
Gonda Flood: गोंडा जिले में घाघरा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। नदी एल्गिन ब्रिज पर खतरे के निशान से 13 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। करनैलगंज और तरबगंज तहसील के 10 से अधिक गांव बाढ़ की जद में आने की आशंका है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर नावों की व्यवस्था की है। इसके साथ ही लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिला में घाघरा नदी का बढ़ता जलस्तर अब बाढ़ का खतरा बढ़ाने लगा है। नदी का पानी धीरे-धीरे तटीय गांवों की ओर बढ़ रहा है। जिससे करनैलगंज और तरबगंज तहसील के 10 से अधिक गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। अगर जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले दिनों में कई गांवों में पानी प्रवेश कर सकता है। पिछले 24 घंटों में घाघरा नदी का जलस्तर 6 सेंटीमीटर बढ़ा है। शुक्रवार सुबह 10 बजे तक एल्गिन ब्रिज पर नदी खतरे के निशान से 13 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज की गई। वहीं विभिन्न बैराजों से कुल 2,88,160 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इसमें गिरजा बैराज से 1,50,636 क्यूसेक, शारदा बैराज से 1,35,054 क्यूसेक और सरयू बैराज से 2,570 क्यूसेक पानी शामिल है। इससे नदी का जलस्तर और बढ़ने की संभावना बनी हुई है।
स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। संभावित प्रभावित गांवों में नावों की व्यवस्था कर दी गई है। ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके। नदी किनारे रहने वाले परिवारों से भी सावधानी बरतने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है।
तरबगंज और करनैलगंज क्षेत्र में एसडीआरएफ की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। टीम गांव-गांव जाकर लोगों को बाढ़ से बचाव के तरीके बता रही है और जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत पहुंचाने की तैयारी में जुटी है।
बढ़ते जलस्तर का असर ग्रामीणों के रोजमर्रा के जीवन पर भी दिखाई देने लगा है। कई जगह लोग एक गांव से दूसरे गांव जाने के लिए नावों का सहारा ले रहे हैं। पशुओं के लिए चारा लाने और जरूरी सामान पहुंचाने में भी दिक्कतें सामने आ रही हैं।
जिला आपदा विशेषज्ञ राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 13 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच चुका है। प्रशासन हर स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित विभाग अलर्ट मोड में हैं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है। साथ ही उन्होंने बताया कि फिलहाल नदी किनारे हो रहे कटान की रफ्तार पर भी काफी हद तक नियंत्रण बना हुआ है।