों की आबादी के लिए सिर्फ 22 फायर टेंडर ही हैं, जो जरूरत के मुकाबले कम माने जा रहे हैं। सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि ऊंची इमारतों तक पहुंचने के लिए सिर्फ एक ही हाइड्रोलिक क्रेन है, जो करीब 42 मीटर यानी 14 मंजिल तक ही पहुंच पाती है, जबकि शहर में इससे कहीं ज्यादा ऊंची बिल्डिंग्स हैं।

वीडियो में साफ दिखी सिस्टम की कमी

आग लगने के शुरुआती वक्त के वीडियो में भी साफ दिखा कि पानी ऊपरी मंजिलों तक नहीं पहुंच पा रहा था, जिससे आग बुझाने में देरी हुई। इसके अलावा विभाग के पास सिर्फ तीन वाटर बाउजर, तीन वाटर मिस्ट मशीन, दो फोम टेंडर और दो रेस्क्यू टेंडर ही हैं। ऐसे में बड़ी इमरजेंसी के समय विकल्प काफी सीमित रह जाते हैं।

पड़ोसी जिले से मिली मदद

हालात खराब होते देख गौतम बुद्ध नगर के फायर विभाग से मदद मांगी गई। वहां से तुरंत दो हाइड्रोलिक क्रेन और चार फायर टेंडर मौके पर भेजे गए। इस मदद से आग को काबू में करने में आसानी हुई और लोगों को बचाने का काम भी तेजी से हुआ। हालांकि, वहां रहने वाले लोगों का कहना है कि अगर शुरू में ही सही और पर्याप्त उपकरण होते, तो इतना नुकसान नहीं होता।

चीफ फायर ऑफिसर का क्या है कहना?

गाजियाबाद के चीफ फायर ऑफिसर ने साफ कहा कि आग बुझाने का काम सिर्फ फायर ब्रिगेड के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। हर रेजिडेंशियल सोसाइटी को अपना अंदरूनी फायर सिस्टम मजबूत रखना बहुत जरूरी है। इसमें फायर अलार्म, स्प्रिंकलर सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट और समय-समय पर होने वाली ड्रिल शामिल होनी चाहिए, ताकि शुरुआत में ही आग पर काबू पाया जा सके।

उन्होंने यह भी बताया कि विभाग जल्द ही दो नई हाइड्रोलिक क्रेन खरीदने की तैयारी में है, जो करीब 101 मीटर तक पहुंच सकेंगी। इससे भविष्य में ऊंची इमारतों में आग लगने पर बेहतर तरीके से और जल्दी रिस्पॉन्स दिया जा सकेगा।

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