
Gonda News: गोंडा के परसपुर थाना क्षेत्र में सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मौत के बाद शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है। हादसे के बाद परिजन और स्थानीय लोगों ने थाने के बाहर शव रखकर प्रदर्शन किया था। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच नोकझोंक भी हुई। बाद में पुलिस ने प्रदर्शन को लेकर 34 नामजद और करीब 40 से 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। अब समाजवादी पार्टी ने इसी कार्रवाई को लेकर पुलिस पर सवाल उठाए हैं।
समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव दिग्विजय सिंह सोमवार को अपने समर्थकों के साथ गोंडा पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। उन्होंने अपर पुलिस अधीक्षक राधेश्याम राय को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के जरिए परसपुर थाने में दर्ज मुकदमे की निष्पक्ष जांच कराने और कथित तौर पर फर्जी तरीके से नामजद किए गए। लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने की मांग की गई।
दिग्विजय सिंह का आरोप है कि प्रदर्शन के मामले में दर्ज एफआईआर में कुछ ऐसे लोगों के नाम भी शामिल कर दिए गए हैं। जो कथित तौर पर घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। उन्होंने एक व्यक्ति का उदाहरण देते हुए दावा किया कि उसका नाम एफआईआर में दर्ज है। जबकि वह उस समय जेल में बंद था। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र या पुलिस स्तर से पुष्टि अभी नहीं हुई है।
दरअसल, परसपुर थाना क्षेत्र में बीते दिनों सड़क दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। इसके बाद मृतक के परिजनों और स्थानीय लोगों ने थाने के बाहर शव रखकर विरोध जताया था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और लोगों के बीच नोकझोंक हुई। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शन को लेकर मुकदमा दर्ज किया। वहीं हादसे को लेकर वाहन चालक के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई थी।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों ने अपनी मांगों को लेकर सड़क पर शव रखकर विरोध किया था। उनका कहना है कि निर्दोष लोगों को मुकदमे में नामजद नहीं किया जाना चाहिए। सपा ने पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक दोषियों पर ही कार्रवाई करने की मांग की है। अब इस मामले में पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि एफआईआर में नामजद सभी लोगों की प्रदर्शन में क्या भूमिका थी।