गाजियाबाद में ससुरालियों ने पुत्रवधू को घर से भगाया, सामाजिक संगठन भी उतरे समर्थन में
गाजियाबाद. प्रदेश में भले ही महिलाओं की सुरक्षा और उनके हितों को लेकर भले ही सरकार तमाम दावे कर रही हो, लेकिन आज भी कहीं ना कहीं महिलाएं अपने आपको असुरक्षित महसूस कर रही हैं। इसके अलावा अपने हितों की लड़ाई के लिए भी लड़ने वाली महिलाओं को पूरी तरह न्याय नहीं मिल पा रहा है। इसका एक जीता जागता उदाहरण दिल्ली से सटे गाजियाबाद में उस वक्त सामने आया जब एक बहू को मजबूर होकर अपने अधिकार के लिए अपनी 5 साल की मासूम बेटी को लेकर ससुराल के गेट के सामने धरने पर बैठना पड़ा।
बता दें कि शिखा नामक युवती का विवाह 5 साल पहले लोकेश सैनी निवासी डी-90 सेक्टर-23 संजय नगर में हुआ था। 2 साल बाद पति की हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई थी। इसके बाद से शिखा अपने ससुराल में रहकर बुटीक चलाकर अपना व अपनी बेटी का पालन-पोषण करने लगी। इसी बीच ससुराल वालों ने शिखा को मायके भेज दिया था। जब शिखा मायके से लौटी तो उसको घर में घुसने नहीं दिया गया और मारपीट कर भगा दिया गया। कई बार शिखा घर पर रहने के लिए आई और अपने ससुराल वालों को घर में रहने के लिए मनाती रही। जब शिखा को ससुराल वालों ने घर में नहीं घुसने दिया तब मजबूर होकर शिखा घर के बाहर ही अपनी 5 साल की बेटी के साथ धरने पर बैठ गई। अब देखना ये है कि पीड़िता को इंसाफ मिलता है या नहीं।
इस मामले की खबर जब गीतांजलि वेलफेयर एजुकेशनल समिति की अध्यक्ष वंदना चौधरी को मिली तो वे अन्य महिलाओं के साथ शिखा के पास पहुंची। उन्होंने शिखा के ससुराल वालों से बात करने की कोशिश की, लेकिन ससुराल वालों ने न तो दरवाजा खोला और न ही कोई बात की। इसके बाद संस्था की महिलाओं ने शिखा के समर्थन में जमकर नारेबाजी की। साथ ही कहा कि जब तक शिखा को इंसाफ नहीं मिलेगा। उसका साथ देने के लिए वह भी धरने पर ही बैठेंगी। समर्थन देने वालों में सीमा खुटैल, रीना चौधरी, रीमा कोहली, रेनू चौधरी, रमा गुप्ता, विनीता चौधरी व अन्य महिलाएं शामिल हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या पीड़िता के साथ बैठी ये महिलाएं पीड़िता को न्याय दिला पाने में कामयाब हो पाती है या नहीं।